अंतरजातीय विवाह सही या गलत???

💚अंतरजातीय विवाह सही या गलत💚

 अंतरजातीय विवाह:हेलो दोस्तो आज मै आपको “inter caste marriage”  के बारे मे बताना चाहती हूं।💞💞

“बदलते समय के साथ लोगो के विचार भी बदलते जा रहे है।❣

अगर मां- बाप पुराने ख्यालात के है, तो बच्चे उनको बदलने की कोशिश करते है। ,  क्योंकि बच्चो के हिसाब से वो फिट नही होते है।”❣
💗उनकी सोच ओर बच्चो की सोच के बीच टकराव होने लगते है।, इसलिए मां-  बाप अपने आप को उनकी सोच मे ढालने की कोशिश करते है।💗
आज के बच्चो की सोच समय के बदलती जा रही है।
ओर सबको समय के साथ बदलना चाहिए।, क्योंकि समय परिवर्तन शील है। वह किसी के लिए नही रूकता है।

अंतरजातीय विवाह क्या है।???💝💝💝

“जब कोई लङका, किसी अन्य जाति या धर्म की लङकी के साथ विवाह कर लेता है।, ” उसे ही अंतरजातीय विवाह ” कहते है।”
इस विवाह  को सरकार ने भी अनुमती दे रखी है।
"पहले के समय मे लोग, समाज के लोगो से ङरते थे।
समाज के लोग क्या कहेगे इस बारे मे
ज्यादा सोचते थे"

 आज समय की चाल अलग है। लोगो की सोच मे व समाज की सोच मे परिवर्तन आया है। मां- बाप बच्चो की खुशी के बारे मे सोचने लगे है।
आज “intercaste marriage” होती है। फिर भी कुछ गांवो की स्थिति आज भी वैसी ही है।💖💖💖
वो अपनी सोच को बदलना नही चाहते है। , क्योंकि इससे उनके अहम को भारी क्षति होती है।
“💝💝मै खुद इस सोच को नकारती हूं।,क्योंकि हमारा समाज आज हर क्षेत्र मे  तरक्की कर रहा है। तो इस क्षेत्र मे क्यों नही।💞💞💞
“हर इंसान को हक है। अपने हिसाब से जीने का। ओर अपना जीवनसाथी चुनने का।क्योंकि हम उसी के साथ खुश रह सकते है।अगर हम अपनी मर्जी से शादी नही करते है।तो हम अपने साथ नाइंसाफी करते है।”💟💟💟💟
मैं सायद सही हूं या नही लेकिन आप सब अपने विचार मुझे “comment ” करके जरूर बताये।💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓
धन्यवाद
लेखक: रविना आर्य
 Aryaravina32@gmail.com

8 Comments on “अंतरजातीय विवाह सही या गलत???”

  1. कॉलेज स्टार डॉट इन में अपना ब्लॉग कैसे प्रकाशित किया जाता है

  2. कॉलेज स्टार डॉट इन में अपना पोस्ट कैसे प्रकाशित किया जाता है

  3. मेरे विचार से यह सही नहीं है।
    समय परिवर्तनशील है, परिवर्तन आवश्यक है किन्तु सही परिवर्तन आवश्यक है।

  4. आजकल जो युवा वर्ग स्वेच्छानुसार शादी करते हैं,वही ज्यादातर एक दूसरे से तलाक लेते हैं।भले ही कुछ दिनों के लिए सही लगता हो लेकिन कुछ समयांतराल में सब कुछ बदलने लगता है।
    मैं कहना चाहूँगा जो शाश्वत धर्म और समाज को छोड़कर चलते हैं,वो न इहलोक और न परलोक ही सुधार सकता है।
    जय श्री राम

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