भारतीय वीरता पदक ( INDIAN GALLANTRY AWARDS )

भारतीय वीरता पदक ( INDIAN GALLANTRY AWARDS )

भारतीय वीरता पदक |दोस्तो, दुश्मन चाहे कितना भी भारी हो या चाहे उसकी कितनी भी तैयारी हो लेकिन भारतीय सेना अपनी वीरता से उसे झुकाने में सक्षम है |
उनकी वीरता को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार उन्हें वीरता पदक से विभूषित करती है |
आज हम भारत सरकार द्वारा वीरता के लिए दिये जाने वाले पदक के बारे में जानेंगें |
दोस्तों, भारतीय वीरता पदक दो तरह से दिये जाते है | एक युद्ध काल के दौरान वीरता दिखाने पर और दूसरा शांतिकाल के दौरान वीरता के लिए |
युद्ध काल के दौरान दिये जाने वाले पदक – परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र |
शांति काल के दौरान दिये जाने वाले पदक – अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र |

 

पदक 1.परमवीर चक्र ——-

 
यह सर्वोच्च वीरता पदक है जो युद्ध काल के दौरान सैन्यकर्मियों द्वारा अद्भुत वीरता के लिए दिया जाता है |
यह चक्र मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है |इसका आरम्भ 26 जनवरी 1950 को किया था |
भारत रत्न के बाद सबसे प्रतिष्ठित सम्मान परमवीर चक्र ही है |
भारतीय सेना जब ब्रिटिश सेना के अधीन कार्य करती थी तो सेना का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस हुआ करता था |
  
सबसे पहला परमवीर चक्र 03 नवम्बर 1947 को मेजर सोमनाथ शर्मा को दिया गया |
         
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“लिख रहा हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज आयेगा, 
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लायेगा, 
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि, 
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा |”
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अब तक कुल 21 परमवीर चक्र दिये जा चुके हैं |इसमें से 14 पदक मरणोपरांत दिये गये हैं |
      
अंतिम परमवीर चक्र 6 जुलाई 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया |

 

पदक 2.महावीर चक्र ——–

             
युद्ध काल के दौरान विलक्षण वीरता के लिए दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च पदक महावीर चक्र है |
यह तीनों तरह के सैन्य कर्मी – Army, Navy और Air Force को दिया जाता है |
महावीर चक्र मरणोपरांत भी दिया जा सकता है |इसकी स्थापना 26 जनवरी 1950 को की गई |
पहला महावीर चक्र ब्रिगेडियर राजिन्द्र सिंह को मरणोपरांत उनकी पत्नी रामदेई को प्रदान किया गया |
 
1971 के भारत – पाक युद्ध में सबसे अधिक महावीर चक्र प्रदान किये गये थे |इस युद्ध में 11 महावीर चक्र Air Force के सैन्य कर्मियों को दिये गये |

 

पदक 3.वीर चक्र ——-

               
युद्ध काल के समय सैन्यकर्मियों की वीरता को सम्मानित करने के लिए दिया जाने वाला यह तीसरा सर्वोच्च पदक है |
प्रथम वीर चक्र विजेता हवलदार स्वर्गीय श्री छोग सिंह थे, जो द्वितीय विश्वयुद्ध में भी भाग लिये और 1948 में जम्मू – कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में वीरतापूर्वक दुश्मनों का सामना करते हुए कई दुश्मनों को मार गिराया |
26 जनवरी 1950 को डॉ राजेन्द्र प्रसाद द्वारा उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया |

 

पदक 4.अशोक चक्र ——–

यह शांति के समय वीरता प्रदर्शित करने पर दिया जाने वाला सर्वोच्च पदक है|
यह पदक सैन्यकर्मियों के अलावा आम नागरिकों को भी दिया जा सकता है |इसे मरणोपरांत भी दिया जा सकता है |
अशोक चक्र विजेता की घोषणा वर्ष में दो बार होती है जिसे 26 जनवरी व 15 अगस्त को प्रदान किया जाता है |
इस पदक की स्थापना 04 जनवरी 1952 को किया गया | 1952 में तीन वीरों सुहास विस्वास, बचित्तर सिंह और नर बहादुर थापा को दिया गया |
 
26 जनवरी 2018 को अशोक चक्र पुरस्कार ज्योति प्रकाश निराला को मरणोपरांत दिया गया |

     

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“आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे 
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे 
बची हो जो एक बूँद भी लहू की तब तक
भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे |”

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पदक 5.कीर्ति चक्र ———–

यह शांति के समय दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च वीरता पदक है |
यह भी सैनिकों तथा असैनिकों की असाधारण वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है |
वर्ष 1967 से पहले इसे अशोक चक्र – श्रेणी 2 के नाम से जाना जाता था |इसकी स्थापना 04 जनवरी 1952 को की गई थी |
कुछ कीर्ति चक्र विजेता के नाम हैं – विनोद कुमार चौबे, राजेन्द्र सिंह, कैप्टन दीपक शर्मा, राजेन्द्र बेनीवाल, एजाज अहमद इत्यादि |

पदक 6.शौर्य चक्र ———–

शांति काल के समय अद्भुत वीरता दिखाने वाले सैनिक या असैनिक को दिया जाने वाला तीसरा सर्वोच्च पदक है |
इसकी स्थापना 1952 में की गई थी, परन्तु 1967 से पहले इसे अशोक चक्र – श्रेणी 3 के नाम से जाना जाता था |
कुछ शौर्य चक्र विजेताओं के नाम हैं – ले. कर्नल अतुल गुप्ता, मेजर विनय रेड्डी, कैप्टन आशुतोष कुमार, नायब सूबेदार विजय कुमार इत्यादि |

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“जो देश के लिए शहीद हुए 
उनको मेरा सलाम है, 
अपने खून से जिस जमीं को सींचा
उन बहादुरों को सलाम है ||”

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जय हिन्द  🇳🇪🇳🇪🇳🇪जय भारत

 

आपका —– प्रमोद कुमार 

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About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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5 Comments on “भारतीय वीरता पदक ( INDIAN GALLANTRY AWARDS )”

    1. आप जिस पैराग्राफ़ को कलर करना चाहते हैं, उसे सलेक्ट कर लीजिए, उसके बाद उपर टूल बॉक्स में A को क्लिक करिए, एक विन्डो खुलेगी |उसमें custom पर क्लिक करिये |वहाँ जैसा भी आपको कलर चाहिए कलर बार से सलेक्ट कर अप्लाई कर दीजि

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