तीसरा विश्व युद्ध नहीं है :सीरिया पर अमेरिकी हमला

■ तीसरा विश्व युद्ध नहीं है: सीरिया पर अमेरिकी हमला ■

तीसरा विश्व युद्ध नहीं है: सीरिया पर अमेरिकी हमला

इसका मतलब यह है कि जिन जानकारों को लगता है कि यह तीसरा विश्व युद्ध है,

 या तो वह विश्व इतिहास के जानकार नहीं हैं,

या फिर जल्दबाजी में ऐसा सोच रहा है

क्योंकि हकीकत यह है कि तीसरा विश्व युद्ध कभी नहीं लड़ता है

कुछ लोग सोचते हैं कि क्यों?

तो उन का जवाब का पता लगाने के लिए आइए,

पहले ताज घटनाओं में नजर डालें, फिर आगे बढ़ें

सीरिया पर अमेरिकी हमला 

कुछ ज्यादा बुद्धिमानों को  लगता है कि अब तीसरा विश्व युद्ध होने वाला है।

जरूर किसी के मुंह से सुन लिया जाए

जहां तक ​​वर्तमान स्थिति की बात है तो,

सीरिया सरकार ने  जब गृह युद्ध की मारी अपनी ही जनता की,

घातक रासायनिक हथियारों से हमला किया तो सिर्फ 40 लोग ही नहीं मरते

बल्कि सम्पूर्ण मानवता तड़प उठी।

इस प्रकार के प्रतिरोध स्वरूप और राष्ट्रपति असद के गुर्गे और मानव हानि न कर सकें। 

इसके लिए अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस ने शनिवार तड़के 14 अप्रैल 2018 को 103 मिसाइल दागे

जिसका उद्देश्य कलंकित कर देने वाला सीरियाई घटना की पुनरावृत्ति को रोकना था।

यह बात दीगर है कि सीरिया ने रूस के साथ आत्मरक्षा तंत्र विकसित किया है,

77 हमलावर मिसाइलों को नाकाम करना

लेकिन किसी के मृत्यु न होने के बाद भी यह संकेत व्यापक नुकसान और संदेश वाला था।

हमले के बाद

हमले के बाद रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन,

ईरान के सर्वोच्च नेता अया तुल्ला खुमैनी,

ने पश्चिमी देशों की कार्रवाई की निंदा की

यह बात अलग है कि सात साल से गृहयुद्ध की आग में जल रही आम जनता और  

सीरिया में राष्ट्रपति असद को हटाने की मांग के बारे में यह नेता कम ही चिंतित हैं

पुतिन ने इसे पर संप्रभुता पर हमला कहा।

पुतिन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की आपातकालीन बैठक बुलाई है ।

खुमैनी अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाई को अपराध कहा है ।

अमेरिकी हमला

सीरिया पर अमेरिका की ओर से जहां अत्याधुनिक बी -1 बी बाम्बर ने भाग लिया ,

वहीं फ्रांस की ओर से राफेल व मिराज -2000 और ब्रिटेन के टारनाडो लड़ाकू विमानों ने मिसाइल छोड़े ।

विशेष बात यह रही कि इन सक्षम विमानों ने सीरिया की जमीन पर पैर रखे बगैर ,

यह कारनामा किया है ।

और दमिश्क में दहशत का बाजार भी गर्म कर दिया है ।

यह हमला इतनी तीव्र गति से था कि सीरिया संभल ही नहीं पाया ।

कुछ और हथियार 

ब्रिटेन ने अपने 4 विध्वंसक टारनाडो फाइटर से सीरिया पर क्रूज मिसाइल दागी और,

टारनाडो ने साइप्रस स्थित रायल एयर फोर्स के बेस कैंप से उड़ान भरी थी ।

यह 400 किलोमीटर दूर से हमला कर सकते हैं ।

दो इंजन वाले  ये विमान जमीनी हमले के योग्य माने जाते हैं ।

इनकी विशेषता यह है कि यह दुश्मन जमीन में गए बगैर काम तमाम कर देते हैं ।

टामहाक क्रूज मिसाइल की विशेषता यह है कि इनका युद्ध क्षेत्र मे भी लक्ष्य बदला जा सकता है ।

इनके इस्तेमाल की आधिकारिक पुष्टि नहीं है ।

सीरिया की सीरियस हकीकत 

सीरियाई हमले और उसके भूत भविष्य की हकीकत यह है ,

कि सीरिया में सबके अपने अपने हित हैं ।

गृह युद्ध से जूझ रहा सीरिया पड़ोसी और पश्चिमी देशों की लड़ाई का अड्डा बना है।

सच यह है कि यहां सबके अपने अपने हित हैं ।

यदि अमेरिका अपना प्रभाव क्षेत्र कम नहीं करना चाहता तो रूस खुद को दोबारा

शक्तिशाली देश सिद्ध करना चाहता है ।

ईरान, सउदी अरब  और इजराइल की अपनी  लड़ाई है ।

बीते सात वर्षों में इस लड़ाई में सीरिया में तीन लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है ।

वहीं पचास लाख से ज्यादा लोगों ने देश छोड़ा है ।

क्यों नहीं है यह तीसरा युद्ध 

यह ताजा अमेरिकी हमला जो उसने अपने मित्र देशों के साथ मिलकर सीरिया पर किया है ,

इसलिए तीसरा विश्व युद्ध नहीं होगा ।

क्योंकि पूरे विश्व ने प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध की विनाश लीला देखी है ।

तब भले ही इसे रोकने के लिए पर्याप्त शक्ति किसी के पास नहीं थी ,

लेकिन आज वह माहौल नही है कि आपने गोली चलाई और विश्व युद्ध प्रारंभ ।

●आज सशक्त संयुक्त राष्ट्र संघ है जो दुनिया के 193 देशों की सहभागिता से बना हुआ है ।

और ज्यादातर देश युद्ध नहीं विकास चाहते हैं ।

●जो इतिहास के जानकार हैं वे जानते हैं कि प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात,

भयंकर युद्ध परिणाम सामने आए थे ।

●राजनैतिक परिणाम की बात करें तो प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात ,

यूरोप के तीन महान राजवंशों का विनाश हो गया था ।

●यथा सेमनाऊ वंश रूस, हर्ब्स  वर्ग आस्ट्रिया और होहेनजोला वंश प्रशा ।

●इस युद्ध के बाद अधिनायक वाद का विकास हुआ था ।

●आर्थिक पहलू की बात करें तो प्रथम विश्व युद्ध कि औसत दैनिक व्यय 40 से 44 करोड़ रूपए था ।

●मुद्रा की कीमत गिरना, ,उद्योग कारखाने नष्ट होना यह सब बताता है कि चाहे कुछ भी कोई कर ले लेकिन कभी युद्ध की नही सोचना चाहिए ।

प्रथम विश्व युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान सर्बिया, रोमानिया, बेल्जियम,  इंग्लैंड और  को हुआ था ।

जहां तक बात दयनीयता की है तो सबसे दयनीय हालात आस्ट्रिया तथा जर्मनी की थी ।

●द्वितीय विश्व युद्ध करीब 6 वर्ष चला था जो मानव इतिहास का सबसे क्रूर,

भयानक और विनाश कारी युद्ध था ।

●इसका इतना गहरा प्रभाव था कि इसके साथ ही एक युग का अंत हो गया था ।

●हिरोशिमा और नागासाकी में साढ़े सात लाख लोगों का मरना अब दोबारा विश्व का कोई भी देश नहीं देख सकता ।

●जो जानकार हैं वह जानते हैं कि विश्व व्यापी आर्थिक मंदी इसी युद्ध के चलते पूरा विश्व देख चुका है ।

●कुल मिलाकर सबसे खास बात यह है  कि आज का मनुष्य इतना बेवकूफ नहीं है कि युद्ध लड़े ।

● ट्रम्प और उत्तरी कोरिया के शासक के बीच कमाल के युद्ध की संभावना जगी थी, लेकिन यह कभी वास्तविकता में नहीं बदले।

निष्कर्ष यह है कि इस तरह के छिटपुट घटनाओं को तो संभव है लेकिन अब युद्ध की संभावना अधिक नहीं है

कारण कि लोग आज यह जानते हैं कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है।

अमेरिका द्वारा सीरिया पर हमला देखा जाए तो सताए गए लोगों की सुरक्षा के लिए किया गया था । यह विश्व युद्ध नहीं कहा जा  सकता है।

 

■ByKPSINGH  ■

       16042018

 

 

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

2 Comments on “तीसरा विश्व युद्ध नहीं है :सीरिया पर अमेरिकी हमला”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *