काश, नौटंकी न करें नौटंकीबाज

काश, नौटंकी न करें नौटंकी बाज

काश, नौटंकी न करें नौटंकी बाज शीर्षक पढकर कतई चौंकने की ज़रूरत नहीं है।

बस इसे पहले थोड़ा विस्तार से समझने की जरूरत है।

आप पता होगा इन दिनों पूरे देश में जो चर्चा आम है वह है,

रोज रोज हो रही अमानवीय घटना बलात्कार, दुर्व्यव की है। 

यहां पर संस्कार संसद भवन के अंदर जारी रखने का भी इंतजाम हो गया है।

क्योंकि कि लगातार बढ़ती इन राक्षसी प्रवृत्ति की घटनाओं पर,

रोक लगाने के लिए पूरा देश एकजुट होकर गुहार लगा रहा था।

कि इस तरह के कुच्छिक करने के लिए कड़ी सी कड़ी सजा का प्रावधान निश्चित किया गया।

सच कहें तो जनता की जनभावनाओं को सर्वोपरि मानते हुए,

सरकार ने इस तरफ ठोस कदम उठाया है।

आप ज्ञात होंगे कि सरकार ने जनभावना का ख्याल रखे और सच में एक जरुरी कदम उठाते हुए,

इस संबंध में नया और कठोर कानून बनाने के लिए अध्यादेश पारित किया गया है।

क्या है अध्यादेश 

क्या है अध्यादेश आइए अनुरोध करें 

बारह साल से कम उम्र की बच्ची से दुर्व्यवहार के दोषियों के लिए फांसी की,

सजा का प्रावधान किया गया अध्याय में।

इस अध्यादेश को पहले केंद्रीय कैबिनेट ने पास किया फिर इसके बाद,

 राष्ट्रपति राम नाथ कोविद जी ने भी अपने मंजूरी प्रदान कर दी है।

इस अध्यादेश के अनुसार मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

■ परेशकर्म के मामले में न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास को बढाकर 10 साल किया गया .साथ-साथ इसे आजीवन भी जाने जाने का विकल्प है।

■ 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ दुर्घटनाओं के दोषियों को न्यूनतम बीस साल की सजा।

■ 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए मौत। ■ दो माह में करनी महसूस दुर्घटना की जांच, दो महीने में ट्रायल पूर्ण करना होगा। ■ 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुर्व्यवहार के आरोपी नहीं अग्रिम जमानत।

विदित हो की कठुआ, सूरत और उन्नाव में मासूम बेटियां के साथ,

दुर्वकर्म की वीभत्स घटनाओं से देश भर में फैले आक्रोश के मद्दाजर,

केंद्र सरकार ने पीड़ितों को त्वरित न्याय और दोषियों को शीघ्र,

कठोरतम सजा दिलाने के लिए ही अध्यादेश का इंतजाम किया जाता है।

अपराधियों की देखभाल डेटाबेस 

अध्यादेश में शिक्षा अपराधियों को ट्रैक करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर,

उनका डेटाबेस और प्रोफाइल बनाना भी प्रावधान किया गया है।

राष्ट्रीय नियम नियंत्रण ब्यूरो एनसीआरबी के हवाले यह डेटाबेस होगा।

उल्लेखनीय है कि अपराधियों की संख्या बनाने वाला भारत विश्व का 9 वां देश बन चुका है।

फिलहाल यह डेटाबेस अमेरिका ब्रिटेन कनाडा आस्ट्रेलिया आयरलैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिदाद टोबैको आदि देश में शिक्षा अपराधियों का डेटा बेस बना कर रखता है।

विदित हो अमेरिका में यह सार्वजनिक होता है,

बाकी देशों में इसका उपयोग केवल कानून प्रवर्तन कारी एजेंसी ही हैं।

चर्चा असली प्रश्न की 

असली प्रश्न की चर्चा करने के लिए मैं आप सबको बताना चाहता हूँ कि,

भारत सरकार ने कहा कि दुर्घटना के दिल की दूरी देने की घटनाओं को कम करने के लिए या समाप्त करने के लिए जो भी अपने तात्कालिक बुद्धि के अनुसार अध्यादेश का इंतजाम किया है वह कतई आलोचना का विषय नहीं है। मुझे लगता है कि मुझे लगता है कि इसकी चर्चा करेगी तो नौटंकी बाज बस इसलिए इस का विरोध में कि विपक्ष में हैं,

और उनको नेक अध्यादेश का समर्थन नहीं करना चाहिए।

इसके प्रमाण है मायावती जी का महाभोग का बिना तर्क के समर्थन करना .कुल मिलाकर अगर यह कहा जाता है कि इतने सख्त कानून के बाद भी विपक्ष या मानवाधिकार के ढोंगी बिल्ला संतुष्ट नजर नहीं आते हैं तो अतिोक्ति नहीं है।

क्या उसके पहले कानून नहीं था 

इस सवाल का जवाब यह है कि पहले भी कानून में कोई कमी नहीं था।

सच बात तो यह है कि हम खुद अपने सच्चाई के ध्रेटल को ढोंग की नीव पर मांग रखती हैं।

हम राजनीतिक के इतने विकृत रूप के जमाने में जी रहे हैं कि,

यहां मनुष्य का कण उद्देश्य नहीं है, बल्कि अपना खुद का कणन संरक्षण होता है।

इसके अलावा एक सच्चाई यह भी है कि हम इस विकृत कु वैध की चर्चा तभी कर रहे हैं,

जब हमें कोई नोच चुका होता है।

लेकिन मुझे विश्वास है अगर हम कुछ जनमान के लिए,

किकनकारी कानून पर राजनीति को भूलभुलैया समाज नीति अपनाया,

तो काफी हद तक हमें सफलता मिल सकता है।

 

 

■ byKPSiNGJ ■

      24042018               

 

 

 

 

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About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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