किताबें – मेरी सच्ची सहेली

किताबें – मेरी सच्ची सहेली

 

किताबें-मेरी सच्ची सहेली नमस्कार दोस्तों आज 23अप्रैल को “विश्व पुस्तक दिवस” मनाया जाता है। आजकल किताबें पढ़ने का शौक बहुत कम हो गया है। किताबों की जगह गुगल और विकिपीडिया व ई-बुक आदि ने ली है। तो दोस्तों मैंने भी सोचा कि किताबें-मेरी सच्ची सहेली के माध्यम से कुछ विचार आपके साथ भी शेयर कर लूं।

आजकल तो टीचर्स भी बच्चों को होमवर्क में कम्प्यूटर से डाउनलोड करके  लिखकर पिक्चर्स लगाकर प्रोजेक्ट बनाकर लाओ। पर जो हम लोग खुद से लिखना। खुद ही ढूंढ कर पेडों के पत्ते, दालें, मिट्टी के प्रकारों के, पेंसिल से चित्र बनाकर प्रोजेक्ट बनाते थे। वो आन्नद, वो प्रत्यक्ष ज्ञान  ,अबकहाँ है।
आप ही बताइए कि क्या किताबों का हमारे जीवन में आज भी वही महत्व है? जो वर्षों पहले से रहा है। पहले हमें याद है कि गर्मियों की छुट्टियों में हम कामिक्स पढा करते थे। जो पुस्तक भंडार पर किराये पर मिलतीं थीं। एक दूसरे की होड़ में अनेकों कामिक्स किताबें पढ़ लिया करते थे।
कहानियां
किताबें पढ़ने की प्रवृत्ति व रूचि यहीं से शुरू हुई। और फिर आदत बन गई। आजकल ये सब कहाँ बच्चों का साहित्य तो मानों खो ही गया है। वो मोटू – पतलू , चाचा चौधरी, कविताएँ, कहानियाँ पहेलियां अब कहाँ हैं।
**वैसे आकडों की मानें तो हमारा देश किताबें पढ़ने में नंबर एक पर आता है। 2013 में “वर्ड कल्चर स्कोर इंडेक्स” के सर्वे में यह बताया गया है।
**2015 में हुए सर्वे में पाया गया कि मानव के ध्यान देने की क्षमता कम हुई है।
*डिजिटल माध्यम से पढने में सहूलियत तो हुई है। पहले जिस विषय की खोज के लिए अनेकों किताबें खंगालने की जरूरत होती थी। आज पलक झपकते ही जबाब तैयार है।
किताबें पढ़ने का सुख अलग ही तरह का है। पढ़ते – पढ़ते किताब में डूब जाना। किताब के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाना। कभी-कभी तो सो ही जाते और सपनों में उस कहानी को जी जाते। डिजीटल माध्यम से यह सुख नहीं मिल सकता। पढ रहे हैं और नेटवर्क गया। बैटरी खत्म हो गई आदि। पढ़ते समय हमारे ध्यान को भटकाव देतीं हैं।
अंतमें एक बार कहूंगी कि अपने बच्चों को किताबें पढ़ने की आदत विकसित करें। खुद भी पढ़ें। अच्छी  साहित्य – संस्कृति से जुड़ी किताबें पढ़ने के लिए दें। इससे विचारों में परिपक्वता आती है। संस्कारों का निर्माण होता है। और अपने बच्चों को समझाऐं कि दुनिया में सबसे अच्छी और सच्ची दोस्त किताबें होतीं हैं। जो कभी भी कहीं भी हमारा साथ नहीं छोडतीं है।
धन्यवाद….

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