रविन्द्र नाथ टैगोर, प्रथम नोबेल पुरस्कार(साहित्य) विजेता।

रविन्द्र नाथ टैगोर,प्रथम नोबेल पुरस्कार (साहित्य)विजेता।

रविन्द्र नाथ टैगोर :- रविन्द्र नाथ टैैैैगोर,प्रथम नोबेल पुरस्कार(साहित्य)विजेता। जी हाँ दोस्तो आज हम रविन्द्र नाथ टैगोर
केे बारे मेंं कुुुछ बात करना चाहेंगे। ये ऐसे व्यक्तित्व थे,जिनके परिचय को मात्र शब्दों से वर्णित नहीं किया जा सकता। ये एक
ऐसे योग्य, प्रतिभाशाली, कार्यकुशल एवं महत्वाकांक्षी व्यक्ति थे, कि हम इनके पूूूर्ण जीवन से शिक्षा लेकर अपने जीवन को
धन्य बना सकते हैैं और अपने कैैैरियर को बुुुुलंदियों पर ले जा सकते हैं। ऐसेे साहित्यिक छवि वाले व्यक्ति धरती पर कम ही
जन्म लेते हैंं। अद्भुुुत प्रतिभा के धनी रविन्द्र नाथ टैगोर एक ऐसे व्यक्तित्व थे,कि अपनी मृत्यु के बाद भी अपनी अमिट छाप
छोड़कर चले गए। ये आसमान में उगने वाले ऐसे सूरज हैैं, जो कभी अस्त ही नहीं होता। ये मरकर भी अमर हो गए और हमारे
दिलों मेें बस गए। साहित्य में नोबेल पुरस्कार पाने वाले इन महान व्यक्तित्व के बारे मेें इतिहास के पन्नों को खंगालकर कुछ
और जानकारी लेेेेने की कोशिश करते हैं। तो चलिए शुुुुरू करें।

 

प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा :-

(1) इनका जन्म 7 मई 1861 को जोडा़साँको,ठाकुुरबाडी़(कोलकाता) में समृद्धशाली बंगाली परिवार में हुआ।
(2) इनको गुुुरुदेेेव के नाम से भी जाना जाता है।
(3) इनके पिता देेवेन्द्र नाथ टैगोर, जिनकी गिनती ब्रह्म समाज के वरिष्ठ नागरिकों में की जाती थी।
(4) इनकी माता का नाम शारदादेवी ,जो कि एक पतिव्रता और घरेलू महिला थीं।
(5) ये अपने 13 बहिन-भाइयों मेंं सबसे छोटे थे।

 

 (6) बचपन मेें ही इनकी माता का देहांत हो गया और इनका पालन-पोषण इनके नौकरोंं-चाकरों द्वारा किया गया।
(7) इनके सबसे बडे़ भाई द्विजेन्द्रनाथ एक कवि व दार्शनिक थे।
(8) इनके दूूूसरे भाई सत्येन्द्र नाथ टैगोर जो सिविल सेवा परीक्षा मेें भाग लेने वाले प्रथम भारतीय थे।
(9) इनकी एक बहिन स्वर्णकुमारी देवी जो कि एक उपन्यासकार व कवयित्री थीं।

 

 (10) पारंंपरिक शिक्षा पद्धति सेे ना खुश रविन्द्रनाथ टैैैैगोर को उनके भाई उन्हेें घर पर ही शिक्षा देतेे थे।
(11) इनकी प्रारंभिक शिक्षा सेेंट जेवियर स्कूल कोलकाता में हुई।
(12) इनके पिता ने इन्हें बैरिस्टर बनाने हेेतु लंंदन विश्व विद्यालय भेेेजा,लेकिन पढा़ई में दिलचस्पी न होनेे के कारण सन्
         1980 मेें बिना डिग्री के वापस लौट आए।
(13) इनका विवाह सन् 1883 मेें मृणालिनी देवी के साथ हुआ।

 

 इनसे जुडे़ और महत्वपूर्ण तथ्य :-

(1) येे अपना ज्ञान सीमित न रखकर विस्तृृत करना चाहते थे।
(2) इसलिए रविन्द्रनाथ टैगोर अनेक विषयों के जानकार थेे।
(3) इसलिए ये कवि ,साहित्यकार के साथ-साथ चित्रकार और समाजसेवी भी थे।
(4) ये प्रतिभा केे इतने धनी थे,कि मात्र 8 वर्ष की उम्र में इन्होंने एक कविता भी लिख डाली।
(5) मात्र 16 वर्ष की आयु में सन् 1887 में इन्होंंने एक लघुकथा का लेखन भी कर दिया।
(6) इन्होंंने कुल 2230 गीत लिखे,जो मुुुख्यतः बंगाली भाषा में हैं।
 (7) सन् 1901 मेें इन्होंने शाँति निकेतन की स्थापना की, जो कि यह इनका एक स्वप्न था।
(8) बाद मेंं  इन्हीं के अथक प्रयास से इसी शाँतिनिकेतन को विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
(9) सन् 1913 मेें इनकी पुस्तक “गीतांंजलि” के लिए इन्हें नोबेल पुरस्कार देेेकर सम्मानित किया गया।
(10) ब्रिटिश सरकार द्वारा इन्हें नाइटहुड की उपाधि  भी प्रदान की गई,लेकिन येे जालियाँवाला बाग काँड से इतने आहत थे,
         कि इन्होंंने से इस उपाधि को वापस कर दिया।
(11) इन्होंने भारत व बांग्लादेश को राष्ट्रगान भी दिया। इसमें “जन गन मन” भारत का एवं”आमार सोनार बांंग्ला”
          बांग्लादेश का हैै।
(12) महान वैज्ञानिक अल्बर्टआइंंसटीन से इनकी मुलाकात तीन बार हुई, जो इन्हेंं रब्बी टैगोर कहकर बुलाते थे।

 

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 (13) इन्होंने अपने सम्पूर्ण जीवन मेें सन् 1878 से सन् 1932 तक 30 देशों की यात्राएँ कीं।
(14) इनका उद्ददेश्य था कि इन यात्राओं से उनका साहित्य विश्व केे प्रत्येक कोने मेें पहुँँचे।
(15) इस कार्य में एक अंग्रेजी कवि विलियम बटलर ने इनका सहयोग किया और गीताांजलि पुुुुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद
         किया।
(16) तो ये थे महान व्यक्ति रविन्द्रनाथ टैैैैगोर जिनका निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता मेें हो गया।
(17) विश्व भारती की स्थापना करने वालेे देश केे ऐसे महान सपूत जो कि मरकर भी अमर हैैं,और हमेशा हमारे हृदय मेें वास
         करेंंगे।
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