हल्दी की खेती कैसे करें How To Farming Of Turmeric

हल्दी की खेती कैसे करें How To Farming Of Turmeric

हल्दी की खेती कैसे करें ।  दोस्तों, भारतीय भोजन में हल्दी का प्रयोग विशेष स्थान रखता है । हल्दी, भोजन में सुंदर दृश्य देने के साथ-साथ अच्छा स्वाद भी प्रदान करता है । भारत में हल्दी का प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है । हल्दी, मसाला होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भरपूर होता है । चूकि भारत में हल्दी की खपत अत्यधिक मात्रा में होता है । तथा भारत की भूमि हल्दी पैदा करने के लिए उपयुक्त स्थान है ।

अतः जो भी किसान हल्दी बोना चाहते हैं उनके लिए यह लेख महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा ।

बुवाई के लिए मिट्टी के प्रकार

अच्छी पैदावार के लिए फसल के अनुरूप  मिट्टी का होना अति आवश्यक है । हल्दी जमीन के अंदर पैदा होने वाली फसल है ।

इसलिए फसल की अच्छी पैदावार के लिए ढीली व् भुरभुरी मिट्टी का होना अधिक लाभदायक है ।

यह फसल बलुई और दोमट मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है ।

हल्दी की अच्छी पैदावार प्राप्त करने वाले किसान इस बात का विशेष ध्यान रखें ।

कि उनका खेत ऐसा हो कि उसमें पानी अधिक समय तक ना टिकने पाए ।

खेत की जुताई

जिस खेत में हल्दी की बुवाई करनी हो उसे तीन से चार बार अच्छी तरह जोतना चाहिए ।

ताकि खेत की मिट्टी भुरभुरी और छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाए ।

यदि तीन चार बार जुताई के बावजूद उसमें बड़े-बड़े टुकड़े हो तो, उसकी एक आद बार और जुताई कर दें ।

अच्छी जुताई के पश्चात खेत को समतल बना दे । और जल निकास की उचित व्यवस्था बनाए ।

उर्वरक

हम यहां 1 एकड़ खेत का मानक मान कर चलते हैं ।

यदि उपलब्ध हो तो खेत में जुताई के समय ही लगभग 10 कुंतल प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद डालें ।

फसल बुआई के पश्चात 40 से 50 किलोग्राम नाइट्रोजन ।

30 से 40 किलोग्राम फास्फोरस और 40 से 50 किलोग्राम पोटाश फसल में  दो बार प्रयोग करें ।

बीज की मात्रा व बुवाई का सही तरीका

खेत को समतल बनाने के पश्चात खेत में 5 मीटर चौड़ी और 7 मीटर लंबी क्यारियां बनाएं ।

पौधों के बीच की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखें । तथा 5 से 6 कुंतल प्रति एकड़ बीज की मात्रा रखें ।

निराई और सच्चाई

पौधों में घास फूस ना फैले इसके लिए समय-समय पर इसकी निराई करते रहें ।

तथा चार से पांच बार इसकी सिंचाई करें । चूकि यह अधिक तापमान पर पैदा होने वाला पौधा है ।

इसलिए इसकी सिंचाई 20 से 30 दिनों में करनी चाहिए ।

फसल तैयार होने के 15 से 20 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें ।

रोग समस्या

हालांकि हल्दी के पौधे में रोग की समस्या बहुत ही कम पाई जाती है ।

फिर भी इस की अच्छी पैदावार के लिए इसमें प्रति एकड़ 4 किलोग्राम फोरेट का  छिड़काव करना लाभदायक होता है ।

फसल कटाई कैसे करें

जब हल्दी के पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगे तो समझ लें कि फसल तैयार हो चुकी है ।

सबसे पहले पौधे की पत्तियों की कटाई कर दें और उसे 1 सप्ताह के लिए छोड़ दें ।

1 सप्ताह बाद फसल की खुदाई ट्रैक्टर द्वारा करें ।

फावड़े से फसल की खुदाई कदापि न करें । क्योंकि इससे फसल के कटने का डर बना रहता है ।

यदि ऐसा संभव ना हो तो कुदाल से फसल की खुदाई कर सकते हैं ।

पकाने का तरीका

कच्ची हल्दी खाने के काम में नहीं आती है ।  खेत से कच्ची हल्दी बाहर निकालने के बाद उसे चार-पांच दिन धूप में सुखाएं ।

उसके पश्चात हल्दी को 3 से 4 घंटे तक अच्छी आंच पर पकाएं ।

जिससे सुंदर और स्वस्थ हल्दी प्राप्त हो सके ।

अच्छी आंच पर पकाने से उसमे उपस्थित पानी जल जाता है ।

जिससे हल्दी में कालापन नहीं आता । इसलिए अच्छी तरह पकाना जरूरी है ।

ताकि हल्दी की गुणवत्ता खराब न हो ।

बुवाई का सही समय

यह पौधा उच्च तापमान में विकसित होने वाला पौधा है ।

इसलिए इसकी बुवाई का उचित समय 15 अप्रैल से 30 मई तक का होता है ।

इसकी फसल 7 से 8 माह में तैयार हो जाती है । कुछ देर से पकने वाली फसलें 9 से 10 माह में तैयार होती है ।

बीज की उन्नत किस्में

हालांकि भारत में  हल्दी के कई किसमें मौजूद हैं । परंतु अच्छी पैदावार के लिए कुछ खास किसमें निम्न है –

सोनिया, रोमा, कृष्णा, सुगंधा, रश्मि, मेघा तथा  हल्दी एक इत्यादि किस्में अच्छी पैदावार के लिए मानी जाती हैं ।

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धन्यवाद ।

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