मृणालिनी साराभाई,महान शास्त्रीय नृत्यांगनाओं में से एक।

मृणालिनी साराभाई,महान शास्त्रीय नृत्यांगनाओं में से एक।

 

 

 

मृणालिनी साराभाई :- मृणालिनी साराभाई महान शास्त्रीय नृत्यांंगनाओं में से एक। जी हाँँ दोस्तो आज हम बात करेेंगे
महान शास्त्रीय नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई की। ये ऐसी महान हस्ती थीं, कि इनका परिचय कराया जाए,तो शब्द भी कम
पड़ जाएँ। इनका परिचय कराना सूूरज को रोशनी दिखाने जैसा हैै। भारत सरकार द्वारा पद्मभूूषण,पद्मश्री  से सम्मानित
मृृणालिनी साराभाई ,जिन्हेें अम्मा कहकर पुकारा जाता था,इनके बारे में आज फिर भी कुछ बताना चाहेंगे। तो दोस्तो चलिए
इनके बारे में विस्तारपूर्वक जानने की कोशिश करते हैं।

 

 

 

प्रारम्भिक जीवन एवं शिक्षा :-

(1) इनका जन्म 11 मई सन् 1918 को केरल प्रदेश मेें हुआ था।
(2) इनके पिता मद्रास हाईकोर्ट में एक जाने माने वकील थे।
(3) इनकी माँ अमू विश्वनाथन एक साँसद थीं।
(4) इनके पति विक्रम साराभाई,जो कि एक प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी थेे।
(5) इन्हें अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक भी कहा जाता हैै।

 

 

 

(6) इनके पुत्र का नाम कार्तिकेय साराभाई,जो कि दुनियाँ के प्रमुख पर्यावरण शिक्षकोंं मेेंं से एक हैं।
(7) इनकी पुत्री मल्लिका साराभाई ,जो कि प्रसिद्ध नर्तकी व समाज सेविका हैैं।
(8) इनकी बडी़ बहिन लक्ष्मी सहगल ,जो कि सुभास चन्द्र बोस द्वारा स्थापित आजाद हिंद फौज की महिला झाँँसी रेेजीमेेंट
      की चीफ कमान्डर थीं।
(9) लक्ष्मी सहगल की एक पुुत्री  हैैं सुभासिनी, जो कि सी पी एम की नेत्री  भी रह चुकी हैैंं और सन् 1989 मेेंं कानपुर संसदीय
      क्षेत्र से चुनाव भी जीती थींं।
(10) इन्हींं का एक पुत्र है शाद अली,जिनके द्वारा फिल्म “बंटी बबली” व साथिया निर्मित की गई हैैंं।

 

 

 

(11) मृृणालिनी साराभाई नेे अपना पूूूरा बचपन स्विट्जरलैंड में बिताया।
(12) वहीं पर इन्होंने डेलक्रूज स्कूूूल से पश्चिमी पद्धति पर आधारित नृत्य कलाएँ सीखीं।
(13) वहाँ सेे लौटनेे के बाद शाँतिनिकेतन आकर शिक्षा का प्रसार किया।
(14) मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई ,जो उस समय की प्रसिद्ध नृत्यांगना  थीं,सेे भरत नाट्यम का प्रशिक्षण लिया।
(15) शावाजी कुँज कुरुप ,जो दक्षिण भारत के जाने माने शास्त्रीय नर्तक व पौराणिक गुरु थेे,से कथकली का प्रशिक्षण लिया।

 

 

 

इनसे जुडे़ और महत्वपूर्ण तथ्य :-

(1) दर्पणा एकेडमी की स्थापना सन् 1948 मेें इन्हीं के द्वारा की गई।
(2) इसी वर्ष इन्होंने “मनुष्य” नामक नाटक में परफॉर्म किया,जिसमेंं पं० नेेहरू द्वारा उन्हें शाबाशी मिली।
(3) इनकी एकेडमी से लगभग 18000 छात्रोंं ने शिक्षा ग्रहण की।
(4) यहाँँ पर शास्त्रीय नृत्य के अतिरिक्त छात्रों को कठपुुतली,नाटक,वाद्य शास्त्रों जैसे :- मृृृदानगम ,बाँसुुुरी भी बजाना
      सिखाया जाता था।
(5) मार्शल आर्ट कलारीपट्टू की शिक्षा भी यहाँ दी जाती थी।
(6) इनको उपन्यास,नाटक,कहानियाँ लिखने का काफी शौक था।

 

 

(7) इन्होंनेे एक आटो बायोग्राफी भी लिखी, जिसका नाम है,” मृणालिनी साराभाई द वॉयस ऑफ द हर्ट”।
(8) आजीवन कला और कलाकारों से जुडी़ रहने वाली मृणालिनी साराभाई का 21 जनवरी सन् 2016 मेें
       अहमदाबाद,गुजरात में निधन हो गया।
(9) इन्हेें कुछ सम्मान व पुरस्कारों से भी नवाजा गया,जिसमें प्रमुख हैैं,पद्मभूषण, पद्मश्री,कालिदास सम्मान इत्यादि।
(10) इंटरनेेेशनल डांंस काउंसिल पेरिस द्वारा इनको एग्जीक्यूटिव कमेटी के लिए भी नामित किया गया।
(11) इन्हें यूनिवर्ससटी ऑफ ईस्ट एंगलिया, नॉविच यू के द्वारा डॉक्टरेेेट की उपाधि दी गई।
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                                                                                                                                                                               धन्यवाद

4 Comments on “मृणालिनी साराभाई,महान शास्त्रीय नृत्यांगनाओं में से एक।”

  1. कई तरह के व्यक्तित्व से विभिन्न पोस्ट में परिचित कराने के लिए धन्यवाद

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