कार्ल मार्क्स :तथ्यों के आइने में

कार्ल मार्क्स: तथ्यों के             आइने में 

कार्ल  मार्क्स:   तथ्यों के आइने में सिर्फ समझे जा सकते हैं,

तथ्यों में बांधे या फिर कैद नहीं किए जा सकते।

हां,कार्ल मार्क्स को उनकी 200वीं जयंती पर याद करने के जरिए,

एक महान बुद्धि जीवी को हम सब अपनी तरह की श्रद्धांजलि जरूर अर्पित कर सकते हैं।

कार्ल मार्क्स जिनके विवेचनात्मक विश्लेषण एवं

खोज ने हमें ऐसी अंतर दृष्टि दी है जिससे हम उन्हें कभी चाह कर भी भुला नहीं सकते।

कार्ल मार्क्स के दर्शन को आम तौर पर आर्थिक

स्थितियों द्वारा निर्धारित विचारों के रुप में परिभाषित किया गया है।

कार्ल मार्क्स के जन्म के द्वि-शत वार्षिक वर्ष में

उस संबंध की द्वि मार्गी प्रकृति पर उनके फोकस को समझना महत्वपूर्ण है। 

         कार्ल  मार्क्स                 1818-1883

कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को तथा मृत्यु 14 मार्च 1883 को हुई थी।

कार्ल मार्क्स का जन्म जर्मनी के ट्रीब्ज नामक

स्थान में एक यहूदी मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था।

जब कार्ल मार्क्स की उम केवल 6 वर्ष की थी तभी

उनके माता-पिता ने यहूदी धर्म त्याग कर ईसाई धर्म को अपना लिया था।

बाद में उनके बच्चे भी स्वाभाविक ईसाई बन गए। 

प्रारंभिक शिक्षा 

कार्ल मार्क्स की प्रारंभिक शिक्षा उनके होने वाले

श्वसुर तथा एक उदार वादी विचारक वैस्टफेलन के घर पर तथा एक विद्यालय में हुई थी।

कार्ल मार्क्स की बुद्धि बहुत तेज थी, साथ ही साथ

पीड़ित और वंचित लोगों के प्रति उनमें बेहद गहरी आस्था थी।

मात्र 17 वर्ष की उम्र में माार्क्स बान विश्व विद्यालय कानून की पढ़ाई के लिए गए थे।

लेकिन अगले ही वर्ष कानून को छोड़कर इतिहास और दर्शन ले लिया।

इसी समय मार्क्स हीगल के द्वंदात्मक दर्शन के संपर्क में आए।

सन् 1841 में मार्क्स ने जेना विश्व विद्यालय में

“डेमोक्रिट्स और एपीक्यूरस के प्राकृतिक दर्शन

में भेद “पर निबंध लिखकर डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। 

प्राध्यापक बनने की इच्छा 

कार्ल मार्क्स की इच्छा विश्व विद्यालय में प्राध्यापक बनने की थी।

लेकिन विश्व विद्यालय में उनके प्रति सहानुभूति रखने वाले व्यक्तियों,

प्यूरबेक और ब्रूनो ब्यूर को उनकी शासन विरोधी

नीतियों के  कारण अध्यापन कार्य से वंचित  कर दिया गया था।

अक्टूबर 1842  में मार्क्स एक उदार तथा

प्रजातांत्रिक विचार धारा वाले समाचार पत्र रीनचे जीतुंग के संपादक बन गए।

लेकिन अपने क्रांतिकारी विचार धारा के कारण

उन्होंने प्रशिया के अधिकारियों को अपना विरोधी बना लिया था।

फलस्वरूप उन्हें संपादन कार्य बंद करना पड़ा।

इसके बाद बेकारी के दिनों में उन्होंने सेंट साइमन

व चार्ल्स फोरियर की रचनाओं का गहराई से अध्ययन किया।

🔵1843 में मार्क्स और जैनी ने शादी कर लिया।

🔵दोनों पेरिस चले गए।

🔵पेरिस में मार्क्स फ्रैंको जर्मन शब्द कोष के

      संपादक बन गए।

🔵पेरिस में मार्क्स प्रूधो तथा बाकुनिन जैसे  

      अराजकता वादियों के संपर्क में आए।

     और   मार्क्स पर इनक खूब असर पड़ा।

🔴1845 में मार्क्स अपने जीवन की विविध

  कठिनाईयों का सामना करते हुए इंग्लैंड गए।

   🔴इंग्लैंड में मार्क्स जीवन के अंतिम समय तक            रहे।

🔴विदित हो कि मार्क्स का यहीं पर उद्योग पति            एंजिल्स से परिचय हुआ था।

यह परिचय आज इतिहास की सबसे बड़ी धरोहर है। 

मार्क्स की रचनाएं 

मार्क्स की कुछ प्रमुख रचनाएं इस प्रकार हैं 

🔴 हीगल की अधिकार संबंधी धारणा की आलोचना की प्रस्तावना।

🔴पवित्र परिवार।

🔴दर्शन की दरिद्रता।

🔴साम्यवादी घोषणा पत्र।

🔴राजनीतिक अर्थव्यवस्था की विवेचना। 🔴मूल्य कीमत और लाभ।

🔴दास कैपिटल।

🔴फ्रांस में वर्ग संघर्ष।

🔴गोथा प्रोग्राम और क्रांति तथा प्रति क्रांति। 

मार्क्स के दर्शन के स्रोत 

🔴हीगल का दर्शन।

🔴ब्रिटिश समाजवादी तथा अर्थशास्त्री विचार धारा का प्रभाव।

🔴फ्रेंच समाजवादियों यथा सेंट साइमन, चार्ल्स फोरियर की विचार पद्धति। 

मार्क्स के प्रमुख सिद्धांत 

🔴द्वंदात्मक भौतिक वाद।

🔴इतिहास की आर्थिक व्याख्या।

🔴वर्ग संघर्ष।

🔴अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत।

🔴पूंजी व्यवस्था का विश्लेषण।

🔴राज्य और शासन संबंधी व्याख्या।

🔴प्रजातंत्र धर्म और राष्ट्र वाद।

🔴मार्क्स पद्धति।

🔴मार्क्स का कार्यक्रम।

धन्यवाद

KPSINGH

13052018

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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