अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस

 

 अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस सबसे पहले 1994 में

संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने घोषित किया था।

इसके बाद 1995 से पूरी दुनिया इसे 15 मई को

मनाने लगी है।

आज हम कह सकते हैं कि  दुनिया ने परिवार की

सार्वभौमिक महत्ता को समझ कर,

इसके प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करने के लिए

परिवार दिवस का खूब अवसर ढूँढ निकाला है।

नवीनतम तथ्य यह है कि अब गांव हो या शहर

एक बार फिर से परिवार चर्चा का विषय बनने में कामयाब हो रहा है।

इसका कारण यह है कि अब पूरी मानव जाति परि

को न केवल जानने लगी है,

बल्कि और भी बेहतर ढंग से जानने समझ का

सार्थक और गंभीर प्रयास करने लगी है।

क्षमा करें इस महत्वपूर्ण चर्चा का मूल्य और भी

ज्यादा हो सकता है यदि हम परिवार की बेहतर

वैज्ञानिक विवेचना कुछ इस तरह करने का प्रयास करें। 

परिवार किसे कहते हैं? 

 

अंग्रेज़ी शब्द फेमिली family रोमन शब्द फेमुलस

famulus से बना है।

परिवार का मानव जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है।

विश्व में कोई भी ऐसा समाज नहीं है जहाँ परिवार न पाया जाता हो।

सभी प्रकार के समाज में चाहे वह सभ्य हों या न हों, आधुनिक हों या प्राचीन,

परम्परागत परिवार का महत्व अत्यधिक दिखाई देता है।

परिवार के बिना समाज की निरंतरता संभव ही नहीं है।

क्योंकि परिवार के द्वारा ही समाज के नए सदस्य

का आगमन होता है।

यह सदस्य उन लोगों  के रिक्त स्थान की पूर्ति करते

हैं, जिनकी मृत्यु हो जाती है।

हम कह सकते हैं कि परिवार के बिना दुनिया असंभव है। 

परिवार की परिभाषाएं

🔴इलियट तथा मैरिल के अनुसार, “परिवार पति,

पत्नी और बच्चों से मिलकर बनी एक जैविक

सामाजिक इकाई है।

🔴मैलिनोवस्की के के अनुसार,” परिवार ही एक

ऐसा समूह है जिसे मनुष्य पशु अवस्था से अपने साथ लाया है।

🔴डेविड के अनुसार, “परि ऐसे व्यक्तियों का

समूह है जो रक्त के आधार पर एक दूसरे से

संबंधित हैं तथा जो एक दूसरे के संबंधी हैं।

🔴मर्डोक ने 250 आदिम परिवारों का अध्ययन

किया था, और निष्कर्ष के तौर पर यह भी कहा था

कि कोई भी समाज ऐसा नहीं था जिसमें परिवार

रूपी संस्था अनुपस्थिति रही हो।

🔴आरनाॉल्ड ग्रन कके अनुसार परिवार

संस्थागत सामाजिक समूह है, जिस पर

जनसंखया प्रस्थापन का भार है।

🔴मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, “परिवार पर्याप्त

निश्चित यौन संबंध द्वारा परिभाषित

एक ऐसा समूह है जो बच्चों के जनन और लालन

पालन की व्यवस्था करता है।

🔴क्लेयर के अनुसार,” परिवार से हम संबंधों की

वह व्यवस्था समझते हैं जो माता-पिता और बच्चों के बीच पाई जाती है।

🔴आगबर्न एवं निमकाफ के अनुसार,” परिवार

कमोबेश पति तथा पत्नी के मध्य एक ऐसा स्थाई

संबंध है जो संतान सहित भी हो सकता है और संतान रहित भी।

 

परिवार की उत्पत्ति का शास्त्रीय सिद्धांत :इस

सिद्धांत के प्रतिपादक अरस्तू, प्लेटो आदि हैं।

विश्व के विभिन्न समाजों का अध्ययन करके

1861 में सर हेनरी पेन ने इस सिद्धांत को आगे

बढ़ाने का काम किया था।

इस सिद्धांत के अनुसार परिवार का आरंभिक स्वरूप पिृतृ सत्तातमक था। 

परिवार का यौन साम्यवाद :

इस सिद्धांत के प्रति पादक मार्गन, फ्रेजर, ब्रिफाल्ट आदि हैं।

मार्गन का मानना है कि आदिम समाज में “सिब”

ही एक मात्र समूह होता था,

जिसमें यौन साम्यवाद प्रचलित था।

इस सिद्धांत के अनुसार कोई भी पुरुष किसी भी

स्त्री के साथ यौन संबंध बना सकते थे।

यही अवस्था यौन आम्य

एक विवाह का सिद्धांत

“हिस्ट्री आफ  ह्यूमन मैरिज” नामक पुस्तक में

वेस्ट मार्क ने,

अपना यह सिद्धांत प्रति पादित किया था।

वहीं डार्विन का यह विचार है कि,परिवार की उत्पत्ति,

पुरुष की एकाधिकार की भावना के कारण हुई।

वेस्ट मार्क के इस सिद्धांत की पुष्टि जुकरमेन तथा मैलिनोवस्की ने भी किया है। 

मातृ सत्तातमक सिद्धांत

इस सिद्धांत का प्रतिपादन, “दि मदर्स” नामक

पुस्तक में ब्रिफाल्ट ने किया था।

इनके अनुसार प्रारंभ में यौन संबंध बहुत ढीले थे।

स्त्री पुरुष की तुलना में बेटे मां के संबंध ज्यादा

घनिष्ठ थे। संतान के लालन पालन का भार मां पर था।

बैकोफन तथा टायलर इस सिद्धांत के समर्थक हैं।

टायलर का मत है कि परिवार का प्रारंभिक रूप मातृ सत्तात्मक था। 

उदविकासीय सिद्धांत 

इस सिद्धांत के प्रति पादक बैकोफन, हैबीलेंड, क्रचफिल्ड हैं।

मार्गन ने इस सिद्धांत की विस्तृत व्याख्या की है।

मैकलेनन, लुबोक तथा टायलर इस सिद्धांत के

प्रमुख समर्थक रहे हैं।

वैकोफेन ने परिवार के उदविकासीय क्रम को इस

प्रकार व्यक्त किया है :

1:परिवार का आदिकालीन स्वरूप।

2:बहुपति विवाही परिवार।

3:बहुपत्नी विवाही परिवार।

4:एक विवाही परिवार।

मार्गन ने परिवार के उदविकासीय क्रम को इस तरह व्यक्त किया है।

1:समरक्त परिवार

2:समूह परिवार

3:सिंडेस्मियन परिवार

4:पितृ सत्तात्मक परिवार 5:

एक विवाही परिवार। 

परिवार के प्रकार 

परिवार के प्रमुख प्रकार इस प्रकार हैं 

🔵संस्था के आधार पर :केंद्रीय या

नाभिकपरिवार, संयुक परिवार, विस्तृत परिवार।

🔵निवास के आधार पर :पितृस्थानीय परिवार।

मातृ स्थानीय परिवार, नव स्थानीय परिवार।

मातृ पितृस्थानीय परिवार।

मामा स्थानीय तथा द्विस्थानीय परिवार।

🔵अधिकार के आधार पर बने परिवार। 

🔵उत्तराधिकारी के नाम पर बने परिवार। 

🔵वंश के आधार पर बनें परिवार। 

🔵विवाह के आधार पर बने परिवार। 

🔵नाम के आधार पर बनें परिवार। 

🔵संबंधो के आधार पर बने परिवार 

🔵जन्म के आधार पर बने परिवार। 

🔵अन्य आधार पर बने परिवार। 

परिवार के कार्य 

🔵जीवन शास्त्रीय कार्य :जैसे यौन संतुषटि, संतान उत्पति। 

🔵शारीरिक कार्य। 

🔵आर्थिक कार्य। 

🔵धार्मिक कार्य  

 

निष्कर्ष के रूप में यही कहा जा सकता है कि इस धरती के,

किसी भी कोने में आप क्यों न रहते हों परिवार की

जरूरत और उसके   महत्व के   बारे में  बताने    की कोई जरूरत नहीं है।

परिवार के बारे में अंतिम सत्य यही है कि परिवार

समाज की  मूल ईकाई नहीं है यह जीवन की मूल इकाई है। 

धन्यवाद KPSINGH1405

 

 

 

 

 

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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