हिन्दू धर्म के रहस्य (MYSTERY OF HINDU RELIGION)

हिन्दू धर्म के रहस्य (MYSTERY OF HINDU RELIGION) 

हिन्दू धर्म का इतिहास 12000 वर्ष पुराना है |हिन्दू धर्म में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं जिसे विज्ञान अस्वीकार करता है परन्तु कुछ ऐसे भी रहस्य हैं जिन पर विज्ञान अब सहमत होने लगा है |
हिन्दू धर्म में देवी – देवता, माता – पिता, गुरू, प्रकृति, पशु आदि को पुरा सम्मान दिया गया है |पाप और पुण्य, न्याय और अन्याय को विस्तृत पारिभाषित किया गया है |कर्मफल को भाग्यफल से महत्वपूर्ण बताया गया है |पुनर्जन्म में आस्था, प्रार्थना, व्रत, तीर्थ और दान को महत्त्व दिया गया है |
हिन्दू धर्म की कथाओं में ऐसे आविष्कारों का वर्णन मिलता है जो आज के वैज्ञानिकों के लिए भी रहस्य बने हुए हैं |ऐसे ही कुछ रहस्यों के बारे में इस पोस्ट में जानेंगें |

1. कल्प वृक्ष –

          वेद और पुराणों में कल्प वृक्ष का उल्लेख मिलता है | कल्प वृक्ष के बारे में पुराणों और शास्त्रों में यह बताया गया है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर जो भी इच्छा की जाती है वह सच हो जाती हैं |
 
हिन्दू धर्म की ऐसी मान्यता है कि इस वृक्ष में अपार सकारात्मक उर्जा होती है |रहस्य की बात यह है कि क्या वास्तव में कोई ऐसा वृक्ष था या है |और यदि यह सत्य है तो यह वृक्ष कैसा दिखता था |

2. कामधेनु गाय —

           कामधेनु गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी |इस चमत्कारिक गाय के दर्शन मात्र से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते थे |इस गाय का दूध अमृत के समान माना जाता था | यह गाय जिसके पास होता था उसे चमत्कारिक लाभ मिलता था |
ऋषि वशिष्ठ के पास कामधेनु गाय थी |इस गाय की रक्षा के लिए ऋषि वशिष्ठ को कई राजाओं से लड़ना पड़ा था | कामधेनु की दैविक शक्ति के कारण विश्वामित्र को लोभ उत्पन्न हो गया था और इसे पाने के लिए वशिष्ठ से घमासान युद्ध किया, परन्तु युद्ध में विश्वामित्र को हार मिली |

3. शंख —

शंख की उत्पत्ति भी समुद्र मंथन के दौरान हुई थी |ऐसी मान्यता है कि शंख सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर सकता है, भूत – प्रेत भगा सकता है, धनवान और शक्तिशाली बना सकता है |
शंख को हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है |शंख मुख्य रुप से तीन प्रकार के होते हैं – दक्षिणावर्ती शंख, मध्यावर्ती शंख और वामावर्ती शंख |इन शंखों के कई उपप्रकार होते हैं |
श्रीकृष्ण के पास पांचजन्य शंख, अर्जुन के पास देवदत्त, युधिष्ठिर के पास अनंतविजय, भीष्म के पास पौण्डरिक, नकुल के पास सुघोष, सहदेव के पास मणिपुष्पक शंख था |सभी शंखों का महत्व और शक्ति अलग – अलग था | शंख के रहस्य और चमत्कार का वर्णन पुराणों में विस्तार से किया गया है |

4. उड़ने वाले साँप —

हिन्दू धर्म में गाय के बाद साँप को ही अधिक महत्व दिया गया है |भगवान शिव के प्रमुख गणों में से नाग भी एक गण था |ऐसा माना जाता है कि साँप की उम्र 100 वर्ष पूर्ण हो जाने के बाद उसमें उड़ने की शक्ति आ जाती है |
साँप कई प्रकार के होते हैं – मणिधारी साँप, इच्छाधारी साँप, उड़ने वाले साँप, एक फनी से लेकर दस फनी तक वाले साँप, जिसे शेषनाग कहा जाता है |नीलमणिधारी साँप को सबसे उत्तम माना जाता है |वैज्ञानिक अपने शोध से यह मान लिये हैं कि दक्षिण एशिया के वनों में उड़ने वाले साँप पाये जाते हैं |
 

5. मणि —-

मणि एक चमकता हुआ पत्थर होता था जिसे हीरे की श्रेणी में रखा जा सकता है |मणि का होना या न होना भी एक रहस्य है |
माना जाता है कि जिसके पास भी मणि होता था वह कुछ भी कर सकता था |ज्ञात हो कि महाभारत में अश्वथामा के पास मणि थी जिसके कारण वह शक्तिशाली और अमर हो गया था | रावण ने कुबेर से चन्द्रकाँत नामक मणि छीन ली थी |

मान्यता है कि मणियाँ कई प्रकार की होती थी – नीलमणि, चन्द्रकाँत मणि, शेषमणि, पारसमणि, लालमणि आदि |मणि के महत्व के कारण ही भारत के एक राज्य का नाम मणिपुर है |मणि से जुड़े कई किस्से पुराणों में वर्णित हैं |

6. जड़ी बूटी —

पुराणों में कई प्रकार की जड़ी बूटी का वर्णन किया गया है |कुछ ऐसी जड़ी बूटी होती है जिसका प्रयोग करने से जब तक इसका असर रहता है मनुष्य दिखाई नहीं देता है |कुछ ऐसी जड़ी बूटियाँ हैं जिसके सेवन से व्यक्ति को भूत और भविष्य का ज्ञान हो जाता है |
रामायण में संजीवनी बूटी से लक्ष्मण को जीवित किया गया था |वैज्ञानिक आयुर्वेद में उल्लिखित कई जड़ी बूटियों पर शोध कर रहे हैं और चमत्कारिक परिणाम भी प्राप्त किये हैं |
तेलियाकंद नामक जड़ी बूटी से सोने का निर्माण किया जा सकता है |जड़ी बूटी के उपयोग से जवान बने रह सकते हैं , 500 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं |जड़ी बूटी के माध्यम से धन, यश, वैभव, सम्मान प्राप्त किया जा सकता है |

7. पुनर्जन्म —

                

पुनर्जन्म का सिद्धांत केवल हिन्दू धर्म में माना जाता है | इसाई और इस्लाम धर्म इस सिद्धांत को नहीं मानते हैं |हिन्दू धर्म के अनुसार आत्मा अजर और अमर है |
यह आत्मा एक शरीर छोड़कर दूसरा शरीर धारण करती रहती है और यह चक्र तब तक चलता रहता है जब तक मोक्ष प्राप्ति न हो जाये ,अर्थात् यह जानना कि मैं शरीर नहीं हूँ बल्कि सूक्ष्म आत्मा हूँ |

पुराणों के अनुसार इन सूक्ष्म आत्माओं के समुह का केन्द्र उत्तराखंड के हिमालय की वादियों में है, जिसे देवात्मा हिमालय कहा जाता है |यहाँ स्थूल शरीर धारण किये हुए पहुँचना नामुमकिन है |

8. संस्कृत भाषा —

संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है |इसे देवों की भाषा भी माना जाता है जिसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है |संस्कृत भाषा के व्याकरण को देखकर ही विश्व की सभी भाषाओं के व्याकरण विकसित हुए हैं |
आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार कम्प्यूटर के उपयोग के लिए यह सर्वोत्तम भाषा है | 500 ई. पू. पाणिनी ने दुनिया का सबसे पहला व्याकरण ग्रन्थ ‘अष्टध्यायी ‘ लिखा था |तब संस्कृत भाषा ही बोली जाती थी |संस्कृत भाषा के लिए कहा जाता है कि इसकी रचना नहीं की गई है बल्कि इसकी खोज की गई है |

      

संस्कृत विद्वानों के अनुसार सूर्य के एक ओर से 9 रश्मियाँ निकलती हैं और यह चारों दिशाओं से अलग – अलग निकलती हैं |इस प्रकार कुल 36 रश्मियाँ हो गई |इन 36 रश्मियों की ध्वनि पर संस्कृत के 36 स्वर बने |सूर्य की 9 रश्मियाँ जब पृथ्वी पर आती हैं तो पृथ्वी की 8 वसुओं से टकराती हैं जिससे 72 प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है जो संस्कृत के 72 व्यंजन हैं |इस प्रकार ब्रह्मांड में उत्पन्न होने वाली कुल 108 प्रकार की ध्वनि के आधार पर संस्कृत की वर्णमाला है |

9. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र —

ज्योतिष को वेदों का नेत्र कहा जाता है |यह एक ऐसी विद्या है जिसके माध्यम से प्राचीन ऋषि भूत, वर्तमान और भविष्य जानते थे |पुराणों में ज्योतिष और वास्तु के कई चमत्कारों का उल्लेख मिलता है |आधुनिक मानव इस बात को नहीं मानता है, परन्तु अब वैज्ञानिक भी भारत की ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की प्रशंसा करने लगे हैं |

10. ध्यान —

योग का सातवाँ अंग ध्यान है | वैज्ञानिकों के अनुसार वैदिक ऋषियों द्वारा की गई यह खोज अत्यंत महत्त्वपूर्ण है |ध्यान सभी शारीरिक बीमारियों को दूर करके मस्तिष्क को शांत करने की क्षमता रखता है |
ध्यान शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत बनाता है |वैज्ञानिक शोध से पता चला कि ध्यान से उत्तेजना पैदा करने वाले जीन  को दबाया जा सकता है |ध्यान से कैंसर और एड्स जैसी बीमारियों को  भी दूर किया जा सकता है |

 

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आपका ——- प्रमोद कुमार 

 

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