चमत्कारिक मंदिर जो देखते देखते नजरों के सामने से गायब हो जाता है

चमत्कारिक मंदिर जो देखते देखते नजरों के सामने से गायब हो जाता है

 चमत्कारिक मंदिर |भारत में अनेकों मंदिर हैं जिनमें कोई न कोई चमत्कार होते रहते हैं |
इन चमत्कारों की गाथा उस मंदिर और भगवान के प्रति आस्था को प्रगाढ़ करते हैं |
आज हम एक ऐसे चमत्कारिक मंदिर के बारे में जानेंगें जो रोजाना देखते देखते आँखों के सामने से गायब हो जाता है और फिर पुनः दर्शन देने लगता है |
 
गुजरात के भड़ुच जिले के जंबूसर तहसील के कावी कंबोई में स्थित यह मंदिर स्तंभेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है |
कावी कंबोई बड़ोदरा शहर से 75 किमी की दूरी पर है |
इस मंदिर में शिवलिंग के दर्शन दिन में केवल एक बार किया जा सकता है |
यह मंदिर अरब सागर में कैम्बे तट स्थित है |समुद्र तट पर दिन में दो बार ज्वार भाटा आता है |
ज्वार भाटे के समय समुद का पानी मंदिर के अन्दर प्रवेश कर जाता है और
इस प्रकार दो बार समुद्र का पानी शिवलिंग का जलाभिषेक करके लौट जाता है |
 
ऐसा प्रतिदिन सुबह और शाम के समय होता है |
ज्वार के समय इस मंदिर में जाने की किसी को भी अनुमति नहीं है क्योंकि इस समय यह मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है |
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को एक पर्ची बाँटी जाती है जिसमें ज्वार के आने का समय लिखा होता है |
इस मंदिर का जिक्र श्री महाशिव पुराण में रुद्र संहिता भाग 2 ,अध्याय 11,पेज नं़358 में मिलता है जो इसके प्राचीन होने का प्रमाण है |
इसके अलावा स्कन्ध पुराण में इस चमत्कारिक मंदिर के निर्माण के बारे में विस्तार से बताया गया है |
पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर राक्षस अपनी कठोर तपस्या से भगवान
शिव को प्रसन्न कर लिया था और अमर होने का वरदान माँगा |
भगवान शिव यह वरदान देने से मना कर दिये तो ताड़कासुर ने दूसरा वरदान माँगा कि
उसे सिर्फ शिवपुत्र ही मार सके और वो भी केवल 6 दिन की आयु का |
ताड़कासुर वरदान पाकर तीनों लोकों में हाहाकार मचाने लगा |
सभी देवता और ऋषिमुनि उसके आतंक से परेशान हो गये |
अंततः वे इससे निजात पाने के लिए भगवान महादेव के पास पहुँचे |
तब श्वेत पर्वत के कुंड से कार्तिकेय का जन्म हुआ |
कार्तिकेय के छः मस्तिष्क और बारह हाथ थे और उन्होंने छः दिन की आयु में  ही ताड़कासुर का वध किया |
कार्तिकेय को जब पता चला कि ताड़कासुर उनके पिता महादेव का बहुत बड़ा भक्त था तो
आत्मग्लानि से भर गये और स्वयं को दोषी मानने लगे |
इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें उपाय सुझाया कि यहाँ पर एक शिवलिंग स्थापित करें और भगवान शिव से माफी के लिए प्रार्थना करें |
तब यहाँ का शिवलिंग स्थापित हुआ और तभी से यह स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध हुआ |
इस चमत्कारिक मंदिर के चमत्कार को देखने के लिए श्रद्धालु को पुरा दिन लग जाता है |
तभी वे अपनी आँखों के सामने मंदिर को ओझल और पुनः प्रकट होते देख सकते हैं |
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आपका ——– प्रमोद कुमार 

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About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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