गुप्त कालीन सिक्के और समाज भाग 2

 

गुप्त कालीन सिक्के और समाज भाग 2

गुप्त कालीन सिक्के और समाज भाग 2 में यहां

आपको पहले दी गई जानकारी के आगे से आगे की जानकारी दी जाएगी।

और इस तथ्य को दुबारा आपके समक्ष रखने की कोशिश की जाएगी कि,

किसी भी समय और समाज को जानने के लिए

उस   समाज की तात्कालिक  मुद्रा भी एक बड़ा साधन होता है।

वैसे भी प्रचलित इतिहास जानने के स्रोतों में यह साधन काफी वैज्ञानिक साधन माना जाता है। 

गुप्त कालीन सिक्के

गुप्त शासक राम गुप्त के सिक्के मालवा मध्य प्रदेश से प्राप्त हुए हैं।

सिंह प्रकार के सिक्के के अतिरिक्त अन्य सभी ही

प्रकार के सिक्कों में किसी न किसी रूप में गरुण का अंकन हुआ है।

चन्द्र गुप्त द्वितीय के सिक्के सोना चांदी तांबा तथा सीसा सभी के मिले हैं।

चंद्र गुप्त द्वितीय के सिक्के आठ प्रकार के हैं।

इसके अधिकांश प्रकार के सिक्कों में पट की ओर

कमल में बैठी हुई देवी लक्ष्मी का अंकन किया गया है।

चंद्र गुप्त द्वितीय के सिंह का शिकार करते हुए सिक्के वैविध्य पूर्ण हैं।

इन सिक्कों पर पट ओर सिंह की सवारी करती

देवी को विभिन्न मुद्राओं में अंकित किया गया है। तथा सिंह विक्रम अंकित है।

पट ओर सिंहासन में आरूढ़ देवी श्री विक्रम विरुद

वाले  सिक्कों  में  चित ओर  चंद्र गुप्त  द्वितीय  को

हांथ में पुष्प लिए कोच में बैठा हुआ दिखााया गया है।

चक्र विक्रम प्रकार के सिक्कों में चित्त में गदाधारी विष्णु तथा पट ओर,

कमल हाथ में लिए खडी़ लक्ष्मी का अंकन है। 

विभिन्न सिक्के 

छत्रधारी प्रकार के सिक्के में सम्राट का विरुद

विक्रमादित्य तथा घुड़सवार टाइप के सिक्के में अजित विक्रम अंकित है।

चंद्र गुप्त द्वितीय के  चांदी के सिक्के पश्चिमी भाग यानी पश्चिमी भारत से प्राप्त हुए हैं।

इनका भार 30 ग्रेन है    तथा यह  छत्रपों की रजत मुद्रा की एक प्रकार से अनुकृति है।

चंद्र गुप्त द्वितीय द्वारा 9 प्रकार के तांबे के सिक्के चलाए गए।

इनमें बस्ट प्रकार तथा छत्र प्रकार के सिक्कों को अधिक जारी किया गया है।

इन सभी सिक्कों में पट ओर गरुण अथवा लक्ष्मी का अंकन है। 

विभिन्न धातु सिक्के 

चंद्र   गुप्त द्वितीय द्वारा जारी किए गए सीसे के सिक्के आयताकार हैं।

उन पर पट ओर श्री विक्रम विरुद अंकित है।

कुमार गुप्त प्रथम के सिक्कों में पहले के सम्राटों की तुलना में अधिक विविधता है।

कुमार गुप्त प्रथम ने 14 प्रकार के सोने के सिक्के चलाए हैं।

कुमार गुप्त प्रथम के सबसे अधिक सोने के बने सिक्के घुड़सवार प्रकार के मिले हैं।

कुछ सिक्कों में पट ओर नृत्य करते मयूर का अंकन किया गया है।

सम्राट के लिए प्रयुक्त विरुद गुप्त कुल व्योम शशि, महेन्द्र, कर्मजीत आदि हैं। 

कुमार गुप्त सिक्के 

कुमार गुप्त ने अपने पितामह का अनुकरण करते

हुए चीते का शिकार, अश्वमेघ, विणा वादक प्रकार

के सिक्कों को जारी किया।

इसी तरह राजा रानी प्रकार का सिक्का कुमार

गुप्त ने,

अपने पितामह चंद्र गुप्त प्रथम के अनुकरण में ही

जारी किया था। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 20052018 

 

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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