बछेन्द्री पाल का जीवन परिचय Biography Of Bachhendri Pal

बछेन्द्री पाल का जीवन परिचय Biography Of Bachhendri Pal

बछेन्द्री पाल का जीवन परिचय । दोस्तों, भारत सदियों से एक पुरुष प्रधान देश रहा है ।

इस देश में महिलाओं को सदैव निम्न श्रेणी में रखा जाता रहा है ।

परन्तू समय – समय पर ऐसी स्तिथि में भी कुछ स्त्रियों ने सारे बंधनों से मुक्त होकर कुछ ऐसे कारनामे किये जिनके लिए दुनिया सदैव उन्हें याद रखेगी ।

इतिहास के पन्नों में स्वर्णिम अक्षरों से अपना नाम दर्ज करवाकर उन्होंने अपना ही नाम रौशन नहीं किया है ।

बल्कि समूचे विश्व में भारत वर्ष का नाम भी गौरवान्वित किया है ।

ऐसी ही महिलाओं में एक नाम सुमार है बछेंद्री पाल जी का ।

जिन्होंने माउन्ट एवरेस्ट पर भारत का झण्डा लहरा कर अपने साथ – साथ देश का भी नाम रौशन किया ।

हालांकि माउन्ट एवरेस्ट की ऊंचाइयों को छूने वाली, वो विश्व की पहली महिला पर्वतारोही नहीं हैं ।

बल्कि वे माउन्ट एवरेस्ट के शिखर पर पहुँचने वाली दुनिया की 5वीं महिला हैं ।

परन्तू ऐसा करने वाली वो भारत की प्रथम महिला जरूर हैं ।

आज के इस लेख में बछेन्द्री पाल के जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य, जिन्हें जानना हमारे लिए जरुरी है ।

जीवन परिचय

24 मई सन् 1954 ई0 को बछेंद्री पाल जी का जन्म उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले के नाकुरी नामक गांव में हुआ था ।

इनके पिता एक किसान थे । अच्छी खासी किसानी होने के कारण घर में किसी तरह की कमी नहीं थी ।

घरेलू आर्थिक स्थिति अच्छी होने के कारण बछेंद्री पाल जी को पढ़ाई – लिखाई में कोई कमी नहीं हुई ।

ये पढाई – लिखाई में भी बहुत अच्छी थी । अतः इन्होंने बी0 एड0 तक की पढाई पूरी कर ली ।

शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात इन्होंने रोजगार तलाशना शुरू किया । हालाँकि इन्हें रोजगार आसानी से मिल जाता ।

किन्तू इन्हें जहाँ – जहाँ रोजगार मिला । वहां अच्छे पद और अच्छा वेतन न मिला ।

जिसके कारण बछेन्द्री पाल ने नौकरी छोड़ दी और पर्वतारोहण में कैरियर बनाने के उद्देश्य से इन्होंने “नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग” में आवेदन किया ।

यहां पर इन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से पर्वतारोहण सीखा ।

इनके हुनर को देखते हुए ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह ने  बतौर इंस्ट्रक्चर इन्हें नौकरी प्रदान की ।

इसके बाद बछेंद्री पाल ने इसे ही अपना कैरियर बना लिया ।

जिससे इनके घर वाले तथा रिश्तेदार इनसे नाराज भी हो गए ।

कैरियर व एवरेस्ट विजय

वैसे तो बछेंद्री पाल के लिए पर्वतारोहण का पहला मौक़ा लगभग 12 साल की उम्र में आया था ।

जब उन्होंने अपने स्कूल की सहपाठियों के साथ 400 मीटर की चढ़ाई पूरी की ।

सन् 1984 में भारत का चौथा एवरेस्ट अभियान शुरू हुआ ।

इस अभियान में जो टीम बनी थी उस टीम में बछेंद्री पाल समेत 7 महिलाओं और 11 पुरुषों को शामिल किया गया था ।

इस टीम के द्वारा 23 मई 1984 को अपराह्न 1 बजकर 7 मिनट पर 29,028 फुट यानि 8,848 मीटर की ऊंचाई पर ‘सागरमाथा (एवरेस्ट)’ पर भारत का झंडा लहराया गया ।

इस के साथ एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक क़दम रखने वाली वे दुनिया की 5वीं तथा भारत की प्रथम महिला बनीं ।

माउंट एवरेस्ट पर आरोहण के कुछ ही समय बाद उन्होंने इस शिखर पर महिलाओं की एक टीम के अभियान का सफल नेतृत्व भी किया ।

उन्होने वर्ष 1994 में गंगा नदी में हरिद्वार से कोलकाता तक लगभग 2,500 किमी लंबे नौका अभियान का नेतृत्व किया ।

सम्मान
  • 1984 – भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन से पर्वतारोहण में उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण पदक ।
  • 1984 – पद्मश्री से सम्मानित किया गया ।
  • 1985 – उत्तर प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्वर्ण पदक दिया गया ।
  • 1986 – भारत सरकार द्वारा अर्जुन पुरस्कार प्रदान किया गया ।
  • 1986 – कोलकाता लेडीज स्टडी ग्रुप अवार्ड से सम्मानित किया गया ।
  • 1994 – भारत सरकार द्वारा नेशनल एडवेंचर अवार्ड दिया गया ।
  • 1995 – उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान दिया गया ।
  • 1997 –  हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पी0 एच0 डी0 की मानद उपाधि दी गयी ।
  • 2013 – 14 – संस्कृति मंत्रालय, मध्य् प्रदेश सरकार का पहला वीरांगना लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय सम्मान दिया गया ।

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धन्यवाद ।

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