भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक

भारत के नियंत्रक एवं    महालेखा परीक्षक 

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक नामक इस लेख में आपको,

एक ऐसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के बारे में बताने की कोशिश की जाएगी,

जो न केवल आपको सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी है,

बल्कि भारत को जानने के लिए जरूरी सामान्य बुद्धि कौशल के लिए भी जरूरी है।

इसे सामान्य भाषा में नियंत्रक एवं महालेखा परी क्षक कहा जाता है।

कुछ लोग इसे कैग या CAG भी कहते हैं जिसका

मतलब comptro and auditor general of India  होता है ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में नियंत्रक व

महालेखा परीक्षक के स्वतंत्र पद की व्यवस्था की गई है।

इसे संक्षेप में महालेखा परीक्षक भी कहा जाता है।

यह भाभारतीय लेखा परीक्षण और लेखा विभाग का मुखिया होता है।

यह लोक वित्त का संरक्षक होने के साथ साथ देश

की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था का नियंत्रक होता है।

इसका नियंत्रण राज्य एवं केन्द्र दोनों स्तर पर होता है।

इसका यह कर्तव्य होता है कि यह भारत के संविि

धान एवं संसद की विधि के अधीन वित्तीय प्रशा सन को संभाले।

डाक्टर भीम राव अम्बेडकर के शब्दों में कहें तो

यह पद भारतीय संविधान के तहत सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

आपको एक खास बात बता दें कि कैग भारत के लोकतंत्र के रक्षकों में एक है।

भारतीय संवि और लोकतंत्र के रक्षकों में उच्चतम न्यायालय,

निर्वाचन आयोग, महालेखा परीक्षक और संघ

लोक सेवा आयोग को शामिल किया जाता है। 

कैग की नियुक्ति एवं कार्यकाल 

नियंत्रक एवं महा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है।

कार्य भार संभालने के पहले यह निम्न लिखित शपथ या प्रतिज्ञा लेता है।

🔴मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रृद्धा रखूंगा।

🔴भारत की एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण रखूंगा।

🔴अपनी श्रद्धा एवं योग्यता के अलावा ज्ञान एवं

योग्यता से अपने पद के कर्तव्यों का बिना भय या पक्षपात के पालन करूंगा।

🔴संविधान एवं विधि की मर्यादा का पालन करूंगा। 

इसका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष जो भी पहले हो उतना होता है।

इससे पहले वह अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को किसी भी समय भेज सकता है।

राष्ट्रपति इसे उसी तरह से पद से हटा सकते हैं

जिस तरह से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाया जाता है।

यानी संसद के दोनों सदनों के द्वारा बहुमत के

आधार पर प्रस्ताव पास करके इसे हटाया जा सकता है। 

कैग की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्वतंत्रता एवं

सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संविधान में कुछेक इस तरह की व्यवस्था की गई है।

🔴भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को

केवल राष्ट्रपति द्वारा ही वैधानिक तरीके से हटाया जा सकता है।

🔴यह राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त तो होता है लेकिन उसके प्रसाद पर्यंत पद पर नहीं रहता।

🔴बल्कि संविधान की अपनी ताकत से अपने पद पर रहता है।

🔴यह अपना पद छोड़ने के बाद किसी भी राज्य

स्तर या केंद्र स्तर पर कोई पद धारण नहीं कर सकता।

🔴इसका वेतन एवं अन्य सेवा शर्तें संसद द्वारा निर्धारित होती हैं।

🔴इसके पद में कोई भी अलाभ परिवर्तन संभव नहीं होता।

🔴इस पद से संबंधित सभी खर्च भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 24052018 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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