मौन की भाषा का सत्य

मौन की भाषा का सत्य 

मौन की भाषा का सत्य सच कहें तो अद्भुत है यह

अद्वितीय सौन्दर्य बोध की अतुलनीय, अलौकिक

साथ ही अवर्णनीय शब्दों की महती महक है।

आप ऊपर से पाते हैं कि मौन अबोलना है लेकिन

सच यह है कि मौन वाचालता है,

यानी अतिशय बोलने का नाम है मौन।

भला यह कैसे?

इसका उत्तर अद्वितीय है जो कतई सब की समझ

में आने वाला नहीं है।

साधारण लोग समझते हैं कि मौन में बोलना बंद

हो जाता है।

लेकिन सच यह है कि हम जब मौन होते हैं तो ज्याद बोबोलते हैं।

चूंकि तब जबान नहीं आत्मा बोलती है इसलिए

हम इसे कभी समझ नहीं पाते। 

मौन वास्तव में क्या है?

मौन का सच यह है कि जब हम अपनी आत्मा के

साक्षात्कार से गुजर रहे होते हैं,

तो उस समय एक नहीँ कई धाराओं में हमारा विचार विनिमय जारी हो जाता है।

इसी बीच हमारी आत्मा के सारे द्वार तो खुल जाते हैं,

लेकिन उसी वक्त हमारी वाक शक्ति आत्मा के प्रभाव में शून्य हो जाती है,

और हम जुबान से न बोलकर आंतरिक आत्म चिंतन से वार्तालाप प्रारंभ कर देते हैं।

यही वास्तव में मौन है। 

सब की समझ में नहीं आती हमारे मौन की स्थिति

 

मौन की भाषा की सच्चाई यह है कि यह सब की

समझ से परे होती है,

इसलिए हमारे मौन की स्थिति भी सब की समझ

से परे होती है।

अर्थात वास्तविक मौन क्या है यह जानना, और

समझना साथ ही  महसूस करना  अलौकिक व

अद्वितीय है।

मौन का एक सच यह भी है कि मौन चुपचाप नहीं होता,

लेकिन ध्यान से देखें तो हम इस बात को कभी भी

समझ नहीं पाते। 

मौन रहना त्याग है तपस्या है 

 

जी हां दोस्तों, मौन रहना त्याग है, तपस्या है मौन।

मौन रहने से शरीर की ऊर्जा बढती है।

मौन के ही बल से व्यक्ति को अपने जीवन में कई

सफलताएं प्राप्त होती हैं।

मौन की शक्ति यह है कि महावीर 12 वर्ष, महात्मा बुद्ध 10 वर्ष तक मौन रहे थे।

और इसके बाद इन महापुरुषों ने संसार को क्या

दिया यह किसी से छिपा नहीं है।

महर्षि रमण व चाणक्य भी मौन के ही उपासक थे।

आम आदमी के संदर्भ में बात करें तो आज के

समय में मौन रहना किसी दवाई से कम नहीं है।

क्योंकि आजकल हम न तो किसी से खुद को कम

समझते हैं और न ही किसी को अपने से काबिल समझते हैं।

ऐसे में केवल और केवल संघर्ष शील स्थितियों की ही कल्पना की जा सकती है।।

इसलिए अगर समग्रता से इस संदर्भ में विचार करें तो मौन वह प्रासंगिक उपाय है,

जिससे हम आज और कल दोनों को सुव्यवस्थित कर सकते हैं। 

 

धन्यवाद

KPSINGH 31052018

 

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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2 Comments on “मौन की भाषा का सत्य”

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