चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल चुका है

चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल चुका है 

चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल चुका है |
मेरा देश महान, भारत महान के नारों की गुँज हम अक्सर राष्ट्रीय पर्व पर सुनते हैं पर मेरे मन में सदा एक कसक रहती है कि हम कब तक अतीत की महानता के सहारे जीयेंगें ?
क्या वर्तमान में या पिछले 50 सालों में भारत ने कोई महान कार्य किया है जिसका गुणगान आने वाली पीढ़ी कर सके |
चंद उदाहरणों को छोड़कर कुछ नहीं मिलता है |
आजादी को 70 साल बीत चुके हैं |
इस दौरान कितनी ही सरकारें आई और गई, पर भारत के लोगों की समस्याएँ यथावत हैं |
भारत देश का नागरिक होने के कारण मेरा दायित्व बनता है कि मैं सोचूँ, विचार करूँ, विश्लेषण करूँ और लोगों को बताऊँ कि भारत की तरक्की और खुशहाली में बाधक मूल समस्याएँ कौनसी हैं |
यदि समस्या की जड़ को पहचान गये, वहाँ तक पहुँच गये तो हल आसानी से खोज लेंगे |
आज की पोस्ट में मुख्य रुप से आर्थिक विकास को केन्द्रित किया गया है |
इसे अच्छी तरह समझने के लिए मैं चाइना देश से तुलना करके अपने विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ कि चाइना किन  कारणों से भारत से आगे निकल चुका है |
1990 तक चाइना विश्व का केवल 3% प्रोडेक्ट तैयार करता था जो बढ़ते बढ़ते 2018 तक 25% हो गया |
यानी विश्व में खपत होने वाले सभी तरह के प्रोडेक्ट का एक चौथाई अकेला चाइना तैयार कर रहा है |
दुनिया का 70% मोबाइल, 74% सोलर सैल, 80% एयर कंडिशन, 50% कोयला, 50% स्टील , 60% जूते, 60% सीमेन्ट अकेला चाइना बना रहा है |
पूरी दुनिया को खाने के लिए सेव 50% चाइना ही देता है | दूसरे स्थान पर अमेरिका है जो मात्र 6% उत्पादित करता है |
आज विश्व में USA के बाद सबसे पावरफुल देश चाइना ही है |
2ै017 में 2.2 Trillion डॉलर का निर्यात करके सबसे बड़ा निर्यातक देश बना हुआ है |
आमतौर पर लोगों की धारणा है कि चाइना सस्ता आइटम बनाता है लेकिन ध्यान रहे दुनिया के 60% मोस्ट ब्रांडेड आइटम चाइना ही तैयार करता है |
अगर चाइना के अतीत की बात करें तो 1978 तक चाइना एशिया और अफ्रीका के पिछड़े देशों से भी पिछड़ा था |
आज उनके हर आदमी का जीवन स्तर पिछले 30-40 वर्षों में काफी ऊँचा उठ गया है |
आइये जानते हैं कि इतने कम समय में चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल गया है |

1. Mass Production and Dumping –

 
इसका अर्थ है अत्यधिक उत्पादन और अल्पमूल्य पर विक्रय |
चाइना ने जिस भी देश में व्यापार शुरू किया पहले वहाँ बिकने वाले माल की कीमत का पता लगाया और उसके बाद अपने देश में अत्यधिक उत्पादन किया जिससे माल पर लागत मूल्य कम हो गई |
बिजनेस का यह सिद्धांत होता है कि यदि उत्पादन अधिक होता है तो उस पर लागत कम आती है |
अत्यधिक उत्पादित माल को एक साथ एक देश के बाजार में कम मूल्य पर बिकने के लिए उतार देता है, जिससे पहले का बाजार पूरी तरह तहस नहस हो जाता है और चाइनीज़ माल का एकाधिकार हो जाता है |
जबकि हमारे देश में लघु और कुटीर उद्योग पर बल दिया जाता था |  ये लघु  उद्योग छोटे ही रह गये |
इसे बड़ा करना नहीं आया जिससे निर्यात नहीं हो पाया |
इन लघु उद्योग के प्रोडेक्ट विश्व स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाये |

2. Reverse Manufacturing –

इसका अर्थ है चाइना के लोग दुनिया भर से बेस्ट प्रोडेक्ट को लाकर उसे खोलकर देखते हैं कि इसमें क्या क्या लगाया है  उसकी नकल करके अपना माल तैयार कर लेते हैं |
इससे चाइनीज़ को रिसर्च करने में, technology बनाने में समय और पुँजी खर्च नहीं होती है |
जबकि भारत में इतना दिमाग कोई लगाना नहीं चाहता है |
यहाँ के लोगों की सोच सीमित है |
अधिक से अधिक अपने मोहल्ले या बाजार में दुकान कर लेते हैं |
सुबह से शाम तक जैसे तैसे माल को बेचकर गुजारा चला लेते हैं |
विश्व स्तर की सोच नहीं रखते हैं | कम्पीटिशन से दूर भागते हैं |
अपनी क्षमता का भी  सही  सदुपयोग  नहीं करते हैं |

3. Labour Cost –

ऐसा माना जाता है कि जनसंख्या अधिक होने के कारण चाइना में लेबर कोस्ट सस्ती है और इसी वजह से वहाँ माल सस्ते उत्पादित होते हैं |
लेकिन ये मानना बिल्कुल गलत है |
वहाँ की लेबर सस्ती नहीं बल्कि अधिक उत्पादन क्षमता वाली है |
जैसे हमारे देश में एक लेबर 8 घंटे में 10 मोबाइल बनाता है और उसे 500 रू मजदूरी मिलती है |
वहीं चाइना का लेबर उसी 8 घंटे में 50 मोबाइल बनाता है और उसे 1000 रू मजदूरी मिलती है |
हम हिसाब लगाते हैं कि चाइना में एक मोबाइल बनाने के 20 रू मिलते हैं और हमारे देश में 50 रू |
लेकिन गौर कीजिये हमारे देश का लेबर एक महीने में 15000 रू कमा रहा है जबकि चाइनीज़ मजदूर 30000 रू कमा रहा है |
चाइना में लेबर कोस्ट सस्ती नहीं बल्कि उनकी उत्पादन क्षमता अधिक है, कौशल क्षमता हमसे कहीं अधिक है जिससे उत्पादन अधिक होता है |
हमारे देश में भी skill development पर जोर दिया जा रहा है |

4. Experience and Expertise 

किसी भी देश को कोई प्रोडेक्ट तैयार करवाना होता है तो सबसे पहले वे चाइना आते हैं और तलाशते हैं कि इसे कौन तैयार कर सकते हैं |
वहाँ के लोग इतने अनुभवी और दक्ष हो गये हैं कि कोई भी नया प्रोडेक्ट दे दो सभी उसे बनाने के लिए तैयार हो जाते हैं चाहे उस प्रोडेक्ट के बारे में वे कुछ नहीं जानते हों |
केवल अपनी अनुभव और दक्षता के आधार पर उन्हें विश्वास होता है कि वे इसे तैयार कर देंगे |
जबकि हमारे देश में अनुभव और दक्षता का अभाव है |
जो अनुभवी और दक्ष लोग हैं, या तो वे मिलते नहीं या कम संख्या होने के कारण उनके पास समय नहीं होता है |
इस कारण हम चाइना से पिछड़े हुए हैं |

5. Political Stability –

 
Political Stability का अर्थ राजनैतिक स्थिरता से है |
जब भी कोई विदेशी कम्पनी भारत में आती है तो उसे सदा ये चिंता रहती है कि अगली सरकार किसकी बनेगी |
अगली सरकार का विदेशी कम्पनियों के प्रति कैसा रुझान होगा ,किस राजनैतिक पार्टी का किस देश के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं |
ये टेंशन विदेशी कम्पनी को हमेशा सताती रहती है जबकि चाइना में ऐसी समस्या नहीं है |
वे जानते हैं कि चाइना की सरकार स्थिर है, उनका Infrastructure stable है ,पावर कट का झंझट नहीं है, ब्यूरोकेसी की दिक्कत नहीं है, जालसाज़ी नहीं है, प्राकृतिक आपदा का खतरा नहीं है |

6. Education –

 
शिक्षा की दृष्टि से चाइना और भारत में ग्रैजुएट का प्रतिशत अंतर बहुत अधिक है |
उनकी शिक्षा में latest Technology, Best Management, Global learning पर बल दिया जाता है जिससे वहाँ के स्टुडेंट अपडेट होते चले गये और हमारे देश के स्टूडेंट पिछड़े रह गये |
शिक्षा किसी भी देश के विकास की रीढ़ होती है |
हमारे देश में उसे भी साक्षर माना जाता है जो केवल अपना नाम लिख पाता हो |
जबकि आज का युग ऐसा हो चुका है कि जो कम्प्यूटर नहीं चला सके वह निरक्षर के समान है |

7. Industrial Network Clustering –

चाइना में किसी एक प्रोडेक्ट को बनाने के लिए जिन जिन चीजों की आवश्यकता होती है उसकी उपलब्धता एक ही जगह सुनिश्चित कर दिया |
इससे प्रोडेक्ट बनाने में समय और पैसा बहुत कम लगता है |
इसे हम एक हब के रुप में जान सकते हैं, जैसे एक ही तरह के प्रोडेक्ट बनाने वाला एक शहर |
इसके लिए सरकार को कई सुविधाएं प्रदान करनी पड़ती हैं |
हमारे देश में भी इस ओर अब काम शुरू हो चुका है |
हर राज्य अपने स्तर पर विज्ञापन कर रही है और विदेशी कॉर्पोरेट को  लुभाने की कोशिश कर रही है |

8. Cost of Power and Availability –

चाइना में पावर यानि बिजली की कीमत और उपलब्धता हमारे देश से बेहतर है |
जहाँ चाइना में एक यूनिट बिजली की कीमत 3 रू और 24 घंटे उपलब्ध रहता है वहीं हमारे देश में एक यूनिट बिजली की कीमत लगभग 8 रू और 10-10 घंटे की कटौती पर उपलब्ध है |
जब देश में बिजली सस्ती और 24 घंटे नहीं मिलेगी तो औद्योगिक विकास में रुकावट तो आयेगी ही |

9. Government and Industry Partnership –

चाइना में सरकार और कॉर्पोरेट दोनों मिलकर काम करते हैं |
चाइनीज़ सरकार जब किसी देश में जाती है तो अपने राजनैतिक लाभ के साथ साथ अपने बिजनेस को भी बढ़ाने पर जोर देती है |
उस देश में बिकने वाले प्रोडेक्ट को सस्ते दाम में उपलब्ध कराती है और धीरे -धीरे पूरे बाजार पर कब्जा कर लेती है |
वहाँ हाइवे, सड़कें, बन्दरगाह, हवाई अड्डा, बिल्डिंग और अन्य infrastructure बनाते बनाते पूरे देश की राजनीति को प्रभावित करने लगती है |
श्रीलंका और पाकिस्तान की स्थिति हमारे सामने है |
हो न हो आने वाले समय में ये दोनों देश चाइना के गुलाम हो सकते हैं |
भारत में सरकार और कॉर्पोरेट साथ साथ काम वही कर सकते हैं |
जैसे ही एक पार्टी की सरकार ऐसा करेगी विपक्षी पार्टी आरोप लगाना शुरू कर देगी कि इस पार्टी ने कॉर्पोरेट से रिश्वत या चंदा लिया है |
यहाँ देश को आगे ले जाने की चिंता नहीं है | यहाँ नेताओं को अपने वोट की, अपने कुर्सी की चिंता है |

10. World class             Infrastructure –

चाइना में Infrastructure जैसे हाइवे, सड़कें, रेल्वे, हवाई अड्डा, बंदरगाह, सप्लाइ चैन आदि भारत के मुकाबले में काफी आगे है |
 
इसकी वजह से उनका ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बहुत कम हो जाता है |
ट्रांसपोर्टेशन चार्ज जो प्रोडेक्ट के लागत में शामिल किया जाता है |
भारत में infrastructure अच्छे नहीं होने के कारण ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ जाता है जिससे प्रोडेक्ट की लागत भी बढ़ जाती है |

 

दोस्तों, इस पोस्ट को सरसरी नजर से न पढ़कर गंभीरता से पढ़ें और जानने की कोशिश करें कि चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल गया | हम सरकार की नीतियों को नहीं बदल सकते, पर आने वाली पीढ़ी को सही शिक्षा देकर उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं |

 

 

आपका ———- प्रमोद कुमार 

 

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About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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3 Comments on “चाइना किन कारणों से भारत से आगे निकल चुका है”

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी है|हमारे देश के युवा उन्नत सोच और आधुनिकता के साथ आगे बढ़े तो हो सकता है|

  2. bahut hi sundar aur upayogi janakari hai. agar dradh ichchha shakti ho to ham bhi chaina ki tarah aage badh sakte hai.

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