पृथ्वी को आप कितना जानते हैं?

पृथ्वी कोआप कितना जानते हैं?

 पृथ्वी आप कितना जानते हैं ? नामक इस लेख

का मकसद यह नहीं है कि आप से कोई सवाल पूछा जाए।

लेकिन माफ करना दोस्तों मुझे शक है कि आप अपनी ही धरती के बारे में,

या तो बहुत कुछ नहीं जानते या फिर यदि जानते हैं तो उसके प्रति गम्भीर नहीं हैं।

हमारी आज की धरती में बहुत कुछ ठीक नहीं चल

रहा कहीं बाढ कहीं सूखा अब आम बात बन चुकी है। हमारी धरती बदलने सी लगी है।

दोस्तों हमारी पृथ्वी कुछ और भी बदल जाए इससे

पहले आइए अपनी पृथ्वी के बारे में कुछ जानने का प्रयास करते हैं।

कैसी है हम सब की पृथ्वी

पृथ्वी से संबंधित नवीनतम तथ्य यह है कि हमारी

पृथ्वी यदि भविष्य में नष्ट होती है तो इसके विनाश 

का प्रमुख कारण सूर्य होगा।

सूर्य से दूरी के अनुसार ग्रहों का क्रम इस प्रकार है

:बुद्ध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, वृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।

आकार के आधार पर ग्रहों का क्रम इस प्रकार है

वृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल बुद्ध।

 

हमारी पृथ्वी का भूमध्य रेखीय व्यस 12756 किमी है,

जब कि इसका ध्रुवीय व्यास 12713 किलोमीटर है।

हमारी पृथ्वी की भूमध्य रेखीय परिधि 40075

किमी है, जब कि ध्रुवीय परिधि 40000 किमी है।

हमारी पृथ्वी का पृष्ठीय क्षेत्र फल 510100500

वर्ग किलोमीटर है, 

हमारी पृथ्वी का स्थल व जल मंडल 

हमारी पृथ्वी पर स्थल मंडल 153000000 वर्ग

किलोमीटर में मौजूद है,

जब कि हमारी पृथ्वी के जल मंडल का क्षेत्रफल

357100000 वर्ग किलोमीटर है।

हमारी पृथ्वी सूर्य के चतुर्दिक अंडाकार मार्ग पर परिक्रमा करती है।

हमारी पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व 1610

किलोमीटर प्रति घंटा की गति से परिक्रमा करती है।

 

हमारी पृथ्वी परिक्रमण गति के दौरान 4 जुलाई

को सूर्य के सबसे दूर होती है,

जबकि 3/4 जनवरी को यह दूरी सबसे कम होती है।

जब पृथ्वी सूर्य के सबसे दूर होती है तो उसकी दूरी

15.2करोड़ किलोमीटर होती है,

जब कि सबसे नजदीक होने पर दूरी 14.73करोड़

किलोमीटर होती है। 

हमारी पृथ्वी और चंद्र ग्रहण सूर्य ग्रहण 

जब हमारी पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य आ

जाती है तो उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है।

इससे चंद्रमा धीमा पड़ जाता है तब इसे  चंद्रग्रहण कहा जाता है।

जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है तो

चंद्रमा के कारण, सूर्य पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होता। यह स्थिति  सूर्य ग्रहण कहलाती है।

पृथ्वी का केंद्रीय भाग क्रोड या निफे कहलाता है।

जब पृथ्वी के बाह्य पटल को तोड़कर धरती के ही अंदर का लावा,

धुआं राख वाष्प के साथ बाहर आता है तो वह ही मुख ज्वालामुखी कहलाता है।

पृथ्वी के चारों ओर कई सौ किलोमीटर मोटी परत वायुमंडल है।

कास्ते द बफन ने पृथ्वी की उत्पत्ति के संदर्भ में

आज तक की सबसे तर्क पूर्ण परिकल्पना की थी।

फ्रांसीस वैज्ञानिक कास्ते द बफन ने पृथ्वी संबंधी अपनी परिकल्पना 1749 में दी थी।

कास्ते द बफन ने अपनी परिकल्पना में बताया था

कि पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों की उत्पत्ति तब होती है,

जब किसी पुच्छल तारे की सूर्य से टक्कर होती है।

मारियाना ट्रंच पृथ्वी पर सबसे गहरा स्थान है।

सागर का जल जब आगे बढता है तो ज्वार तथा जब पीछे आता है तो भाटा कहलाता है।

जब सूर्य चंद्रमा पृथ्वी सब एक सीध में होते हैं तो

चंद्रमा और सूर्य के आकर्षण से ज्वार भाटा का जन्म होता है।

पूरी दुनिया की आबादी का 60%  हिस्सा एशिया महाद्वीप में निवास करता है।

प्रायद्वीपों का महाद्वीप यूरोप को ही कहा जाता हैै

क्यों कि यह तीनों ओर से सागरों से घिरा हुआ है।

उत्तरी अमेरिका की खोज 1492 में कोलम्बस

द्वारा की गई है तब इसे नई दुनिया कहा गया था।

आस्ट्रेलिया सबसे छोटा महाद्वीप है जिसका कुल

क्षेत्रफल 7292030 वर्ग किलोमीटर है। 

धन्यवाद

KPSINGH 11062018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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