विटामिन ई के लाभ,हानि एवं इसके स्रोत आइए जानें।

विटामिन ई के लाभ,हानि एवं इसके स्रोत आइए जानें।

 

 

विटामिन ई :- विटामिन ई के बारे में दोस्तो आज हम विचार करेंगे। कई प्रकार के तेलों, फलों और सूखे मेवों में पाया जाने
वाला यह विटामिन स्वास्थ्य व सौंदर्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। विभिन्न प्रकार केे खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले
इस विटामिन को लेने का सर्वोत्तम तरीका यही है कि इसे भोजन के माध्यम से लेें। यह विटामिन हमारे शरीर के लिए
अत्यंत आवश्यक है,चाहे एलर्जी दूर करने की बात हो या फिर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की। यह वसा मेंं घुुुलनशील विटामिन
होता है। कोलैस्ट्रौल को नियंत्रित करने वाले व एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में काम करने वाले इस विटामिन ई केे बारे मेें दोस्तो
चलिए और विस्तारपूर्वक जानने की कोशिश करते हैं।

 

 

 

विटामिन ई लेने के लाभ :-

(1) विटामिन ई के सप्लीमेेंट लेने वाले व्यक्ति को अल्जाइमर्स का खतरा कम रहता है।

 

 

 

(2) महिलाओं मेें मीनोपॉज की स्थिति आने के बाद यह विटामिन स्ट्रोक का खतरा कम कर देता है।

 

 

 

(3) एक शोध के मुताबिक यह पाया गया है कि इस विटामिन को लेने वाले व्यक्तियों में कैैंसर का खतरा कम रहता है।

 

 

 

(4) इस विटामिन की उपयुक्त मात्रा शरीर में मौजूद रहने पर हृदय रोग की संंभावना कम हो जाती है।

 

 

 

(5) त्वचा का रूखापन दूर करना झुर्रियाँ हटाना ,असमय बूढ़े होने से बचाना,सूर्य की पराबैंंगनी किरणों से बचानेे आदि में यह
       विटामिन अत्यंत उपयोगी है।

 

 

 

(6) प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना,ब्रैस्ट कैंसर को रोकना ,मासिक धर्म केे समय होने वाले दर्द में यह विटामिन काफी राहत प्रदान
        करता है।

 

 

(7) कोलैस्ट्रौल के लेवल को कंंट्रौल करना,एलर्जी को रोकना व डायबिटीज इत्यादि बीमारी में अत्यंत उपयोगी है।

 

 

 

विटामिन ई की कमी से होनेे वाली हानि :-

(1) आँखों की रोशनी कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त आँखों के मूवमेंट मेें भी परिवर्तन आ जाता है।
(2) शरीर के अंगों का ठीक ढंग से कार्य न करना व माँँसपेशियों मेंअचानक कमजोरी हो जाना भी इस विटामिन की कमी
       के कारण होता है।

 

 

 

(3) शारीरिक कमजोरी व प्रजनन क्षमता कम हो जाना भी इसी विटामिन की कमी से होता है।
(4) लड़खड़ा कर चलना,माँस पेशियों में ऐंठन व दर्द इसी विटामिन की कमी के कारण होते हैं।
(5) कंकाल मायोपेथी,एनीमिया,परिधीय न्यूरोपेेथी इसी विटामिन की कमी को दर्शाता हैै।

 

 

 

अत्यधिक मात्रा में लेने से होने वाली हानि :-

(1) आहार के माध्यम से इस विटामिन के लेेने से हमें कोई हानि नहीं होती है,लेकिन जब लोग डॉक्टर के परामर्श से बताई
       गई मात्रा से भी अधिक फूड सप्लीमेंट के माध्यम से लेेेते हैं,तो शरीर को बहुुुत हानि होती है।
(2) चूँकि यह मूत्र मार्ग से बाहर नहीं निकलता,अत: यह विषाक्त पदार्थ के रूप में शरीर मेें जमा हो जाता है,क्योंकि यह वसा
       में घुलनशील विटामिन है और शरीर में एकत्रित हो जाता है।
(3) इस विटामिन की अत्यधिक मात्रा हो जाने पर खून पतला होना,रक्तस्राव व थकान जैैसी समस्याएँ पैदा हो जाती हैं।

 

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विटामिन ई के स्रोत :-

(1) वसा में घुुुलनशील यह विटामिन शकरकंद, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, सूखे मेवे, अंडे, सूरजमुखी के बीज इत्यादि में यह
      विटामिन प्रचुर मात्रा में मिलता है।
(2) इसके अतिरिक्त सरसों,कोड लिवर ऑयल,ब्रौकली,कद्दू,शलजम,पपीता,आम, पॉपकोर्न आदि भी विटामिन ई के अच्छे
      स्रोत हैैं।
(3) सोयाबीन,मक्का,पालक भी इस विटामिन के स्रोत हैं।

 

आयु के अनुसार प्रतिदिन ली जाने वाली मात्रा :-

(1) नवजात शिशु से छ: महीने तक – 4 मिग्रा
(2) 7 माह से 12 माह – 5 मिग्रा
(3) 1 वर्ष से 3 वर्ष तक – 6 मिग्रा
(4) 4 वर्ष से 8 वर्ष तक – 7 मिग्रा
(5) 9 वर्ष से 13 वर्ष तक – 11 मिग्रा
(6) 14 वर्ष या उससे अधिक – 15 मिग्रा
(7) स्तनपान कराने वाली महिलाएँ – 17 मिग्रा
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                                                                                                                                                             धन्यवाद

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