आटोवाला और अकेली लड़की

आटो वाला औरअकेली लड़की

क्या हुआ जब आटोवाले को रात में अकेली मिली थी

लड़की?

जी हां दोस्तों, सुमन का घर लेट आने का कोई इरादा

नहीं था।

और न ही उसके काम का ऐसा कोई शेड्यूल फिक्स था।

वह एक दो दिन या हफ्तों महीनों से नहीं बल्कि सालों

से अपने तय समय से ही,

आफिस आती और जाती रही है, लेकिन कभी कभी

संयोग भी कमाल की स्थिति पैदा कर देते हैं।

सुमन के साथ ही काम करने वाली राधिका उसकी सब

से खास सहेली थी।

इस बेदर्द दुनिया से हमें लड़ना नहीं आता।।

राधिका ने अपने जन्म दिन की पार्टी आज आफिस में

ही रखी थी।

यही कारण है कि आज पहली बार सुमन से समय का

लोचा हुआ था।

जब कि सुमन को पता था कि यदि वह समय से घर

नहीं पहुंची तो घर में कोई खाना नहीं खाएगा।

पर करे तो अब सुमन क्या करे?

जब उसने घड़ी में निगाह डाली तो उसका कलेजा मुंह

को आ गया।

उसे पता ही नहीं चल पाया कि आज वह आफिस में

इतनी रात तक क्या कर रही है।

इसी तरह के तमाम ख्याल बस आ रहे थे और जा रहे थे।

सुमन का एक एक पल हजारों वर्षों के समान बीत रहा था।

पर वह घर जल्दी पहुंचने की गरज से बाई पास आटो

स्टैंड की तरफ अपनी धुन में सरपट चली जा रही थी।

पर यह क्या?

आटो स्टैंड में एक भी आटो रिक्सा नहीं था।

इस समय लगभग पौने बारह बज रहे थे।

सच तो यह है कि उस समय सुमन को कुछ भी समझ

में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और क्या न करे।

उसे बस घर पहुंचने की धुन सवार थी।

वहीं दूसरी ओर

दिन में खचाखच भरे रहने वाले आटो स्टैंड में आटो

और आटो की छाया भी नहीं थी।

चारों तरफ पल पल बार बार रहरह कर नजर घुमा रही

सुमन के मानों प्राण ही पूरी तरह सूख गए हों।

हकीकत यह है कि उसे घर पहुंचने से ज्यादा अब इस

बात का अफसोस और खयाल आ रहा था कि वह

आज जिंदा रह पाएगी भी या नहीं?

पर यह क्या?

किसी साधन का आसरा छोड़ चुकी सुमन की अपनी

आंखो में एक पल के लिए भरोसा नहीं हुआ कि इतनी

रात गए भी कोई साधन आ सकता है।

सुमन एकपल के लिए बहुत खुश हो गई पर दूसरे ही

पल मायूस भी।

उसे एक पल पहले किसी साधन की तलाश थी

लेकिन इतनी रात का जैसे ही उसे खयाल आता वह

कांप सी जाती।

कहते हैं मरता क्या न करता।

जैसे ही आटो नजदीक आया सुमन ने हांथ दे दिया।

पल भर में आटो और आटो वाला सुमन के सामने थे।

कहां जाना है?

आटोवाले ने आवाज लगाई तो सुमन बड़ी मुश्किल से

आवाज निकली।

चंदननगर जाएंगे?

आटोवाले ने आटो बंद करके कहा हां जाएंगे।

सुमन पहले तो डरी लेकिन फिर हिम्मत करके बोली

कितने  पैसे?

आटोवाले ने कहा जो मर्जी दे देना

सुमन इस जवाब से भी अचकचा गई

पर हिम्मत दिखाते हुए बिना डरे हुए कहा

ठीक है जल्दी चलिए।

आटोवाले ने कहा ठीक है चलता हूं।

इतना कहकर आटोवाले ने बजाय गाड़ी स्टार्ट करने के

अपनी सीट में कुछ ढूंढने सा लगा

सुमन को अटपटा सा लगा तो उसने फिर टोका

लेकिन तब तक वह जो खोज रहा था शायद खोज

चुका था।

आटोवाले के हांथ में तीन अलग अलग फोटोग्राफ थे

उसने एक बार फोटोग्राफ को देखा तो दूसरे पल सुमन

की ओर देखा

ऐसा लगा जैसे वह तस्वीर मिला रहा था।

सुमन को जब कुछ समझ में नहीं आया तो उसने

आटोवाले से पूछा

आप चलते क्यों नहीं और यह तस्वीर की तरफ

देखकर मेरी ओर

क्यों देख रहे हैं?

आटोवाले वाले ने जो जवाब दिया उसे सुनकर सुमन

को लगा जैसे वह आटोवाला नहीं कोई भगवान् का

दूत आ गया हो।

आटोवाले ने सुमन को यह जवाब दिया था।

बेटा यह जो तीन तस्वीर आप मेरे हाथ में देख रही हैं

वह दरअसल मेरी

मां

बहन

बेटी की तस्वीरें हैं

मैं जब भी रात में किसी महिला को अपने आटो में

बिठाता हूं।

उससे पहले इन तस्वीरों को जरूर देख लिया करता हूं

ताकि मुझे यह ख्याल बना रहे कि मेरे भी घर में मेरी मां

बहन बेटी हैं।

आटोवाले की बात सुनकर सुमन को लगा आटोवाले

के पैर छू ले क्यों कि उसे लग रहा था कि आटो लेकर

कोई और नहीं खुद उसके पापा आ गए हों।

 

धन्यवाद

KPSINGH 11062018

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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