कैल्शियम के लाभ,हानि एवं इसके स्रोत आइए जानें।

­कैल्शियम के लाभ,हानि एवं इसके स्रोत आइए जानें।

 

 

कैल्शियम :- कैल्शियम के बारे मेें दोस्तो आज हम कुुुछ जानकारी देना चाहेेंगे। यह हमारे शरीर के लिए अत्यंत बहुमूल्य
खनिजों में से एक है। इसकी अनुुुपस्थिति हमारे शरीर को अनेेेक बीमारियों का न्यौता देने के लिए काफी है।हमारे शरीर की
हड्डियों को मजबूूत बनाने में इसका अमूल्य योगदान होता है। इसका सेेवन सबके लिए अत्यंत आवश्यक है,चाहे वे
बच्चे,बड़े या फिर महिला या पुुुरुष हों। अगर देखा जाए तो महिलाओं को इसकी अधिक आवश्यकता होती है,क्योंकि मासिक
धर्म या प्रसव के दौरान अत्यधिक मात्रा में कैैैल्शियम शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर आपके घर मेें कोई व्यक्ति
हड्डियों के दर्द व जोड़ों के दर्द से परेेेशान है,तो समझ लीजिए उसको कैल्शियम युुुुक्त खाद्य पदार्थों की अत्यंत आवश्यकता
है। तो दोस्तो अनेक बीमारियों से दूर रखने वाले इस बहुमूल्य खनिज कैल्शियम के बारे में विस्तार पूूर्वक जानने की कोशिश
करते हैैं।

 

 

कैल्शियम के लाभ :-

(1) हड्डियों व दाँतों के लिए यह खनिज रामबाण की तरह काम करता है। चूँकि बच्चों की हड्डियाँ नाजुक होती हैं,इसलिए
        उनकी हड्डियों को मजबूत बनाने हेतु उनके आहार मेें कैैैल्शियम को अवश्य शामिल करना चाहिए।

 

 

 

(2) एक शोध के अनुुुसार यह निष्कर्ष निकला है कि कैैल्शियम युक्त आहार लेेेने से डायबिटीज एवं कैंसर जैसी बीमारी को
        दूर भगाया जा सकता है।

 

 

 

(3) महिलाओं में मासिक धर्म व प्रसव के दौरान एवं गर्भावस्था की स्थिति में इसकी मात्रा लेने से गर्भस्थ शिशु को पर्याप्त
       मात्रा मेंं कैैैल्शियम मिलता रहता है।

 

 

 

(4) बच्चों द्वारा इसकी उचित मात्रा लेने पर वे रिकेेेट्स नामक बीमारी से दूर रह सकते हैं।
(5) यह हृदय की धड़कन व माँसपेशियों के संकुुचन को नियंत्रित करके रखता है। माँसपेशियाँ तंत्रिका तंत्र द्वारा उत्तेजित
      की जाती हैंं,तो कैल्शियम का स्राव होता है। परिणामत: कैैैल्शियम के माँसपेशियों सेे बाहर निकलने पर इन्हेें बहुत आराम
      पहुँचता है।

 

 

 

(6) सामान्यरूप से चोटिल होने पर रक्त को बहने से रोकने में कैैैल्शियम का अहम योगदान होता है। चूँकि रक्त रोकने की
      प्रक्रिया में अनेक रसायन सम्मिलित होते हैं,उनमें कैल्शियम का भी एक अहम हिस्सा हैै।

 

 

 

(7) शरीर मेें अनेेेक प्रकार के एन्जाइम्स के निर्माण हेतुु कैल्शियम की अत्यंत आवश्यकता होती है।
(8) उच्च रक्त चाप को कम करना,उच्च कौलैस्ट्रौल को नियंत्रित करना,बच्चों में उपस्थित फ्लोराइड की मात्रा को नियंंत्रित
      करना इसी कैैैल्शियम का ही कार्य है।

 

 

 

कैल्शियम की कमी होने पर हानि :-

(1) हड्डियाँँ व दाँत कमजोर होना इसी की कमी के कारण होते हैैं।
(2) माँसपेशियों मेेंं ऐंठन,ऑस्टियोपोरोसिस व हड्डियों मेें फ्रैक्चर होना इस खनिज की कमी का ही परिणाम है।

 

 

 

(3) डिमेंंशिया,अनिद्रा,डिप्रैशन,परजीवी आक्रमण से जूूूझने की क्षमता कम होना ,ये सभी इसी खनिज की कमी के कारण
        होते हैंं
(4) बालोंं का टूूूटना व झड़ना,कमर झुक जाना,नाखून व दाँत कमजोर होना,मानसिक तनाव,डर लगना,नींद न आना,ये सभी
       इसी खनिज की कमी का फल होते हैं।

 

 

 

कैल्शियम की अधिक मात्रा लेने से होने वाली हानि :-

(1) इस खनिज की अत्यधिक मात्रा लेने से पेेेट दर्द,मुँह सूख जाना,उल्टी व दिल की अनियमित रूप से अकड़न इसकी
      अत्यधिक मात्रा लेेेने  का ही परिणाम है।
(2) जो व्यक्ति हर्ट डिसीजिज, सारकॉइडोसिस(हड्डी का ट्यूमर) एवं किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं,उन्हें डॉक्टर की
      अनुमति केे बिना इसकी मात्रा नहीं लेनी चाहिए।

 

 

 

(3) इसकी अत्यधिक मात्रा लेेेने पर हमें गुर्देे की पथरी की समस्या से जूझना पड़ सकता है। जो व्यक्ति कैल्शियम युुुक्त
      आहार लेने के साथ-साथ किसी अन्य माध्यम से भी इसे लेते हैं, तो उन्हें स्ट्रौक व दिल का दौरा पड़ जाने की संभावना
      अधिक हो जाती है।
(4) अगर पहले से ही हम मिर्गी, डायबिटीज, दिल की बीमारी से सम्बन्धित दवाएँ ले रहेे हैंं, तो बिना डॉक्टर के परामर्श के इस
      खनिज का सेवन न करें। अन्यथा हमें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

 

 

 

कैल्शियम के स्रोत :-

(1) इसके मुख्य स्रोत दूूूध,दही,पनीर व अंडे हैं।फलों व सब्जियोंं में भी यह प्रचुर मात्रा में मौजूद   रहता है।
(2) केला,अंगूर,नाशपाती,अनार,अमरूद, पपीता,आम,संतरा,सेब,लीची,अनानास, शहतूूूत जामुुुन,ये भी इस खनिज का स्रोत
       हैं।
(3) धनिया,पोदीना,टमाटर,अरबी,मूूूली , करेला,ककड़ी,पत्ता गोभी, भिंडी, गाजर, लहसुुुन,तोरई,टिंंडा,बैैंगन, नींबूू,बथुआ,इन
      सभी में यह खनिज प्रचुुर मात्रा में मिलता है।
(4) अनाज,राजमा,मूूँग,सोयाबीन, ड्राई फ्रूट्स भी इस खनिज केे अच्छेे स्रोत हैं।

 

 

 

प्रतिदिन इस खनिज की ली जाने वाली मात्रा :-

(1) 0 से 6 माह – 200 मिग्रा
(2) 7 से 12 माह – 260 मिग्रा
(3) 1 से 3 वर्ष – 700 मिग्रा
(4) 4 से 8 वर्ष – 1000 मिग्रा
(5) 9 से 18 वर्ष – 1300 मिग्रा
(6) 19 से 50 वर्ष -1000 मिग्रा
(7) 51 से 70 वर्ष – 1200 मिग्रा(महिलाएँ)
                                    1000 मिग्रा(पुुरुष)
(8) 70 वर्ष व उससेे ऊपर – 1200 मिग्रा
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                                                                                                                                                                   धन्यवाद

 

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