सफलता के ऩये सूत्र NEW FORMULA OF SUCCESS

सफलता के नये सूत्र  NEW FORMULA OF SUCCESS

दोस्तों, सफल कौन नहीं होना चाहता ?
हर व्यक्ति सफलता की नई ऊँचाइयों को छूना चाहता है |

आज मैं आपको सफलता के नये सूत्र, नये फार्मूला, नये आयडिया बताऊँगा
जो निश्चित रुप से आपको सफल बनाने में सहायक होंगें |
आपने सफलता के बारे में कई लेख और ब्लॉग पढ़े होंगे पर मेरा दावा है कि उन सबसे अलग प्रेरणादायक और रोचक पोस्ट आज आप पढ़ेंगें |
अपने जीवन से शकुनि और मंथरा को निकाल दें |
आप जानते हैं कि महाभारत में शकुनि और रामायण में मंथरा दो ऐसे पात्र हैं जो इन कथाओं के कारण बने |
कौरव शकुनि से विचार लेते थे और पांडव श्रीकृष्ण से |
राम से कौशल्या ज्यादा प्रेम करती थी या कैकयी |
कौशल्या ने तो राम को जन्म दिया था पर कैकयी के तो नयनों का तारा थे |
बीच में मंथरा के आने से राम को बनवास जाना पड़ा |
इसीलिए कहता हूँ अपने जीवन से मंथरा और शकुनि को निकाल दो |
मंथरा और शकुनि जैसे लोग आपके जीवन में  Stress ( तनाव ) बढ़ाते हैं
और श्रीकृष्ण जैसे सफल लोग  आपके जीवन में Best बढ़ाते हैं |
यदि आपसे पुछूँ कि आपका सलाहकार कौन है तो शायद आपका यही जवाब होगा – मैं खुद अपना सलाहकार हूँ |
लेकिन आपकी यह सोच गलत है | आप जाने अनजाने में अपने आस पास से हर समय सलाह लेते रहते हैं |
ये हमारे आस पास के लोग हो सकते हैं, हमारा मित्र हो सकता है, रिलेटिव हो सकते हैं,
हमारा बॉस या कर्मचारी हो सकता है, अखबार, मुवी, संगीत, मैगजीन, नॉवल कुछ भी हो सकता है |
इससे हमारे मनःस्थिति के विचार बनते हैं |
एक दार्शनिक ने बहुत अच्छी बात कही है – “मुझे अपने दोस्त दिखा दो, मैं आपकी भविष्यवाणी अभी कर दूँगा |”
हमारी संगति जिन लोगों के साथ होती है हमारे विचार, हमारी सोच, हमारा नजरिया,
हमारा आत्मविश्वास उन्हीं के अनुसार पनपती चली जाती है |
आप जिन पाँच लोगों के साथ अधिक समय बिताते हैं
उन्हें देखकर एक समझदार आदमी आपकी इनकम पता कर सकता है | 
स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि पानी अगर हाथ में गिरे तो उसे पी सकते हैं,
नाली में गिर जाये तो पैर भी नहीं धो सकते हैं और सीप में गिर जाये तो मोती बन जाता है |
अर्थात् हम पानी हैं और हाथ, नाली, सीप ये सब हमारे आस पास के लोग |
हमारे आस पास के लोग ही सुनिश्चित करते हैं कि हमारी ग्रोथ कितनी होगी, किस प्रकार होगी, हमारा क्या मूल्य होगा |
हमारे आस पास चारों तरफ कई तरह की बिमारियाँ फैली हैं |
और इलाज दो तरह के होते हैं – Antiseptic और Prophylactic .
जब शरीर के अन्दर बीमारी हो जाती है तो डॉक्टर एन्टीसेप्टिक और एन्टीबॉयोटिक देकर ठीक करते हैं |
लेकिन जब बीमारी शरीर के बाहर आस पास के वातावरण में हो तो  Prophylactics दिया जाता है |
एक बच्चे को पोलियो की दवा दी जाती है, इसलिए नहीं कि बच्चे को पोलियो है
बल्कि दवा इसलिए दी जाती है कि पोलियो की बीमारी आस पास के वातावरण में है |
इसी तरह हमारे चारों ओर जो नकारात्मक सोच की बीमारी फैली हुई है
जो बचपन से हमारे अन्दर नकारात्मक और कमजोर भावनात्मक विचार भर रहे हैं |
इन्हें अपने दिमाग से निकाल फेंकना है और सकारात्मक सोच से अपने आप को इतना मजबूत कर लेना है कि नकारात्मकता दुबारा हमारे पास फटकने की हिम्मत भी न करे |
बचपन से ही हमें एकांत का अर्थ सिखाया गया है – तन्हा, अकेला |
मेंने कई बार महसूस किया है कि हम मध्यम वर्ग के लोगों को शिक्षा भी गलत अर्थों में दी जाती है |
यदि आपको मुम्बई में मैट्रो ट्रेन पकड़नी हो तो आप भीड़ के बीच में चले जाईये, लोग आपको धक्का देकर ट्रेन में बैठा देंगे |
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सभी को ट्रेन में बैठना होता है |
सभी का एक ही लक्ष्य होता है ट्रेन पकड़ना |
अब एकांत का सही अर्थ समझते हैं – एकांत का अर्थ होता है जिनका एक ही अंत हो, एक ही  goal  हो, एक ही लक्ष्य हो |
ऐसे लोगों की भीड़ में शामिल होने से आपको  push back , साहस और. मार्गदर्शन मिलता है और लक्ष्य प्राप्ति के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ता है 

 

मेहनत तो तब करना पड़ता है जब हमारे आस पास के लोग वो नहीं कर रहे होते हैं जो हम करते हैं |
इसलिए ऐसे लोगों के बीच जाइये जिनका अंत आपके अंत से मेल खाता हो |
स्वयं को जीनियस और सफल लोगों के बीच रखिये |
ये आपको भी सफल और जीनियस बना देंगे |
स्वयं को सुन्दर और सुडौल बनाने पर आज के युवाओं का ज्यादा फोकस रहता है |
इस पर ढेर सारा  invest  किया जाता है |
शरीर पर  invest तो पशु भी करता है | यदि सफल होना चाहते हैं तो अपनी बुद्धि पर invest करिये |
अपनी मानसिक स्थिति को मजबूत करिये |
इसके लिए हमेशा सीखने के लिए तैयार रहिये |
हम अपने आस पास के लोगों की मानसिकता को नहीं बदल सकते हैं | ये हमारे मित्र, पड़ोस या रिश्तेदार कोई भी हो सकते हैं |
लेकिन चुनाव हमारे हाथ में है | हम लोगों को अपने जीवन से अलग कर सकते हैं |
नये लोगों को जीवन में ला सकते हैं और सफलता की ओर कदम बढ़ा सकते हैं |
👉नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के जीवन में हर समाधान में भी समस्या है |
👉सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति के जीवन में 99 समस्याओं में भी समाधान है |
👉आदमी विकलांग शरीर से नहीं मन से होता है | अगर मन से विकलांग हो गया तो हमेशा के लिए विकलांग हो गया |
दोस्तों, आपको ये प्रेरक , motivational पोस्ट सफलता के नये  सूत्र कैसी लगी | अपने बहुमूल्य विचार कमेंटस बॉक्स में जरूर बतायें |
इससे मेरा हौसला बढ़ता है | इसे लाइक और फेसबुक व व्हाट्स एप पर शेयर करके अन्य साथियों तक भी मेरी बात पहुंचाने का कष्ट करें |

आपका —— प्रमोद कुमार 

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About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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