एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स ( TIPS FOR IMPROVE CONCENTRATION AND MEMORY )


एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स ( Tips for improve Concentration and Memory )

एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टीप्स ( Tips for improve Concentration and Memory ) कई स्टूडेंट ने मुझसे पूछा कि एकाग्रता को कैसे improve करें, memory को कैसे बढ़ायें |
उन्हीं स्टूडेंट से प्रेरित होकर आज की पोस्ट उन सभी स्टूडेंट्स को समर्पित कर रहा हूँ, जिनको इसकी सख्त जरूरत है |
आप एक स्टूडेंट हैं, एक गृहणी हैं, एक बिजनेस मेन हैं, एक worker हैं, CEO ( Chief Executive Officer ) हैं,
Doctor हैं, Lawyer हैं, Leader हैं, Vice President हैं, कोई भी हों फर्क नहीं पड़ता |
सभी को एकाग्रता और  memory improvement की आवश्यकता होती है |
इस पोस्ट में तीन सिद्धांत आपको बताऊँगा जो आपकी memory बढ़ाने में कारगर साबित होंगें |
हमारे शरीर में पाँच इन्द्रियों हैं – आँख, कान, नाक, जिह्वा और त्वचा |
इन पाँच sense organ से data हमारे शरीर में प्रवेश करता है |
इन data को चेतन मस्तिष्क ( Conscious mind ) ग्रहण करता है |
यहाँ ये समझना जरूरी है कि data कौनसा प्रवेश करता है, क्यों प्रवेश करता है, क्यों रजिस्टर होता है और कब mind उसे बाहर निकालता है |
conscious mind कैसे data को इस्तेमाल करता है |
एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स ( TIPS FOR IMPROVE CONCENTRATION AND MEMORY )यदि मैं आपसे पूछूँ कि शाम को जब आप बाजार घूमने गये तो आपने कितनी गाड़ियाँ देखीं,
किस रंग की देखी, कितने बिल्डिंग आये, बिल्डिंग में कौन खड़ा था |
आपको याद नहीं होगा | आप
किसी मित्र के घर गये तो उस घर में कितनी सीढ़ियाँ थी, टेबल पर कितनी किताबें रखी थी,
आपको याद नहीं रहता, क्यों ?
क्योंकि आपके conscious mind ने इन सबको रजिस्टर नहीं किया था |
आपके conscious mind ने रजिस्टर क्यों नहीं किया |
इसे समझ गये तो आप memory improve के सिद्धांत को समझ जायेंगे |
पहला सिद्धांत ( Principle ) है –

1.असामान्य, अजीब (unusual)

एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स (TIPS FOR IMPROVE CONCENTRATION AND MEMORY )
आप जो ये इमेज देख रहे हैं, मान लीजिए ऐसी स्त्री आपको कहीं सड़क पर दिखाई दे जाये तो
ये आपको सारी ज़िन्दगी याद रहेगी |
एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स ( Tips for improve Concentration and Memory )
इसी तरह कोई आदमी साईकिल के साथ पेड़ पर चढ़ रहा हो तो ये भी आपको जिन्दगी भर याद रहेगी क्योंकि ये सब असामान्य हैं |
किसी जंगल में बाघ और बकरी एक साथ खेल रहे हों तो ये अजीब सी बात है | ऐसा दृश्य आपको ज़िन्दगी भर याद रहता है |
इसी प्रकार असंतुलित अनुपात भी हमें सरलता से याद रहता है |
जैसे यदि किसी ट्रक मालिक को ट्रांसपोर्ट कम्पनी फोन करके बुलाये और
दिल्ली से कलकत्ता के लिए 5 किग्रा सामान ट्रांसपोर्ट से भेजे तो ट्रक मालिक को ये ज़िन्दगी भर के लिए याद रहता है |
बहुत बड़े धार्मिक अनुष्ठान में 100-200 ग्राम प्रसाद चढ़ाया जाये |
किसी व्यक्ति द्वारा बड़े पात्र में ढेर सारा खाना खाते हुए देखना, ये सब हमेशा जिन्दगी भर के लिए याद रहता है |
इसका मतलब हुआ अजीब और असामान्य दिखने वाली चीजें conscious mind में जाकर संस्कार बना देती हैं
और memory bank में इसे आसानी से ढूँढ़ा जा सकता है |
अर्थात् अजीब चीजों को याद करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती हैं |
इसी सिद्धांत को हम memory improve करने में ,एकाग्रता बढ़ाने में इस्तेमाल कर सकते हैं |
आप जिस चीज को याद करना चाहते हैं उसे अजीब सा नाम दे दीजिए या कुछ छोटा या बहुत बड़ा कर दीजिए,
शॉर्टकट बना लीजिए, कुछ अजीब तस्वीर दिमाग में create करिये जो mind में जाकर संस्कार बन जायेगा |
और जब बुद्धि को इसकी जरूरत पड़े तो तुरंत खोज निकाले |
कुछ उदाहरण आपको बता रहा हूँ जिसमें कुछ अजीब वाक्य बनाये गये हैं इन्हें mind में store करके
याददाश्त में बदला जा सकता है और आपका mind अभ्यस्त हो जायेगा इस तरह के creation करने में |
” राजू की राधा जाकर गिरी फखरूद्दीन रेड्डी की जेल में तब रमा शंकर नारायणन की कलम से प्रतिभा निकली प्रणब की “
आपने जो वाक्य पढ़ा, इस वाक्य से भारत के सभी राष्ट्रपति के नाम क्रम से याद रखा जा सकता है |
राजू –           डॉ राजेन्द्र प्रसाद
राधा –             सर्वपल्ली राधा कृष्णन
जाकर –              डॉ जाकिर हुसैन
गिरी –                     वी वी गिरी ( वाराह वेंकट गिरी )
फखरूद्दीन –          फखरूद्दीन अली अहमद
रेड्डी –                     नीलम संजीव रेड्डी
जेल –                  ज्ञानी जेल सिंह
रमा –                 रमा शंकर वेंकटरमन
शंकर –               शंकर दयाल शर्मा
नारायणन –         के आर नारा़यणन
कलम –                    ए पी जे अब्दुल कलाम
प्रतिभा –                    प्रतिभा पाटिल
प्रणब –                         प्रणब मुखर्जी
गणित के सूत्र याद करने के लिए —
🔵नौकरी के चक्कर में, गँवा दिया व्यापार
वृत्त का क्षेत्रफल पाई आर स्क्वायर ( πr² )
🔵ना किसी से दोस्ती ना किसी से प्यार
वृत्त की परिधि टू पाई आर ( 2πr)
🔵मिला ना खुदा, न मिला प्यार
वर्ग का क्षेत्रफल भुजा स्क्वायर ( भुजा ² )
🔵मारे है भईया मोहे, मारे भौजाई
आयत का क्षेत्रफल लम्बाई गुणा चौड़ाई
🔵प्यार में धोखा है और है जुदाई
त्रिभुज का क्षेत्रफल ½×आधार ×ऊँचाई
इसी तरह साइंस में इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन के खोजकर्ता के नाम को याद रखने के लिए वाक्य बना सकते हैं – ईंट पर नाच
( ईंट ) इलेक्ट्रॉन – टॉमसन
( पर ) प्रोटोन – रदरफोर्ड ( कई पुस्तक में गोल्डस्टीन )
( नाच ) न्यूट्रॉन – जेम्स चैडविक
हत्या को अँग्रेज़ी में assassination कहते हैं | बच्चों को spelling याद करने में दिक्कत होती है तो इसका तरीका निकाल सकते हैं |
गधे पर गधा, उसके ऊपर मैं और मेरे ऊपर पूरा देश – ass + ass + I + nation.
Mind की ये विशेषता होती है कि वह अद्भुत, अजीब चीजों को बड़ी आसानी से याद कर लेता है |
एकाग्रता की प्रॉब्लम नहीं होती है |
इस तरह कुछ चीजों को जोड़कर, picturise करके, Visualise करके हम आसानी से किसी भी विषय को याद कर सकते हैं |

2. अद्भुत अनुभव ( अच्छा या बुरा )-

अगर आपसे पूछें कि आपके जीवन का सबसे अच्छा दिन कौनसा था तो आपका जवाब होगा –
जब आपको अवार्ड या रिवार्ड मिला था या प्रमोशन मिला था या जॉब मिली थी |
एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के टिप्स ( Tips for improve Concentration and Memory )
ये आपको हमेशा याद रहती है |
आपसे यह पूछा जाये कि आपका सबसे खराब दिन कौनसा था तो कहेंगे जब आपका अंतरंग घनिष्ठ मित्र बिछुड़ा था,
या दोस्तों के सामने अपमानित होना पड़ा था | इस तरह ऐसे अनुभव जो या तो बहुत अच्छे हों या बहुत खराब हों ,हमेशा याद रहते हैं |
इसके लिए परिश्रम नहीं करना पड़ता है |
हमारा मन स्थाई याददाश्त ( संस्कार ) कैसे बनाता है |
मन संस्कार बनाता है द्वैत ( dualities ) के कारण |
बहुत सुख या बहुत दुख याद रह जाती है, बहुत मान या बहुत अपमान याद रह जाता है, कोई बहुत अच्छी और बहुत बुरी चीज याद रह जाती है |
बहुत सर्दी या बहुत गर्मी याद रह जाती है |
तो हमारा दिमाग dualities को तुरन्त ग्रहण कर लेता है |
जिससे हमारा विचार, आचार व्यवहार बनता है, जो संस्कार में बदल जाता है |
अगर आप किसी चीज को याद करना चाहते हैं तो उसे अपने अच्छे या बुरे अनुभवों के साथ जोड़िये तो याद करना आसान हो जाएगा |

3. लक्ष्य (goal )का जुनून –

अगर आपके conscious mind ने goal की clear picture बना ली है, उसकी पहचान कर ली है,
उसे अपने emotion से जोड़ लेते हैं, उसे कसकर पकड़ लेते हैं तो जब भी data
आपके अन्दर sense organ से प्रवेश करेगा तो conscious mind देखेगा मेरे काम का है या नहीं है |
अगर सूचना goal achieve करने में सहायक है तो तुरंत capture कर लेगा |अगर
goal achieve में सहायक नहीं है तो छोड़ देगा |
अगर conscious mind के पास goal की clear picture होगी तो वह खुद decision ले लेगा कि कौन – कौनसे data काम के हैं |
इस प्रक्रिया में conscious mind में केवल वे data store होंगे जो goal achieve करने में काम आयेंगे,
बाकी सब छूटते चले जायेंगे |
एक उदाहरण से इसे समझिये – जिस विषय में आपकी रूचि ज्यादा होती है उसे याद करना आसान होता है
और जिस subject में आपकी रूचि नहीं है, एकाग्रता नहीं बन पाती है, बोरियत होती है उसे याद करना कठिन होता है |
इसका कारण होता है conscious mind ने interested subject को goal बनाकर पकड़े हुए है |
जैसे ही कोई data आता है mind काम के data को select करके पकड़ लेता है और बाकी को छोड़ देता है |
Mind में सारे data रजिस्टर होने लग जासे तो आप पागल हो जायेंगें |
Mind सभी data को रजिस्टर नहीं करता है |
यह केवल तीन तरह के data को ही रजिस्टर करता है |
पहला जो बहुत अजीब हो वो याद रह जाती है |
दूसरा जो हमारे अच्छे या बुरे अनुभव ( emotions ), सुख दुःख से जुड़ा हो वो याद रह जाता है |
तीसरा जो आपके goal के साथ जुड़ा हो वो याद रह जाता है |
इन तीनों उपायों को अलग – अलग या एक साथ उपयोग करके आप अपनी एकाग्रता और memory बढ़ा सकते हैं |
दोस्तों, अगर पोस्ट आपको समझ आई हो, पसंद आई हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें
जिससे कोई भी इसका लाभ लेने से वंचित न रह जाय | देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए यह अत्यन्त जरूरी है |

आपका —– प्रमोद कुमार

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About PRAMOD KUMAR

मेंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन राजस्थान में कम्पलीट किया |इसके बाद B. Ed कर्नाटक से किया | लेखन की चाह बचपन से ही थी, कॉलेज आते आते इसमें कुछ निखार आ गया |कॉलेज में यह स्थिति थी कि यदि कोई निबंध प्रतियोगिता होती और उसमें मेरे शामिल हो जाने से प्रतियोगिता दूसरे और तीसरे स्थान के लिए रह जाता | वापस राजस्थान आने पर अपना विद्यालय खोला ,सरकारी शिक्षक बनकर त्याग पत्र दे दिया |बिजनेस में एक सम्मानित ऊँचाई को पाकर धरातल पर आ गया |अब अपने जन्म स्थल पर कर्म कर रहा हूँ, जहाँ शिक्षा देना प्रमुख कर्म है | बचे समय में लिखने का अपना शौक पुरा करता हूँ |

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