मानव व्याधियां:कारण और निवारण

मानव व्याधियां कारण और निवारण 

मानव व्याधियां कारण और निवारण नामक इस

लेख के पहले आपके सामने इस लेख का पहला भाग,

“मानव स्वास्थ्य और रोग नाम से प्रस्तुत किया जा चुका है।”

प्रस्तुत लेख मानव व्याधियां कारण और निवारण उसी का दूसरा भाग है,

जिसमें, कुछ  ऐसे  मानव  रोगों के बारे में चर्चा की गई है  जो आम जिंदगी में,

हर व्यक्ति को अपने लपेटे में कहीं न कहीं ले ही लेते हैं।

इन कुछ खास रोगों की पहचान क्या है, इनका वास्तविक कारण क्या है?

इनका प्राथमिक और औपचारिक उपचार क्या है?

इन्हीं सब जानकारियों के साथ इसे यहां पर प्रस्तुत किया जा रहा है,

आशा है, आप लोगों को मेरा यह प्रयास जरूर ही पसंद आएगा।

तो आइये चलते हैं आज के अपने इस खास लेख की दुनिया में :

मधुमेह

 

मधुमेह  नामक व्याधि, अथवा रोग या बीमारी को हम डायबिटीज मेलिटस भी कहते हैं।

यह  बीमारी  शरीर में  शर्करा अर्थात  ग्लूकोज की मात्रा जरूरत से अधिक बढ जाने के कारण होती है।

इसे हम इस तरह भी कह सकते हैं कि जब रक्त में इंसुलिन की कमी हो जाती है,

तो हम इस अवस्था को सुगर, डायबिटीज अथवा मधुमेह कहते हैं।

विदित हो कि इंसुलिन नामक हार्मोन का निर्माण 

हमारे शरीर में आग्न्याशय नामक अंग में होता है।

यह निर्माण वास्तव में आग्न्याशय में लैंगरहैंस की

द्वीप शिखाओं की बीटा कोशिकाओं में ही सम्पन्न होता है।

यह हार्मोन हमारे शरीर में रक्त में अत्यधिक शर्करा

को संचित ग्लाइकोजीन में बदल देता है, जो यकृत कोशिकाओं में जमा होता है।

अत्यधिक प्यास लगना, बार बार पेशाब आना, मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।

मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन,

यथा आलू, चावल आदि  से भरसक परहेज करना चाहिए।

साथ ही साथ इसके प्रभाव से बचने के लिए मरीज को इंसुलिन का टीका भी लगवाना चाहिए।

चीनी से बने पदार्थ बिलकुल ही नहीं प्रयोग करना चाहिए।

व्यायाम आदि जैसे टहलने आदि की कोशिश भी करनी चाहिए।

तपेदिक यानी टीबी की बीमारी 

तपेदिक यानी टीबी की बीमारी को राजयक्षमा भी कहते हैं,

या फिर कभी-कभी इसे हम क्षय रोग भी कह कर काम चलाते हैं।

तपेदिक एक जीवाणु जनित रोग है जो कि हमारे शरीर में,

माइक्रो बैक्टरीयम  ट्यूबर कोलोसिस नामक एक जीवाणु के द्वारा प्रवेश करता है।

टीबी एक संक्रामक रोग होता है, जो कि लसिका

ग्रंथियों या फिर रक्त दान प्रक्रिया के फलस्वरूप फैलता है।

इस रोग में हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग यानी फेफड़ा प्रभावित होता है।


इसका रोगी यदि कहीं थूंकता है तो इससे भी यह फैलता है।

बार बार बुखार आना, खांसी लगातार बने रहना, भूख न लगना,

रात में सोत सोते अत्यधिक पसीना आना, साथ

शारीरिक शक्ति घटना और वजन में कमी होना,

पाचन तथा तंत्रिका संबंधी व्याधियां होना इसके महत्वपूर्ण लक्षण हैं।

इसकी रोकथाम के लिए बैसिलस कैल्मेट गुरिन यानी बीसीजी का टीका लगाया जाता है।

इसके उपचार के लिए एक इंजेक्शन भी लगाया जाता है जिसका नाम है स्टरेप्टोमाइसिन।

आइसियोनियाज्ड नामक खाने की दवा भी हम मरीज को देते हैं। 

कुष्ठ रोग क्या क्यों कैसे 

मानव व्याधियों में यह सबसे ज्यादा मानव जीवन को प्रभावित करने वाली व्याधि या बीमारी है।

इसे आम भाषा में, हम सब कोढ़ भी कहते हैं जो एक जीवाणु जनित रोग है।

यह रोग माइक्रोबैक्ट्रियम लेप्री नामक जीवाणु से पैदा होता है।

कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, इसे लम्बे समय

तक रहने वाली मानव व्याधियों की श्रेणी में रखा जाता है।

कुष्ठ रोग के कारण मानव शरीर में ऊतकों का नष्ट होना प्रारंभ हो जाता है।

फलस्वरूप शरीर के विभिन्न हिस्सों में चकत्ते उभर आते हैं।

इस बीमारी से कलाई, कोहनी, एड़ी आदि शरीर के अंग प्रभावित होने लगते हैं।

कुष्ठ रोग का अभी तक सफलतम ईलाज पूरे विश्व में नहीं है।

यह बीमारी मानव जाति की एक ऐसी बीमारी है

जो किसी भी व्यक्ति को समाज तक से काट देती है।

इस रोग के रोकथाम हेतु स्फैमिसीन इसके साथ

क्लोफाजीमीन तथा डेपसोन नामक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। 

निद्रा रोग क्या है 


इस मानव व्याधि का दूसरा नाम स्लीपिंग सिक – नेस भी है।

यह बीमारी  निद्रा रोग, नार्कोलेप्सी ट्रिपैनोसोमा ब्रुकी नामक प्रोटोजोआ के कारण होती है।

यह एक परजीवी पैरासाइट है जो सीसी नामक मक्खियों में पाया जाता है।

इसी मक्खी के काटने से व्यक्ति निद्रा रोग से पीड़ित हो जाता है।

इस रोग के कारण मानव शरीर में लसिका ग्रंथि बढ़ जाती है।

फल शारीरिक तथा मानसिक  निष्क्रियता पैदा हो जाती है।

पूरे दिन अत्यधिक तेजी से नींद आना तथा निरंतर याददाश्त में कमी होना भी इसके लक्षण हैं।

कीटनाशक दवाओं का छिड़काव इस खासरोग के रोकथाम के लिए एक कारगर उपाय है।

ट्रिपर्सेमाइड का इंजेक्शन  भी इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को लगाया जाता है। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 08072018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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