जीतने वाले में यह लक्षण होते हैं

जीतने वाले में यह लक्षण होते हैं 

जी हां दोस्तों, जीतने वाले में यह लक्षण होते हैं।।। आप कहेंगे कौन लक्षण होते हैं।

तो मैं आप से कहूंगा जरा धैर्य रखिए आप को विजेता के, 

एक एक लक्षण बताए जाएंगे लेकिन जरा ठहर कर।

विजेता आपके आसप ही होते हैं, जरूरत बस इस बात की होती है कि,

आप में उसे पहचानने की शक्ति या संभावना होनी चाहिए।।

खैर, मैं अपनी बात पर पुनः आता हूँ और आपको जिंदगी में,

जो जीतने वाले आदमी होते हैं, तो उनके लक्षणों के बारे में बताता हूँ।

पर जरा ठहरिए पहले आपको एक बेहद खास व महत्वपूर्ण कहानी सुनाता हूँ। 

एक था बहुत ही बड़ा हाथी

एक बार की बात है किसी गांव से एक आदमी गुजर रहा था।

अचानक उसकी निगाह एक हाथी पर पड़ी,  उसने देखा एक विशाल काय हाथी एक खूंटे से बंधा है।

ताज्जुब की बात यह थी कि हाथी बेहद ही पतली रस्सी से बांधा गया था। उ

स व्यक्ति को लगा इस रस्सी को तो कोई नादान

पशु ही तोड़कर खुद को बंधन मुक्त कर सकता है

लेकिन यह हाथी  राजा बजाए ऐसा कुछ करने के अपने मालिक की गुलामी का एहसास कर रहा है।

व्यक्ति से रहा न गया तो उसने उस हाथी के पास जाकर मालिक से बात की।

व्यक्ति ने पूछा भाई, हाथी तो विशालकाय जानवर है, यह चाहे तो एक क्षण में रस्सी तोड़ सकता है।

लेकिन हाथी ऐसे सहमा खड़ा है जैसे वह लोहे की जंजीरों से जकड़ा हो ऐसा क्यों?

उस हाथी के मालिक ने बताया कि यह जब हाथी छोटा था, 

तभी से मैंने इसे रस्सी से बांधना प्रारंभ कर दिया था ।

 तब यह इतना छोटा था कि यह रस्सी और खूंटे को चाहकर भी उखाड़ नहीं पाया।

धीरैे धीरे हाथी को यह विश्वास हो गया कि अब मैं इस बंधन से कभी आजाद नहीं हो सकता।

इस लिए फिर इसने अपनी इसी सोच के कारण इस तरह का प्रयास भी कभी नहीं किया।

आज यह हाथी एक विशालकाय जानवर बनने के बाद भी,

अपने दिमाग में घुसी झूठी बात के कारण इस बंधन से मुक्त होने की कोशिश नहीं करता। 

हाथी और मनुष्य की कहानी 

हाथी और मनुष्य की कहानी यह है कि जब मनुष्य

अपने जीवन में शुरुआत में ही असफल हो जाता है तो,

उसे लगने लगता है कि कुछ भी हो यह सफलता आसान नहीं है।

धीरे धीरे यही विश्वास उसके मन में दृढ हो जाता है।

अंत में स्थिति यह आती है कि आदमी प्रयास ही करना छोड़ देता है।

यही आदमी एक दिन अपनी गरीबी, मजमूरी को अपनी थाती मान लेता है।

इसी तरह से संसार में हजारों आदमी धीरे धीरे एक दिन शिथिल होकर नियति के सहारे रहने लगते हैं।

कहानी इतिहास की कुछ ऐसी है 

इतिहास को सीखने का साधन भी कहा जाता है।

अर्थात हमने आदमी और हाथी की जो असमर्थता की कहानी पढी है,

उससे अलग हुआ जा सकता है या फिर जिंदगी में

असफलता इस कहानी के दलदल से निकलाा भी जा सकता है।

समर्पण और दृढता के साथ चुनौतियों को बाधा न

मानकर यदि हम उनका स्वागत करते हुए विश्वास

को अपनी पूंजी बना लें तो सफलता कदम भी चूम सकती है।

किसी ने, यह बात बिल्कुल ही सही कही है कि हम

समस्या को हल करने की बजाय अधिकांश समय और ताकत उससे जूझने में ही लगा देते हैं।

इतिहास में अनेक लोग असफल रहे हैं तो अनेकों अनेक लोग सफल भी रहे हैं।

इतिहास में ऐसे, लोगों की कमी नहीं है, जिन्होंने जीवन में,

विराट असफलताओं के बीच ही सफलता का स्वाद चखा है। 

कहानी हेनरी फोर्ड की 

हेनरी फोर्ड जिनको पूरी दुनिया, फोर्ड कंपनी के

संस्थापक के तौर पर भी जानती है, इनके जीवन की कहानी अद्भुत है।

हेनरी का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था।

इनके पिता विलियम फोर्ड अपने खेतों के पास ही घर बनाकर रहते थे।

फोर्ड के परिवार में माता तथा छह भाई बहन थे जो मिशिगन यूएसए में रहते थे।

गरीबी के कारण हेनरी फोर्ड की पढ़ाई स्कूल में नहीं हो सकी,

पर आश्चर्य यह कि जनाब हेनरी जी का सपना एक आटोमोबाइल कंपनी खोलने का था।

और यह भी आश्चर्य की बात है कि वे अपने सपने को पूरा करने के लिए जीवन भर लगे रहे।

उन्होंने खेती की, कई कंपनियों में काम भी किया

यहां तक कि ज्यादा कमाई के चक्कर में नौकरी के साथ ही पार्ट टाइम काम भी किया।

हेनरी फोर्ड ने 1893 में दुनिया की पहली स्वचा कार बनाने में कामयाबी हासिल की थी।

इन्होने कार का प्रदर्शन भी किया लेकिन कार का परिचालन असफल रहा।

कार को बाजार में लाने के लिए पूंजी चाहिए थी जो इनके पास नहीं थी।

कुछ दिन बाद मर्फी नामक उद्योग पति ने निवेश

की स्वीकृति दी लेकिन दो साल उसने पूंजी वापस लेली। फोर्ड का सपना लड़खड़ गया।

पर हार नहीं मानी और 1903 में फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की।

कुछ कारें बनाने के बाद इन्हें लोकप्रियता मिलने लगी।

और अंतत:इन्हें ऐसी सफलता मिली कि लोग देखते ही रह गए।

कारों के पितामह कहलाने वाले फोर्ड आज सफलता का पर्यायवाची बन चुके हैं। 

शायद किसी ने ठीक कहा है कि, “जो मजबूत होते हैं वे वही करते हैं जो उन्हें करना होता है” 

जीतने वाले में यही लक्षण होते हैं 

धन्यवाद

KPSINGH 11072018

 

 

 

 

 

 

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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