समलैंगिकता की कहानी

समलैंगिकता की कहानी 

समलैंगिकता की कहानी अवैध और अनैतिक है।

यह बात कहने के पहले मैने सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया की पड़ताल नहीं की है 

और न ही मैंने किसी महापुरुष से सलाह लिया है ।

सच यह है कि मैं जो कुछ भी कहना चाहता हूं वह मेरी अंत:प्रेरणा है ।

क्योंकि मुझे लगता है कि इस प्रकृति से बड़ा न्यायाधीश कोई नहीं होता।

और प्रकृति की गाइड लाइन के समलैंगिकता सर्वथा भिन्न है ।

इसे केवल भिन्न कहना शायद अन्न्याय है क्योंकि समलैंगिकता पूरी तरह से असंगत  अवैध और अनैतिक है । 

आखिर मामला क्या       है? 

समलैंगिकता की कहानी अवैध और अनैतिक है।

दोस्तों, आज हम समलैंगिकता विषय पर विचार करने वाले हैं।

आप में से बहुत लोगों को पता होगा कि धारा 377 का संबंध समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने से है ।

इस धारा 377 पर एक नहीँ बल्कि कई बार हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में बहस हो चुकी है।

जब दो समान लिंग के लोग आपस में संबंध बनाएं तो वह समलैंगिक संबंध कहलाते हैं।

इसे पहले लंबी प्रतीक्षा के बाद अपराध की श्रेणी से निकाल दिया गया था, 

लेकिन दिसम्बर 2013 में अदालत ने इस निर्णय को पलट कर इसे अपराध ही माना था।

इस पर तमाम समलैंगिक संबंध प्रेमियों ने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें अपनी निजता को स्वीकार करने दिया जाए।

चूँकि यह मामला एक व्यापक मामला है अतः इसके महत्व को देखते हुए 

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ इसकी इस प्रश्न पर सुनवाई करना चाहता है,

कि यह सचमुच एक अपराध है या इसे अपराध की श्रेणी से बाहर निकाल देना चाहिए?? 

  समलैंगिकता की   अपनी कहानी क्या     है? 

समलैंगिकता की कहानी अवैध और अनैतिक है।

सच कहें तो समाज में नैतिकता बनाम समलैंगिकता की बहस बेहद पुरानी है।

कुछ सालों पूर्व  दिल्ली हाई कोर्ट ने दो समान लिंगी लोगों के बीच,

एकांत में बनाए गए संबंधों यानी समलैंगिक संबंधों को वैध घोषित किया था।

इसे समलैंगिक लोगों ने अपनी जीत मानी थी।

लेकिन बाद में 11दिसम्बर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंगत, अवैध और अनैतिक घोषित कर दिया था। 

क्या है समलैंगिकता और धारा 377

समान लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाले स्त्री और पुरुष को समलैंगिक कहा जाता है।

समलैंगिकता . अवैध और अनैतिक है ।

जहां तक धारा 377 की बात है तो इसे इस प्रकार समझने की कोशिश करें।

“18 साल से अधिक उम्र का कोई भी महिला या पुरुष स्वेच्छा से,

आपस में या फिर जानवरों आदि से यदि अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता है तो उसे आजीवन या 10 साल तक के कारावास का प्रावधान है।

इस कानून के इतिहास की बात करें तो समलैंगिकता के खिलाफ कानून अंग्रेजों ने 155 साल पहले बनाया था।

अंग्रेजी सरकार ने सन् 1861 में धारा 377 लागू किया था।

इस कानून में पहली बार संशोधन तब किया गया था जब 1935 में इसका दायरा बढाया गया था। 

भारत और विश्व में  समलैंगिक 

9 जनवरी 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस समय समलैंगिक लोगों की आबादी 2500000 यानी 25 लाख है।

इस समय दुनिया के जिन देशों में यह कानून लागू है उनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं 

डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, बेल्जियम  कनाडा  नीदरलैंड  स्पेन, दक्षिण अफ्रीका  और अमेरिका के कुछ राज्य। 

भारत में समलैंगिकता  का   पहला मामला 

समलैंगिकता की कहानी असंगत, अवैध और अनैतिक है,

बावजूद इसके भारत में समलैंगिकता का पहला मामला 1925 में सामने आया था। 

अविभाजित भारत में खानू बनाम सम्राट  समलैंगिकता का पहला मामला माना जाता है ।

इस महत्वपूर्ण मामले में जो निर्णय दिया गया वह अद्भुत है।

इस मामले की सुनवाई बाद जो निर्णय दिया गया था वह यह है कि,

चूंकि यौन संबंध का उद्देश्य संतानोत्पत्ति है और समलैंगिक संबंधों में संतानोत्पत्ति संभव नहीं है इसलिए इसका समर्थन असम्भव है। 

भारत में आह से आहा तक समलैंगिकता 

समलैंगिक संबंध असंगत, अवैध और अनैतिक हैं

🔴 बावजूद इसके कुछ लोग इसे बनाए रखना चाहते हैं।

🔴2001 में नाज फाउंडेशन ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करके ऐसे संबंधों की वकालत की थी ।

🔴2009 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे वैध रूप दे दिया।

🔴लेकिन जल्द ही इसे 11 दिसंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया था ।

🔴2004 में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर हुई थी ।

🔴यह विचारणीय है कि 2016/2013 के अपने ही निर्णय पर पुनर्विचार करने को तैयार हो गया था।

🔴वर्तमान में वही सुनबाई  होकर निर्णय सुरक्षित कर लिया है सुप्रीम कोर्ट ने,

अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या कब और कैसे आता है? 

 

 

धन्यवाद

 KPSINGH   18072018 

 

 

 

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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2 Comments on “समलैंगिकता की कहानी”

  1. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय शिरोधार्य होता है | क्योंकि वहाँ निर्णय व्यक्तिगत भावना के आधार पर नहीं होता है बल्कि सामाजिक हित के आधार पर होता है |

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