हम प्यार किससे करें?

हम प्यार किससे   करें? 

यह बेहद रोचक और सोचनीय प्रश्न है कि आखिर हम प्यार किससे करें?

यह सवाल सिर्फ मेरा या आपका प्रश्न नहीं है बल्कि हर नई पीढ़ी के मन में पैदा होने वाला प्रश्न है 

क्योंकि चाहे लड़का हो या लड़की बदलते जीवन के परिवेश में कम से कम,

एक बार इस प्रश्न का सामना हम आप सबको करना पड़ता है ।

सच कहें तो जानना भी चाहिए क्योंकि आज का दौर केवल प्यार में जीने मरने का नहीं रहा।

आज जरूरत केवल प्यार भर की नहीं है बल्कि आज जरूरत 

जीवन की मूल भूत जरूरतों की भी है। 

पहले प्यार को जानें

हम प्यार किससे करें या किससे न करें,

मुझे लगता है इससे भी जरूरी यह जानना है कि आखिर प्यार वास्तव में कहते किसे हैं?

क्यों कि आज समस्या प्यार से नहीं है बल्कि प्यार के बाजार से है असली समस्या। 

सच कहें तो सवाल बड़ा ही स्वाभाविक है कि हम प्यार किससे करें।

इसका कारण यह भी कहा जा सकता है कि

चूंकि यह भी जानना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि आजकल, 

जिसे हम प्यार कहते हैं क्या वही सचमुच प्यार है? या प्यार का मतलब कुछ और ही है?

क्यों कि हम अक्सर यह भी सुनते हैं कि जमाना प्यार का दुश्मन है।

वहीं दूसरी तरफ हम यह भी सुनते हैं कि प्यार अद्भुत और अकल्पनीय एहसास भी है।

यहीं पर ठहर कर हमें कुछ  सोचने की जरुरत होती है कि

प्यार करने या न करने के पहले हम यह जान  लें कि प्यार आखिर होता  क्या है? 

प्यार हम इसको कहते हैं 

 

हम जमाने की बात करें तो हमें कभी कभी ऐसा महसूस हुआ करता है कि,

एक हम उम्र विपरीत लिंग के साथी का सानिध्य ही प्यार है।

अथवा एक जवान जोड़े का आपसी लगाव ही प्यार है ।

लेकिन नहीं दोस्तों,, जरा ठहरिए यह दोनों ही प्यार नहीं है। 

 प्यार के बारे में बात करें तो सुन लीजिये प्यार तो कुछ और ही होता है।

प्यार एक समर्पण होता है।

प्यार एक एहसास है जो बिना शर्त कहीं भी और कभी भी हो सकता है।

यह किसी हम उम्र विपरीत लिंग के लिए भी हो सकता है। 

तो यह किसी भी व्यक्ति के लिए दिल से निकलने वाली दुआ भी हो सकता है ।

क्योंकि प्यार कोई वस्तु नहीं है

बल्कि प्यार महज आपके दिल, स्वभाव या आदत का वह मानवीय पहलू होता है,

जो अपने एहसास मात्र से सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है ।

प्यार कोई आकर्षण नहीं बल्कि प्यार अपनी अंतरात्मा को भलीभांति जानने समझने की सात्विक प्रवृत्ति मात्र है। 

 

तो फिर प्यार किससे करें 

इस सवाल का बेहद अजीब जवाब है।

हम प्यार किससे करें का जवाब है कि हम प्यार अपने आप से करें  यही सर्वश्रेष्ठ है।

किसी और से प्यार करने से बेहद अच्छा है कि हम प्यार खुद से करें ।

इसका कारण मनोवैज्ञानिक है और वह यह है कि जब तक हम,

अपने आप से प्यार नहीं करेंगे तो तब तक हमें सचमुच ही,

प्यार की स्वाभाविकता का एहसास नहीं होगा।

दूसरी सच्चाई यह है कि जब तक हमें खुद ही प्यार का एहसास नहीं होगा,

तो भला हम किसी और के प्यार का एहसास कैसे कर लेंगे??

और जब तक हमें प्यार का एहसास नहीं होगा तो हम प्यार कैसे कर सकते हैं।

हां हम तब तक प्यार करने का नकली ढोंग जरूर कर सकते हैं ।

हम सच्चा प्यार किसी से तभी कर सकते हैं जब हमें खुद अपनी सकारात्मकता से लगाव होगा ।

क्योंकि यह ऊर्जा ही हमारा और हमारे संकल्प का सबसे बड़ा सत्य है। 

 

हम प्यार कब करें 

हम प्यार कब करें यह सवाल तब पैदा होता है जब प्यार स्वाभाविक नहीं बल्कि कृत्रिम होता है।

वर्ना प्यार की कोई उम्र या प्यार का कोई मुहूर्त नहीं होता।

कुछ लोग कहते हैं पहले अपना कैरियर संभालो, फिर प्यार के रास्ते में चलने की कोशिश करना।

जनाब ऐसा प्यार दो लोगों के बीच शारीरिक नजदीकी तो ला सकता है,

मगर ऐसा प्यार कभी मानसिक और आत्मीय लगाव नहीं ला सकता। 

 हमारा निष्कर्ष हमारा प्यार 

हमारा निष्कर्ष हमारा प्यार का तात्पर्य यह है कि सबसे पहले हमें,

अपने आप से प्यार करना चाहिए  ताकि हमें देश दुनिया और समाज की सच्चाई का एहसास हो सके। 

 

 

धन्यवाद

KPSINGH15062018 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

11 Comments on “हम प्यार किससे करें?”

  1. प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है।
    हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है।

  2. बहुत ही सुंदर रचना है सर ।
    हमारे समाज के हर ब्यक्ति को प्यार को समझने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *