भारत में गरीब किसे कहते हैं?

भारत में गरीब किसे  कहते हैं? 

भारत में गरीब किसे कहते हैं?

शायद आपको पता नहीं भारत में गरीबी परेशानी का सबब नहीं है

बल्कि भारत में गरीब किसे कहते हैं? 

इस बात का पता लगाना सबसे कठिन काम है।

राष्ट्पिता महात्मा गांधी गरीबी को हिंसा का सबसे खराब रूप कहते थे।

क्योंकि गरीबी आधुनिक समय और समाज में एक बदनुमा दाग के अलावा कुछ नहीं।

गरीबी से लडना और गरीबी को दूर भगाना ही

गरीबी को अपने से दूर रखने का सबसे सरल और उत्तम उपाय है ।

सच कहें तो गरीबी एक दुष्चक्र है, 

जिसके बारे में पता ही नहीं चलता है कि कब इस व्याधि ने आप से परिचय  किया

और फिर कब इसने आपको अपने दायरे में समेट लिया।

दोस्तों, आज की हमारी पोस्ट का उद्देश्य

भारत में गरीब किसे कहते हैं?

यह पता लगाना है इस लिए आइए इस पर भी विचार करें कि आखिर 

 

भारत में गरीब किसे कहते हैं? 

गरीब किसे कहते हैं? 

 

भारत में गरीब किसे कहते हैं?

अगर आपको इस सवाल का जवाब चाहिए तो आपको बता दें कि

भारत में गरीबी की वर्तमान गणना रंग राजन समिति की सिफारिशों से कई जाती है। 

जून 2014 में इस समिति ने गरीबी का नया पैमाना तैयार किया था ।

जिसके अनुसार ग्रामीण इलाकों के लिए

प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय 972 रुपये तय किया गया।

जबकि शहरी क्षेत्र के लिए यह राशि 1407 रुपए निर्धारित है।

इस पैमाने के अनुसार देश की 29.5% आबादी यानी

36.3 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे का जीवन जीने को अभिशप्त हैं।

अलग समिति का   अलग राग 

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एन सी सक्सेना के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया

जिसने अपनी सिफारिशों की अपनी लिस्ट सन 2009 में सौपी थी।

इस रिपोर्ट में कहा गया कि कैलोरी की मात्रा के आधार पर

देश की 50 % आबादी गरीबी रेखा से नीचे अपना जीवन काट रही है। 

इसी तरह संप्रग सरकार में सुरेश तेंदुलकर समिति ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

इस समिति की रिपोर्ट की पूरे देश में आलोचना हुई थी, जिसके अनुसार,

ग्रामीण इलाके का कोई व्यक्ति यदि रोजाना 27 रुपए 20 पैसे से अधिक कमा रहा है,

और इसी तरह यदि शहरी इलाके का कोई

व्यक्ति रोजाना 33 रुपये 30 पैसे कमा रहे हैं तो वे गरीब नहीं हैं ।

इसके अनुसार 2011/12 के दौरान देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 27 करोड़ या 21.9 % थी। 

गरीबी की अंतर्राष्ट्रीय रेखा क्या है?

जहां तक बात अंतरराष्ट्रीय गरीबी की सीमा रेखा की है तो

अंतर्राष्ट्रीय गरीबी का मानक यह है कि

जो व्यक्ति प्रति दिन 1 डालर से कम में अपना जीवन गुजार रहा है वह घोषित गरीब है।

इसे 2008 में विश्व बैंक ने बदल कर 1.25 डालर कर दिया था।

सामान्य रूप से गरीबी रेखा का निर्धारण करने में

एक औसत व्यक्ति द्वारा सालाना उपभोग किये जाने वाले

सभी जरूरी संसाधनों की लागत निकाली जाती है।

मांग आधारित इस दृष्टि कोण के तहत

एक दीर्घ जीवन जीने के लिए

जरूरी न्यूनतम खर्च का आकलन किया जाता है। 

क्या कहता है संयुक्त   राष्ट्र संघ? 

संयुक्त राष्ट्र संघ कहता है कि विकल्पों और अवसरों का अभाव ही गरीबी है ।

गरीबी मानव आत्म सम्मान का उल्लंघन है।

इसका मतलब समाज में प्रभावकारी रूप से भागीदारी करने वाली मूल क्षमता का अभाव होना है ।

इसका मतलब किसी के पास संसाधनों का इतना कम होना है कि

वह न तो परिवार को भरपेट भोजन कराने में सक्षम है और न ही

उनके तन ढकने में सक्षम है। 

इसका मतलब असुरक्षा  लाचारी, और बहिष्कार होता है।

हिंसा के प्रति अति संवेदनशील होना,

एकाकी जीवन जीने या नाजुक माहौल में जीने को अभिशप्त होना होता है। 

विश्व बैंक के अनुसार गरीबी 

भारत में गरीबी किसे कहते हैं?

इस क्रम में हम यदि विश्व बैंक की बात करें तो विश्व बैंक के अनुसार,

“किसी को उसके हक से वंचित रखना भी गरीबी का एक रूप है।

इसमे कम आय और आत्म सम्मान से जीने के लिए

मूलभूत चीजों एवं सेवाओं को ग्रहण करने की अक्षमता शामिल होती है।

स्तरहीन शिक्षा और स्वास्थ्य,, स्वच्छ जल और साफ सफाई की खराब व्यवस्था,, अभिव्यक्ति का अभाव भी एक प्रकार की गरीबी है। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 26072018

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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4 Comments on “भारत में गरीब किसे कहते हैं?”

  1. विभिन्न संगठनों द्वारा गरीबी के अर्थ को भली भांति स्पष्ट किया गया है |

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