रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं

रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं

रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं

रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं

रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं

नमस्कार दोस्तो,मैं नन्द किशोर सिंह आज आपके लिए एक महत्वपूर्ण विषय लेकर आया हूँ, जिसमें आप जानेंगे –

रजोदर्शन क्या है?

एक महीने तक स्त्री के शरीर में एक प्रकार का रक्त इकट्ठा होते रहता है।

उसका रंग काला पड़ जाता है।

अन्ततः प्रत्येक महीने की एक निश्चित तिथि को वह खराब रक्त योनि मार्ग से बाहर निकलने लगता है।

इस प्रक्रिया को रजोदर्शन कहते हैं।रजोद

रजस्वला का क्या अर्थ है?

रजोदर्शन  से रजोनिवृत्ति के चार दिनों के मध्य -काल का समय रजस्वला कहलाता है।

ऋतुस्नाता का क्या तात्पर्य है तथा ऐसे स्त्री को क्या करनी चाहिए?

रजोनिवृत्ति के बाद चौथे दिन जब स्त्री विधिपूर्वक  स्नान करती है तो उसे ऋतुस्नाता कहते हैं।

ऋतुस्नाता स्त्री स्नान आदि  करने के बाद जिस पुरुष का प्रथम दर्शन करती है ,उस पुरुष जैसा ही उस स्त्री का संतान उत्पन्न होगा।

इसलिए ऋतुस्नाता स्त्रियों को प्रथम अपने पति के ही दर्शन करने का प्रयास करनी चाहिए।

रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य (अछूत) क्यों मानते हैं?

अछूत अर्थात् अस्पृश्य का अर्थ है जो स्पर्श करने योग्य न हो।

रजस्वला स्त्री के हाथ का जल भी पीना अपवित्र मानते हैं।

उसकी ऐसी स्थिति चार दिनों तक होती है।

रजस्वला स्त्री के छूने से दूध भी खराब हो जाता है।

इनके स्पर्श से जल भी संक्रमित हो जाता है।

रज दुर्गंध युक्त होता है जिससे स्वच्छ वस्तु भी संक्रमित हो जाता है।

कुछ लोग इसे दकियानूसी समझते हैं लेकिन वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इसे सही माना गया है।

ऐसे स्त्री के स्पर्श से तुलसी या फूल भी झुलस यानी मुरझा जाते हैं।

 

इन सब कारणों से ऐसे स्त्री को अस्पृश्य माना गया है।

रजस्वला स्त्री को कौन -कौन से कार्य नहीं करने चाहिए और क्यों ?इसका कारण क्या है?

  1. रजस्वला स्त्री को काजल नहीं लगाना चाहिए।धन्वन्तरि का कथन है ऐसा करने से संतान अंधा होता है।
  2. ऐसी स्त्री को तेल मालिश  नहीं करनी चाहिए,इससे संतान  कुष्ठ लिए जन्म लेता है।
  3. रजस्वला स्त्री के ज्यादा हँसने से काले होंठ तथा विकृत जिह्वा वाला संतान पैदा लेता है।
  4. ऐसी स्त्री के ज्यादा बोलने से बकवादी संतान पैदा लेता है।
  5. रजस्वला स्त्री के ज्यादा रोने से विकृत दृष्टि वाली संतान पैदा लेती है।
  6. ऐसी स्त्रियों के ज्यादा दौड़ने से चंचल स्वभाव वाला संतान जन्म लेता है।
  7. जो रजस्वला स्त्री तेज आवाज में संगीत सुनती हैं,उनकी संतान बहरी होती हैं।
  8. रजस्वला के अनुलेपन (उबटन) करने से संतान पीलिया से पीड़ित होता है।
  9. अधिक वायु के सेवन से संतान पागल जन्म लेता है।

 इन सब बातों के ऊपर जो ध्यान नहीं देते हैं,उनकी संतान विकृत रूप में जन्म लेते हैं और भाग्य को कोसते हैं।

इसलिए महिलाओं को जरूर इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

रजस्वला स्त्री  के साथ सम्भोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

(Rosemary is harmful to the women with health.)

इससे इहलोक में भी हानि है तथा परलोक भी बिगड़ता है।

तो दोस्तो,हमारा ये विचार आपको कैसा लगा ?आप काॅमेन्ट-बाॅक्स में बतायेंगे !

यदि अच्छा लगा हो तो जरूर लाइक व शेयर करेंगे।

धन्यवाद!

आपका स्नेही

नन्द किशोर सिंह

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वसुधैव कुटुम्बकम् की परिभाषा चरितार्थ करते हुए मनुष्य को सम्पूर्ण प्राणीजगत की सेवा करनी चाहिए।ऐसा करने से आत्मा परमात्मा से मिलकर अनन्त काल तक शाश्वत और सनातन सुख को प्राप्त करता है।

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11 Comments on “रजस्वला स्त्री को लोग अस्पृश्य क्यों मानते हैं”

    1. नमस्कार प्रमोद जी,
      आपने मुझे सराहा,इसके लिएन आपको कोटिसह धन्यवाद!
      लेकिन मैं उतना बढ़िया नहीं लिख पा रहा हूँ,आप सभी से थोड़ा-बहुत सीख रहा हूँ।

      1. नंद किशोर जी, जन्मजात कोई परफेक्ट नहीं होता है | निरन्तर अभ्यास ही परफैक्ट बनाता है | मैंने भी spllivelearning के साथ जुड़ने के बाद ही सबकुछ सीखा है | जितना भी सीख पाया हूँ, उतने में आपको किसी तरह की मदद की आवश्यकता हो और मैं आपके काम आ सकूँ तो मुझे प्रसन्नता होगी |

  1. यह पढकर बहुत सारी जानकारी मिली,
    धन्यवाद।

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