भारतीय राजनीति तू डाल डाल मैं पात पात

    भारतीय राजनीति           तू डाल डाल            मैं पात पात!!

भारतीय राजनीति तू डाल डाल मैं पात पात!!

दोस्तों ,तू डाल डाल मैं पात पात, 

भारत का एक बहुत ही प्रसिद्ध मुहावरा है। 

हिन्दी के लेखक अर्थ डा पृथ्वी नाथ पांडेय व हरदेव बाहरी  के अनुसार यह है कि,

” तू कितना भी चालाक और होशियार क्यों न हो मैं तुमसे

कहीं ज्यादा होशियार और चालाक हूँ”

आप सोच रहे होंगे चलो मुहावरे का अर्थ तो ठीक है समझ में आ गया है,

लेकिन इस मुहावरे का इस पोस्ट की हेडिंग से क्या संबंध है?

आखिर “भारतीय राजनीति तू डाल डाल मैं पात पात”

का क्या मतलब है ?

दोस्तों, अगर आपको इस पोस्ट का वास्तविक अर्थ या मतलब समझना ही है

तो आपको मेरे साथ पीछे चलना होगा।

ध्यान दें, यहां मैं अपने पीछे चलने के लिए नहीं कह रहा।

मेरे कहने का कुल जमा इतना ही मतलब है कि भारतीय राजनीति

तू डाल डाल मैं पात पात की अगर आपको असलियत जाननी है, 

तो भारतीय राजनीति के इतिहास में पीछे झांकना होगा।

विशेष कर उस काल खंड में जब भारत को आज़ादी तो मिल गई थी, 

लेकिन भारत को राजनीति का कोई सार्वजनिक अनुभव नहीं था।

राजे रजवाड़ों की रीढ़ तोड़ने  के बाद जब कांग्रेस ने अपनी चमकार बढाने के लिए

मुस्लिम और अनुसूचित जाति जनजाति की तुष्टिकरण का सहारा लिया था, 

तभी से हमारी राजनीति यानी भारत की राजनीति

तू डाल डाल मैं पात पात वाले मुहावरे को चरितार्थ करने लगी थी।

जवाहर लाल नेहरू से शास्त्री जी और फिर इंदिरा जी तक

यह सब अबाध गति से चलता रहा।

बीच में भले ही आपात काल की काली छाया आई लेकिन

20 सूत्री कार्यक्रम और फिर गरीबी हटाओ के नारे ने

इस डाल डाल वाले मुहावरे का वजन हल्का नहीं होने दिया।

इंदिरा जी की मौत के बाद

इसे राजीव जी से मनमोहन जी तक और दूसरी ओर

वीपी सिंह से मोदी जी तक यह बदस्तूर कायम है।

मजेदार बात यह है कि भारतीय राजनीति ने अब खुद को भी

इसी हिसाब से ढाल लिया है।

 जो भी सत्ता में आता है वह डाल डाल की बजाय खुद  को पात पात ही साबित करता है, 

और लाख चाहने के बाद भी नाकाबिल विपक्ष डाल डाल बस डोलता ही रहता है। 

वर्तमान परिदृश्य में तू डाल डाल मैं पात पात 

देखा जाए तो हाल की कुछ त्वरित घटनाओं ने भारतीय राजनीति को

तू डाल डाल मैं पात पात

सिद्ध करने में और भी ज्यादा मदद की है।

भारतीय राजनीति का इसे दुर्भाग्य कहें या विडम्बना कि

जो भी दल सत्ता में आता है वह सत्ता में आने के बाद

इस मुहावरे को कतई परिवर्तित करने की चेष्टा तक नहीं करता  ।

 

इस देश में सर्वोच्च न्यायालय वास्तव में हमारे संविधान का सबसे बड़ा रखवाला है।

यही सबसे बड़ा संविधान का संरक्षक एक नहीँ कई बार कह चुका है कि

इस देश में कानून का राज्य ही सर्वश्रेष्ठ राज्य है, इसलिए कानून से बड़ा कोई नहीं है। 

ताज्जुब इस बात का है कि भारत की राजनीति

तू डाल डाल मैं पात पात की असलियत के चलते

एक बार नहीं कई बार

इस सर्वोच्च फरमान को ठुकरा चुकी है कि

कानून से बड़ा कोई नहीं।

कई साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि

इस देश में 50 %से अधिक आरक्षण की सीमा संभव नहीं है। 

बावजूद केवल और केवल भारतीय राजनीतिज्ञ सब कुछ जानते हुए भी

एन चुनाव के वक्त कभी इसको, कभी उसको झूठी खुशी देकर  वोट लूटने की इच्छा से

अतिरिक्त आरक्षण देने की घोषणा कर डालते हैं ।

यह बात अलग है कि राजनीति को अदालत में मुंह की खानी पडती है

और आरक्षण का झुनझुना वापस लेना पड़ता है ।

एस सी एस टी कानून के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने

मनुष्य की मनुष्यता को सबसे बड़ी शक्ति मानते हुए यह निर्णय दिया था कि

कोई भी क्यों न हो झूठ की ताकत से किसी को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

चूंकि आजकल भारत की राजनीति

तू डाल डाल मैं पात पात वाले मंत्र से संचालित है

इसलिए कोई और दल या व्यक्ति इस तथ्य का फायदा न उठा ले, 

इस लिए सत्ताधारी दल ने ही ऐलान किया कि

नहीं वोट के लिए हम सुप्रीम कोर्ट की बात भी नहीं मानेंगे ।

 

आपको याद होगा जनता दल के एक बड़े नेता और उप प्रधान मंत्री

श्री देवी लाल ने बस ओबीसी शब्दअपनी जुबान में लाए ही थे, 

कि दूसरी तरफ वीपी सिंह ने दूसरे ही दिन

सालों से बंद बक्से में सो रही मंडल कमीशन की रिपोर्ट को जगा कर लागू कर दिया था।

यानी तू डाल डाल मैं पात पात ।

मेरे कहने का मतलब यह नहीं कि मंडल रिपोर्ट गलत है

बल्कि मेरे कहने का मतलब बस यह है कि अगर इस देश में संविधान सर्वोच्च है।

सुप्रीम कोर्ट उसका सबसे बड़ा संरक्षक है तो फिर

महज अपनी पार्टी के स्वार्थ को पूरा करने के लिए

हमें अपने ही सर्वोच्च प्रतिष्ठान की गरिमा को

तार तार करके

भारत की राजनीति को

तू डाल डाल मैं पात पात नहीं सिद्ध करना चाहिए। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 10082018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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