आप मेरी बात का भरोसा करें


आप मेरी बात का भरोसा करें 

 

आप मेरी बात का भरोसा करें। 

आपको मेरी बात पर भरोसा क्यों नहीं होता?

जरा ठहरिए जनाब।

कुछ और मत सोचिए!! 

मैं आप से अपनी शिकायत नहीं कर रहा ।

सच पूछिए तो यह बात मैं पूरी दुनिया के लिए कह रहा हू।

अक्सर हम सब को इसी बात की शिकायत रहती है और वह भी खास 

अपनों से कि आपको मेरे ऊपर भरोसा क्यों नहीं होता?

हम अगर शिकायत भी नहीं करते तब भी हमारे मन के किसी कोने में

यह सवाल घूमता रहता है कि आखिर संसार में कुछ लोग ऐसे क्यों होते हैं

जो किसी का भी विश्वास नहीं करते। 

लोग कैसे कैसे 

आप मेरी बात का भरोसा करें ।

आपको मेरी बात पर भरोसा क्यों नहीं होता?

क्या आप भी इस सवाल से वाकिफ हैं?

अगर वाकिफ हैं तो आप भी इसी बात से परेशान होंगे कि आप भले ही बिल्कुल सही हों, 

आप अपनी जगह बिल्कुल उचित हों, इसके बाद  भी

आप पर आपके आसपास कुछ लोग ऐसे  होते हैं कि

बावजूद तमाम सच्चाई के उनको आप पर रत्ती भर का भरोसा नहीं होता।

आप परेशान मत होइएगा क्योंकि आज की इस पोस्ट में इसी समस्या के

कारण और निवारण की चर्चा होनी है। 

दुनिया की रीति और सच्चाई 

आप मेरी बात का भरोसा करें। 

दुनिया और समाज की हकीकत यह है कि दूसरों पर विश्वास करने वाले लोग

साधारण नहीं होते बल्कि बहुत ही खास लोग होते हैं।

चोर कभी दूसरे पर भरोसा नहीं करता और सीधा सरल सच्चा इंसान इसी से लूटा जाता है कि वह सबका विश्वस कर लेता है ।

भले ही  सब के सामने खुद को  उसे लल्लू राम ही क्यों न साबित  होना पड़े ।

मेरे कहने का मतलब यह है कि विश्वास वही करता है जो सीधा, सरल और सच्चा इंसान होता है ।

जिसने अपनी जिंदगी में कभी किसी को तिकड़मी चालों से मात नहीं दी है

उसे दुनिया की शैतानी उठा पटक की जानकारी ज्यादा नहीं होती।

इसीलिए वह अपने ही जैसे पूरी धरती को मानकर चलता है।

वहीं कतर ब्यौंत में माहिर एक शातिर आदमी जानता है कि वह

किन किन तरीकों से लोोगों को ठगता है ।

पता नही कोई कब उसे उसके ही तरीके से मात दे दे।

सदैव यही डर जिसके मन में भरा होता है वह दूसरे का विश्वास नहीं कर पाता  । 

शातिर होते हैं ऐसे लोग 

आप मेरी बात का भरोसा करें। मे

रे कहने का मतलब इस पोस्ट में यह कतई नहीं है कि आप

अच्छा बनने या अच्छा दिखने ने के चक्कर में

सब की बात आंखें मूंद कर मानते चलो।

ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए।

हां आपको यह जरूर करना चाहिए कि किसी के प्रति किसी भी तरह का

पूर्वाग्रह नहीं रखना चाहिए ।

क्योंकि यही पूर्वागह हमें अंतत: उन राहों की ओर मोडता है जिधर हमें नही जना चाहिए। 

इसीलिए कहता हूँ कि आप मेरी बात का भरोसा करें। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 0708289

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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