अन्ना ये क्यों अन्ना हैं?

अन्ना ये क्यों अन्ना  हैं? 

अन्ना ये क्यों अन्ना  हैं?

दोस्तों,आप भले ही मेरे सवाल अन्ना ये क्यों अन्ना हैं  का मतलब न समझ पाएं हों, 

लेकिन इतना जरूर निश्चित है कि आप के मन में यह सवाल जरूर आ गया होगा कि

आखिर इस हेडिंग का अर्थ और मतलब क्या है ?

वैसे एक बात यह भी है कि बांदा, फतेहपुर, कानपुर, हमीरपुर के लोग

मेरा मतलब जरूर समझ गए होंगे ।

अगर आप कम से कम इन जगहों से संबंधित हैं तो आप को

अब तक यह जरूर पता चल गया होगा कि मैं किसी और की नहीं

बल्कि उन अन्ना जानवरो की बात कर रहा हूं जिनके साथ

योगी आदित्य नाथ जी का नाम अक्सर जोड़ा जाने लगा है।

भले ही आज से पहले भी जानवर छुट्टा छोड़े जाने का प्रचलन रहा हो।

मामला क्या है? 

अन्ना ये क्यों अन्ना हैं ? इस शीर्षक से लिखी गई इस पोस्ट में

उत्तर प्रदेश में समस्या बन चुके उन जानवरों

विशेष रूप से

गो वंश के गाय बैलों के बारे में चर्चा की जा रही है

जो बूचड़खाना अधिनियम के चलते मारे मारे फिर रहे हैं।

दोस्तों, जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आई है तब से

जिधर देखो जहां देखो जब भी देखो हर तरफ यही चर्चा है कि

मोदी और योगी ने गांव और किसानों का सत्यानाश कर दिया है ।

आप अगर गलती से यह पूछ लें कि आखिर मोदी और योगी ने ऐसा क्या किया है कि

आपको दिक्कत हो गई?

तो सबका रटा हुआ जवाब यह होता है कि जब से केंद्र में मोदी सरकार ने

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत

अवैध बूचड़खानों में प्रतिबंध लगाया है

और गो वंशीय पशुओं की खरीद फरोख्त में रोक लगाई है

तब से किसान बर्बाद हो रहा है। 

नकली बुद्धिमानों की दिक्कत 

जी हां, दोस्तों इस मामले में नकली बुद्धि मानों की दिक्कत यह है कि

पहली बात तो गांव गांव में इकट्ठा हुई गायों को एक समस्या बता रहे हैं

और दूसरी बात यह है कि जूझ मूठ गांव के भोले भाले किसान को

इससे फसली नुकसान बता रहे हैं।

असलियत यह है कि यह दोनों बातें निहायत फिजूल हैं।

वास्तव में न तो गाय भारत के लिए कोई समस्या है और न ही

किसानों को किसी भी तरह का गाय से नुकसान है।

किसान भले ही अपनी कम फसल का ठीकरा मोदी और योगी जी

पर फोडने की नाकाम कोशिश कर ले, 

पर सच्चाई यही है कि इसकी सच्चाई कुछ और है।

नकली वुद्धि मान भले ही गांव के भोले भाले

किसान को इन गायों की वजह से पीड़ित बताएं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। 

 

गाय क्या है समस्या या समाधान? 

अन्ना ये क्यों अन्ना हैं?

शीर्षक वाली इस पोस्ट को अगर कोई नकली बुद्धिमान पढेगा तो यही कहेगा

कि जब से योगी जी की सरकार बनी है उसी घड़ी से

पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गाय एक समस्या बनी हुई है।

लेकिन मेरा विचार है कि यह सच्चाई नहीं है 

सच्चाई यह है कि गाय कतई समस्या नहीं बल्कि समाधान बन गई है।

जब से योगी सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर नकेल डाली है

तब से चूंकि बेकार और बूढी गाय का कोई इंतजाम नहीं हो पाता

इसलिए वह हर वक्त आंख में खटकती हैं।

पहले यह था होता था कि हिन्दू सभ्यता की लाज शरम के चलते यह मजबूरी थी कि बूढी गाय को भी खूंटे में पनाह देना पड़ता था।

कुछ शातिर गाय प्रेमी गाय का इंतजाम करने में कसाई का भी

चुपके से सहारा ले लेते थे।

इसलिए गाय इतना दिखती नहीं थी  ।

अब चूंकि एक तरफ कसाई की दूकान बंद है दूसरी तरफ

समाज में सगूफा या इस बात का बतंगड़ बना हुआ है कि

गाय पता नहीं कहाँ से आ गई हैं।

इसलिए वही शातिर गो पालक जो बाजार नहीं जा पाता

मौके की नजाकत देखते हुए और लाज शरम सब छोडते हुए

अपने को मुफ्त की गो सेवा से बचाने के लिए

चुपके से अपनी ही गाय को छोड़ देता है। 

यह तो हद है 

मौके का फायदा उठाने का तरीका देखिए आज गांव गांव में गायों का जो लावारिस झुंड दिखता है आखिर इनका आगमन कहां से हुआ है? स्वर्ग से या इंद्र लोक से या फिर सीधे अमेरिका से यह चलकर आ रही हैं?

हकीकत यह है कि यह सब नुकसान करने वाली आवारा गायों का झुंड

उन्ही लोगों की छोड़ी हुई बेजुबान गाय हैं

जो एक तरफ तो कसाई की दूकान बंद होने से दुखी हैं

तो दूसरी ओर बेकार गायों की सेवा से बचने का कोर्ट तक में रास्ता ढूँढते हैं।

यही लोग आज आवारा जानवर के जन्मदाता बन गए हैं

यानी यही लोग अपने अपने घरों की गायों को छोड़कर भाग रहे हैं। 

खेतों में तथाकथित नुकसान करने वाली गाएं लंदन से नहीं आईं

बल्कि गाय की सेवा से बचने वालों की अपनी ही गाएं हैं।

मोदी और योगी को वही लोग बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं

जो जिंदगी भर दूध पीने के बाद अपनी गाय को मोक्ष प्राप्ति के लिए

अब कसाई के हांथ में सुपुर्द करने को तरस रहे हैं। 

जरा सोचिए 

जरा सोचिए आप की नहीं, मेरी नहीं, इनकी नहीं, उनकी नहीं हैं यदि गांव गांव में तथाकथित किसान को नुकसान पहुंचाने वाली गाएं तो फिर आखिर ये हैं किसकी?

और हां  यदि गाय पालक बड़े धर्मात्मा हैं और सदा से ही कसाई को

बूढी गाय बेचने की बजाय उसकी सेवा करते रहे  हैं तो

आज कसाई की दूकान बंद होने से और गाय के न बेंच पाने के बाद

अचानक लावारिस गायों की सुनामी कहां से आ गई है? 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 10082018

 

 

 

 

 

About kpsingh

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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