मानव शरीर को आप कितना जानते हैं?

मानव शरीर को आप कितना जानते हैं? 

मानव शरीर को आप कितना जानते हैं?

सवाल पढते ही आप कहेंगे बहुत कुछ जानते हैं।

आपको क्या लगता है कि,हम अपने शरीर के भी बारे में नहीं जानते हैं

कि यह हमारा हाथ है यह हमारा पैर है और यह हमारा पूरा शरीर है? 

जी हां दोस्तों, इसी तरह के विचार किसी के भी हो सकते हैं।

लेकिन जरूरी नहीं कि सच्चाई भी ऐसी ही हो।

सच्चाई यह है कि हमारा शरीर कई तंत्रों से मिलकर

बना हैऔर यह तंत्र कई अंगों से मिलकर बनते हैं।

जबकि यह अंग कई प्रकार के ऊतकों से बनते हैं

और यह ऊतक हजारों कोशिकाओं से मिलकर बने हैं।

 वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारा शरीर करीब 50 हजार ट्रिलियन

कोशिकाओं से मिलकर बना है।

मानव शरीर के विभिन्न तंत्र 

मानव शरीर को आप कितना जानते हैं?

इस सवाल के जवाब में यदि हम मानव शरीर के तंत्रों की चर्चा करें तो हमें पता चलता है कि

हमारे शरीर में कुछ खास तंत्र हैं जिनके द्वारा मानव शरीर की सभी प्रकार की

जीवन संबंधी गतिविधियां संचालित होती रहती हैं।

आइये, इस क्रम में यह देखने का प्रयास करें कि मानव शरीर में

कौन कौन से प्रमुख तंत्र और उनसे संबंधित अंग होते

हैं तथा इनसे कौन कौन सी जीवन संबंधी गतिविधि चलती रहती  हैं?

मानव पाचन तंत्र 

हमारे मानव शरीर का प्रमुख तंत्र पाचन तंत्र है।

हम आप सब मनुष्य जिंदा रहने के लिए सबसे ज्यादा इसी तंत्र के आभारी हैं।

पाचन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण भाग आहार नाल होती है ।

आहार नाल मनुष्य के मुख से लेकर गुदा द्वार के मध्य तक एक लम्बी नाल के रूप में पाई जाती है।

आहार नाल में मुख गुहा,  ग्रासनी ंं, ग्रासनाल, आमाशय, छोटी आंत और बड़ी आंत नामक प्रमुख भाग शामिल किए जाते हैं।

मुख गुहा मानव शरीर में एक दरार के समान है जो दोनों जबड़ों के बीच में खुलता है ।

ग्रसनी मुख गुहा के पीछे एक कीप के आकार की संरचना होती है

जबकि ग्रास नली एक लम्बी नली होती है ।

यह ग्रासिका से प्रारंभ होकर आमाशय में जाकर खुलती है ।

आमाशय डायाफ्राम के नीचे एक थैले के समान होता है।

यह उदर गुहा के बाएं भाग में स्थित होता है।

हमारे शरीर में एक छोटी आंत होती है तो दूसरी बड़ी आंत होती है ।

हमारे मानव शरीर में स्थित छोटी आंत हार्मोंस का श्रावण करती है।

छोटी आंत भोजन के पाचन में सहायता करती है। बड़ी आंत श्लेष्मा का स्रावण करती है।

 

यह भोजन से जल का अवशोषण करती है

 यह आंत भोजन बहिष्करण का भी कार्य करती है।

यकृत 

यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है।

यह कार्बोहाइड्रेट,  वसा और प्रोटीन उपापचय में सक्रिय भाग लेता है।

यकृत शरीर में उत्पन्न जीव विषों को प्रभाव हीन करके शरीर की रक्षा करता है।

हमारे शरीर में जिसे अग्न्याशय कहते हैं वह हमारे शरीर में

छोटी आंत के यू आकार वाले भाग में स्थित गुलाबी रंग की  एक ग्रंथि होती है।

इसके चारों ओर सिमेंडरी नामक झिल्ली होती है।

आग्न्याशय की कोशिकाओं के बीच कुछ पीले रंग की

कोशिकाएं होती हैं जिन्हें लैंगरहेंस के द्वीप कहते हैं।

यह लैंगरहेंस के द्वीप ग्लुकेगान एवं इंसुलिन नामक हार्मोन का स्रावण करती हैं।

हमारे शरीर में एक पित्ताशय होता है।

यह नाशपाती के आकार की एक थैली होती है।

यह थैली यकृत के नीचे होती है।

यकृत में जो पित्त रस बनता है वह पित्त नलिका के माध्यम से पक्वाशय में आ जाता है।

पित्त वास्तव में पीले हरे रंग का क्षारीय द्रव है, जिसका ph मान 7,7 होता है।

पित्त भोजन के साथ आए हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है ।

पित्त आंतों की क्रमांकुंचन की गति बढ़ाता है

जिससे भोजन में पाचक रसों का मिलान ठीक से हो जाता है।

एक खास बात 

दोस्तों, यह जानकारी वास्तव में किसी प्रतिष्ठित डाक्टर द्वारा नहीं प्रदान की जा रही है

और न ही इस पोस्ट का उद्देश्य खुद को एक डाक्टर साबित करना है।

इस पोस्ट का उद्देश्य यह है कि हमें अपने शरीर के बारे में यदि कुछ भी ज्ञात हो सके तो

उसे प्राप्त करना चाहिए।

मुझे यह जानकारी अपने स्व अध्धयन में मिली है जिसे मैंने आप तक पहुंचाने की कोशिश की है।

हां इस कोशिश में त्रुटि संभव है जिसे आप मानवीय समझ सही कर लें तो आपकी कृपा होगी।

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 28082018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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