आओ खुद की तरफ देखें

आओ खुद की तरफ देखें 

आओ खुद की तरफ देखें।

जी हां दोस्तों आपको मेरी बात बिल्कुल ही विचित्र लग सकती है।

आप कह सकते हैं यह क्या बात हुई?

आखिर अपनी तरफ देखने का क्या मतलब है?

क्या कोई अपनी तरफ नहीं देखता या

इस छोटे से काम के लिए भी किसी की सहायता की जरूरत है?

आप के एक नहीँ बल्कि अनेकों अनेक सवाल हो सकते हैं

इस लिए मैं आपको पहले ही बता देना चाहता हूं कि आप कुछ भी समझिए

लेकिन अपनी तरफ देखने वाली बात को हलके में लेकर इसे फालतू मत समझिए।

मुझे विश्वास है जब आपको इस बात का असली मकसद समझ में आएगा

तो आपको अपने आप में हैरानी जरूर होगी। 

क्या मतलब है इस बात का? 

आओ खुद की तरफ देखें महज एक वाक्य है यह कोई प्रतिज्ञा या शपथ नहीं है।

हम अक्सर अपने सामान्य जीवन में इसे प्रयोग भी करते हैं

हां यह बात दीगर है कि अगर आप इसके वास्तविक अर्थ की तरफ जाना चाहते हैं

तो यह इतना आसान भी नहीं है।

जरा गौर करें, आप हाईस्कूल की परीक्षा में चंद दिनों बाद बैठने वाले हैं।

आपके क्लास टीचर पूरी कक्षा को आगाह कर रहे हैं कि आपको परीक्षा में

क्या करना है क्या नहीं करना है।

पूरी कक्षा शांत चित्त होकर सुन रही है।

आप भी सुन रहे हैं लेकिन आपके मन में एक अजीब माहौल चल रहा है।

दरअसल होता यह है कि जब क्लास टीचर पूरे क्लास की क्लास ले रहा होता है

तो उसी समय आप बहुत तन्मय और गम्भीर नहीं होते बल्कि लापरवाही से सुन रहे होते हैं।

जानते हैं क्यों?

क्योंकि आप को लगता है कि ये सब बातें पूरी दुनिया के लिए भले हों मेरे लिए नहीं ही हैं।

मुझमें ऐसी बुराइयां तो है  ही नहीं?

पूरी जिन्दगी यही गलत फहमी चलती रहती है

और हम कभी भी शांत चित्त होकर खुद के अंदर झांकने

और अपने बारे में जानने की कोशिश तक नहीं करते। 

इसे इस तरह समझिए 

आओ खुद की तरफ देखें ।

जी हां दोस्तों, आपको निश्चित ही पता होगा कि पश्चिमी जगत की पूरी फिलोस्फी

इसी एक आधार वाक्य के चारों तरफ टिकी हुई है।

यानी खुद की तरफ देखो वह महान वाक्य है

जिस पर अगर कोई चलता है तो उसे अपने में ही समस्त संसार की झलक दिख जाती है।

नो द सेल्फ,

यह वही शब्द है जिसके चारों तरफ पूरे पश्चिमी जगत का दर्शन शास्त्र टिका हुआ है ।

हकीकत में यह सच भी है कि आपको अपने आप को जानने की पहली जरूरत होती है।

जरा आप खुद सोचिए जब तक हम अपने आप को नहीं जानेंगे

तो संसार के बारे में क्या जानेंगे।

इतना ही नहीं जब हम खुद की तरफ भलीभांति देख लेंगे

तो इसके बाद हम जब दूसरों की तरफ देखेंगे  तो हमारे देखने का नजरिया

कतई लापरवाही भरा नहीं होगा।

बल्कि हम किसी और मे अच्छाई बुराई तलाशने के

पहले कहीं न कहीं अपने अंदर भी यही चीजें देखने की कोशिश करेंगे ।

जीवन में इस नजरिए का क्या फायदा है

हकीकत यह है कि हम संविधान में अपने लिए दिए गए अधिकार तो याद रखते हैं

लेकिन कभी उसी संविधान में दिए गए अपने कर्तव्यों को जानने की कोशिश तक नहीं करते।

लेकिन इस सामाजिक युक्ति का फायदा यह होगा कि अगर हम खुद की तरफ पहले देख लेंगे

और अपनी अच्छी बुरी बातें इमानदारी से जान लेंगे तो

किसी से अपेक्षा मात्र करने की हमारी आदत भी बदल जाएगी।

हम अगर अपने खुद के गिरेबान में झांक लें तो निश्चित ही हमें और हमारे साथ साथ

हमारे समाज को भी बेहद फायदा होगा।

क्योंकि तब लोग किसी और से अपेक्षा करने के पहले

यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर  उनका अपना कर्तव्य क्या है? 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 12092018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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