जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव?

 

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव? 

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव? 

 

क्या कभी ऐसा समय आने की कोई सम्भावना
आपको निकट भविष्य में महसूस होती है?

 

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव? 

दोस्तों यह महज कोरी कल्पना नहीं है बल्कि अगर सब कुछ ठीक रहा 

तो निकट भविष्य में यह कोरी कल्पना लगने वाली कल्पना हकीकत में बदल सकती है।

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव? 

और तब न केवल डीजल पेट्रोल पानी के मोल
बिकेंगे बल्कि बहुत ज्यादा सम्भावना यह है कि
कोई इनकी तरफ देखना भी पसंद न करे।
आज भले ही मोदी सरकार की आलोचना का कारण
लगातार बढ रही पेट्रोल की कीमत हो लेकिन जल्द ही ऐसा समय आएगा
जब इसी पेट्रोल और डीजल की कोई खास चर्चा भी करना पसंद नहीं करेगा।
आपको बता दें कि यहां इस पोस्ट का एक एक
शब्द बिलकुल सच साबित होगा भले ही आज यह
कोरी कल्पना से आगे कुछ भी न लगता हो। 

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव

विशेषज्ञो और जानकार वैज्ञानिकों की माने तो 2023 तक ऐसा भी समय आ सकता है

जब डीजल पेट्रोल के लिए लगने वाली लम्बी लम्बी लाइने ही गायब हो जाएं 

ऐसा भी सम्भव है कि इन ईंधनों की मांग ही कोई करने वाला न मिले।

क्योंकि यह दावा किसी नाटक मंडली के जोकर ने नहीं बल्कि लंदन स्थित

थिंक टैंक कार्बन ट्रैकर ने किया है।

इस संस्था के अनुसार पवन व सौर ऊर्जा केे तेज

उत्पादन के बाद पारंपरिक ऊर्जा स्रोत लोगों की निगाह में नहीं टिक सकेंगे।

इस प्रकार जीवाश्म ईंधन के उत्पादन में लगी

कंपनिियों की मुश्किलें भी बढ सकती हैं।

जब डीजल पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव  

क्या है कार्बन बबल का सिद्धांत 

जब डीजल व पेट्रोल बिकेंगे पानी के भाव र्तमान में जीवाश्म ईंधन कंपनियों के शेयरों की कीमत तय करने का तरीका यह है कि

सबसे पहले यह अनुमान लगाया जाता है कि उनके

भंडार को पूरी तरह से उपयोग मे ले लिया जाएगा।

लेकिन जैसे ही लोग कार्बन मुक्त ईंधन की ओर पलायन करेंगे तो

जीवाश्म ईंधन में निवेश किया गया लाखों करोड़ों का धन अपनी कीमत गंवा देगा।

जीवाश्म ईंधन भंडार और उत्पादन मशीनरी कोई लाभ का सौदा नहीं बचेगा।

यह जो आपके सामने सम्भावित नुकसान का समग्र चित्र है वास्तव में यही है कार्बन बबल सिद्धांत।

एक आंकड़े की बात पर गौर करें तो पिछले 200 सालों से

जीवाश्म ईंधन का व्यापार सदैव लाभकारी सौदा रहा है

लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा तो इसके बाद यह सौदा निष्कंटक लाभ का सौदा नहीं बचेगा।

कुछ जानकारों की मानें तो जीवाश्म ईंधन के निवेश को होने वाला नुकसान

25 लाख करोड़ डालर तक का हो सकता है।

आपको शायद पता होगा कि पूरी दुनिया में भारत सहित कुल 12 ऐसे भी देश हैं

जो जीवाश्म ईंधनों पर जीडीपी के दस फीसदी से अधिक का धन खर्च करते हैं।

ध्यान से देखें तो इसी तरह के जीवाश्म ईंधन के सहारे अपनी विकास यात्रा

करने वाले देश ईंधन व्यापार करने वाले देशों की जान रहे हैं।

लेकिन जब से ईंधन के नवीनतम विकल्पों की चर्चा

प्रारंभ हुई है इन बदलाव वाहक देशों की भी छवि में बदलाव आने लगा है ।

कंपनियां अभी भी डटी हैं हकीकत को नकारने में 

एक तरफ पूरी दुनिया जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी

और ईंधन के नवीनतम बदलावों की तरफ हसरत से देख रही है

लेकिन दूसरी तरफ लाखों डॉलर के निवेश के बर्बाद होने के डर से

बुरी तरह डरी हुई तेल कंपनियों की जुबान कुछ और ही दावा करने में मशगूल हैं।

तेल और गैस कंपनियां लगातार यही प्रचार प्रसार कर रही हैं कि

उनके निवेश को कतई कोई खतरा नहीं है।

दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी एक्सानमोबिल तो यहां तक अपना दावा पेश कर रही है

कि कुछ भी हो जाए लोग ईंधन की जरूरत से कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे ।।

लेकिन जहां तक बात सच्चाई की है यह बात किसी से

छिपी नहीं है कि कार्बन ईंधन ने पूरी धरती की सेहत खराब कर रखी है।

इस लिए अगर इसमें कुछ बदलाव लाकर धरती की गर्माहट में

जरा भी कमी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं तो यह सब कुछ स्वागत योग्य हैं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 17092018

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मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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