तथ्यों के आइने में भारत में बाल विवाह कानून

 

तथ्यों के आइने में भारत में बाल विवाह कानून 

तथ्यों के आइने में भारत में बाल विवाह कानून।

इस पोस्ट का मकसद आपको वकील बनाना नहीं है लेकिन

इसके बावजूद यह पोस्ट आपके लिए लिखी जा रही है

तो इसका कारण यह है कि 

मैं चाहता हूं इस सामाजिक बुराई के संबंध में आम

और खास हर आदमी को

जानकारी जरूर होनी चाहिए।

क्योंकि कभी कभी ऐसा भी होता है कि संबंधित

कानून के बारे में हमें कखग भी नहीं आता

जिससे हम या तो ठगे जाते हैं या फिर अपना ही काम हम खुद बिगाड़ लेते हैं ।

बाल विवाह की जागरूकता का नितांत अभाव का ही यह परिणाम है कि

हम एक तरफ मानव रहित विमान अंतरिक्ष में भेजने की पूरी तेयारी करते हैं

तो दूसरी ओर अपने तमाम पूर्वाग्रहों के कारण साल के किसी खास दिन

अपने बच्चों को जागरूकता के अभाव मे ऐसी जगह दफन कर देते हैं कि

वह जीवन भर सही गलत का  मतलब तक जान नहीँ जान पाते । 

किसे कहते हैं बाल विवाह?

वर्तमान भारतीय संविधान के अनुसार दो विवाह करने वाले स्त्री पुरुष में

महिला की उम्र यदि 18 साल से कम है साध ही साथ पुरुष की उम्र 21 साल से कम है

तो ऐसे विवाह को बाल विवाह कहा जाता है। 

 बाल अपराध एक अपराध की श्रेणी में आता है  और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है।

बावजूद इसके सच्चाई यही है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश,

राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ झारखंड आदि प्रदेशों में

आज भी बाल विवाह काफी सोचनीय संख्या में होते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार बाल विवाह यानी गैर कानूनी बंधन की हकीकत यह है कि

भारत में आज भी 47% लड़कियों की शादी 18 साल के पहले ही कर दी जाती है।

शहर के मुकाबले गांव में 18 साल से पहले होने वाली शादियों की दर दोगुनी है।

 

रिपोर्ट कहती है कि बाल विवाह में कमी तो आ रही है लेकिन बेहद धीमी गति से।

मध्य प्रदेश में 73%,आंध्र प्रदेश में 71%,राजस्थान में 68%,उत्तर प्रदेश में 64%,

बिहार में 67%बाल विवाह होते हैं।

देश में बाल विवाह की दर में कमी की गति बेहद धीमी है।

एक आकलन के अनुसार पिछले 15 सालों में बाल विवाह की दर में

केवल 11% की गिरावट आई है।

यह दावा गैरसरकारी संगठन चाइल्ड राइट्स एंड यू

क्राई ने 2016 में मदर्स डे से एक दिन पहले जारी किये थे।

भारत में मदर्स डे के बढते चलन को देखते हुए तब

क्राई ने बढते दुष्कर्म, मानव तस्करी, गरीबी, अशिक्षा आदि पर चिंता जताई थी।

क्राई ने साफ शब्दों में तब यह भी कहा था कि दुनिया

में सबसे ज्यादा बाल विवाह भारत में ही होते हैं

इनमे आधी से अधिक संख्या

राजस्थान, झारखंड  बिहार, मध्य प्रदेश  उत्तर प्रदेश

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़  पश्चिम बंगाल आदि में पाई जाती है।

भारत में बाल विवाह कानून और उसका इतिहास 

तथ्यों के आइने में भारत में बाल विवाह कानून की यदि चर्चा करें

तो सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि जिस गति से भारत में बाल विवाह का दायरा बढता रहा है

उसी गति से कानूनों का भी विस्तार होता रहा है लेकिन

दुर्भाग्य से एक से बढ़कर एक अच्छे कानून की

उपस्थिति के बावजूद इस बुराई का दंश हमें आज भी परेशान किए हुए है।

भारत में सबसे पहले समाज सुधारकों की पहल पर

अंग्रेजी शासन काल के दौरान बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाए जाने के प्रयास हुए थे।

इस दिशा मे जो सबसे पहला कदम उठाया गया था वह था 1891 का एज आफ कांसेंट एक्ट 1891।

1894 में मैसूर राज्य ने आठ 8 वर्ष से कम बालिका के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया था।

बड़ौदा अर्ली मैरिज प्रिवेंशन अधिनियम 1904 में पारित हुआ था

जिसके अनुसार लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 12 वर्ष निर्धारित की गई थी।

इंदौर राज्य ने 1918 में एक कानून बनाया जिसके अनुसार

लड़कों के विवाह की न्यूनतम आयु 14 वर्ष तथा

लड़कियों की विवाह लायक उम्र 12 वर्ष घोषित की गई थी ।

बाल विवाह अवरोध नियम1929

आपको बता दें कि बाल विवाह को रोकने के लिए

केवल भारत में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बाल विवाह रोकने के लिए प्रयास किये गए थे ।

इसके तहत 1921 में लीग आफ नेंशन में महिलाओं

और लड़कियों के अवैध व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से प्रेरित और प्रभावित होकर  राय साहिब हर विलास सारदा ने

बाल विवाह रोकथाम अधिनियम सन 1927 में केंद्रीय विधायिका में पेश किया।

इसमें जो प्रविधान पेश किए गए थे उनके अनुसार

लड़कियों की विवाह के लिए उम्र 14 वर्ष तथा लड़कों की उम्र 18 साल रखी गई थी।

बाद में यही विधेयक बाल विवाह रोकथाम अधिनियम 1929 के नाम से जाना गया।

आज भी कुछ लोग इसे सारदा अधिनियम ही कहते हैं। 

बाल विवाह अवरोध संशोधन अधिनियम 1978

भारत सरकार द्वारा घोषित जनसंख्या नीति को कार्य रूप प्रदान करने के उद्देश्य से

विवाह के समय लड़कियों की न्यूनतम आयु 18वर्ष

तथा लड़कों की 21 साल करने के उद्देश्य से यह अधिनियम पारित किया गया था।

इस अधिनियम के बाद बाल विवाह प्रतिषेध

अधिनियम 2006 का भी यहाँ उल्लेख किया जा सकता है।

यह कानून 1जनवरी 2007 से लागू हुआ था।

यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे भारत में लागू है।

जिसके अनुसार यह नियम भारत के बाहर रहने वाले तथा भारत में रहने वाले लोगों पर लागू होता है

परंतु इस अधिनियम की कोई बात पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्र के रेनोंसाओं पर लागू नहीं होता।

इस अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की तथा 21 वर्ष से कम के

लड़के के बीच हुए विवाह को शून्य करणीय माना गया है।

इसके साथ ही साथ यह अधिनियम 18 तथ 21 के मानक के बाहर के

विवाह को अवैध भी मानता है ।

ऐसे विवाह में बधू पक्ष की ओर से दिए गए सभी प्रकार के उपहार,

मूल्य वान वस्तुएं आभूषण आदि अथवा उनके मूल्य के बराबर दिए गए धन को

वर पक्ष को रखना भी अवैध घोषित किया गया है।

ऐसे विवाह बंधन में आने वाले पुरुष यदि आवश्यक है तो  उसके माता पिता या संरक्षक को, 

लड़की को उसके पुनर्विवाह होने तक भरण पोषण की व्यवस्था करनी होगी।

भरण पोषण की राशि एकमुश्त या किश्तों मे भी मान्य होगी।

ऐसे विवाह से जन्मा या गर्भाहित प्रत्येक बालक चाहे वह अधिनियम के

प्रारंभ के पूर्व या पश्चात पैदा हुआ हो सभी प्रयोजनों हेतु धर्मज बालक समझा जाएगा।

यदि कोई 18 वर्ष से अधिक आयु का पुरुष वयस्क होते हुए बाल विवाह करेगा तो

वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकती है 

या जुर्माने से जो 1लाख तक हो सकता है अथवा दोनों से दंडित होगा। 

कुछ और खास तथ्य बाल विवाह रोक अधिनियम के 

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 तथा लागू

नियम 2007 के अनुसार जो भी व्यक्ति बाल विवाह करेगा,

संचालित या निर्दिष्ट करेगा वह सभी इसके लिए दी जाने वाली सजा के भागीदार होंगे।

ऐसे लोगों के लिए दो वर्ष का कठोर कारावास या

1लाख रुपये का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा।

बाल विवाह के अनुष्ठान में शामिल व्यक्ति भी इसकी सजाओं का निश्चत भागी दार माना गया है।

इसलिए यदि कोई व्यक्ति इस तरह के आयोजन में शिरकत करता है

तो कठोर कारावास या एक लाख रुपये का जुर्माना का भागीदार होगा। 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

2 Comments on “तथ्यों के आइने में भारत में बाल विवाह कानून”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *