मिसाइल एस-400 क्या है?

 मिसाइल एस- 400 क्या है? 

  मिसाइल एस – 400 क्या है?

दोस्तों, यह रूस की बेहतरीन वायु सुरक्षा प्रणाली है लेकिन इसके बारे में और भी तमाम 

 सवालों  के बेहतरीन जवाब तभी मिलेंगे 

जब आपको भलीभांति पता हो कि आखिर मिसाइल किसे कहते हैं।

स्वाभाविक है कि यदि हमें मिसाइल क्या है, पता होगा तो हमें

 रूसी वायु रक्षा प्रणाली यानी  मिसाइल एस – 400 क्या है?

यह बेहतर ढंग से पता चल सकता है।

दोस्तों, इसीलिए यह स्वाभाविक होने के साथ साथ जरूरी भी है कि हम

पहले यह जानें कि मिसाइल किसे कहा जाता है?

मिसाइल किसे कहते हैं? 

 मिसाइल एस-400 क्या है? 

को जानने के क्रम में हमें यह जान लेना चाहिए कि मिसाइल को हिंदी में प्रक्षेपास्त्र कहते हैं।

प्रक्षेपास्त्र एक ऐसा निर्देशित मानव रहित अस्त्र है जिसे

किसी प्रक्षेपण यान की मदद से प्रक्षेपित किया जाता है।

विदित हो कि प्रक्षेपास्त्र दो प्रकार के होते हैं।

1-निर्देशित प्रक्षेपास्त्र

2-प्राक्षेपिक प्रक्षेपास्त्र

निर्देशित प्रक्षेपास्त्र ऐसे प्रक्षेपास्त्र हैं जो जब तक अपने लक्ष्य पर प्रहार नहीं करते

  तब तक उन पर नियंत्रण प्रक्षेपण स्थल से ही किया जाता है।

निर्देशित प्रक्षेपास्त्र भी कई प्रकार के होते हैं जैसे –

🔴सतह से सतह पर मार करने वाले

🔴सतह से वायु में मार करने वाले,

🔴वायु से सतह में मार करने वाले और न

जल के अंदर ही अंदर मार करने की मारक क्षमता रखने वाले प्रक्षेपास्त्र।

बात अगर प्राक्षेपिक प्रक्षेपास्त्र की करें तो यह विशेष रूप से

लम्बी दूरी तक मार करने वाला प्रक्षेपास्त्र होता है।

इस प्रकार के प्रक्षेपास्त्रों को उनके मार्ग के केवल एक भाग तक ही निर्देशित किया जाता है।

इसके बाद उनको पूर्व निर्धारित  मार्ग पर भेज दिया जाता है ।

प्रक्षेपण के बाद इस निश्चित मार्ग में आ जाने पर उनकी दिशा या मार्ग में

विचलन कभी भी नही होता है। 

प्रक्षेपिक प्रक्षेपास्त्र दो प्रकार के होते हैं :अंतर

महाद्वीपीय प्राक्षेपिक प्रक्षेपास्त्र तथा मध्यम दूरी की क्षमता रखने वाले  प्रक्षेपास्त्र।

अब बात करते हैं   मिसाइल एस-400 की 

मिसाइल एस – 400  क्या है?

यह जानने से पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि यह मिसाइल रूस द्वारा विकसित की गई है,

जिसे दुनिया की सबसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली का खिताब प्राप्त है।

रूस की यह मिसाइल एस – 400 ट्रायंक एक साथ कई तरह के

लक्ष्यों की पहचान और उसे मार गिराने की कई क्षमता रखती है।

रूस की यह शक्ति शाली नायाब मिसाइल कई विशेषताओं से युक्त है जैसे –

यह मिसाइल दुनिया के सभी तरह के विमानों,

मिसाइलों, और मानव रहित विमानों और ड्रोन को एक साथ भेद सकती है।

इतना ही नहीं रूस की यह मिसाइल एस – 400 वायु रक्षा प्रणाली 

कई तरह के आधुनिक रडारों, कंट्रोल सिस्टम और विभिन्न प्रकार की मिसाइलों से युक्त है।

 

दुनिया की श्रेष्ठ वायु रक्षा प्रणाली में शामिल मिसाइल एस- 400  के रडार

एक हजार किलोमीटर की दूरी से ही किसी लक्ष्य की पहचान कर सकते हैं।

साथ ही साथ स्वचालित और नियंत्रित तरीके से

दूरी के लिहाज से मिसाइल को प्रक्षेपित कर उसे अचूक रूप से मार गिराते हैं।

रूस की मिसाइल एस – 400 को नाटो देशों ने एस ए – 21 ग्रोलर नाम से नवाजा है।

रुस की मिसाइल एस – 400, तीस किलोमीटर कीऊंचाई और 400 किलोमीटर तक मार कर सकती है।

यह निर्देश मिलने के चंद पलों के अंदर ही एक साथ तीन मिसाइलें दाग सकती है।

इतना ही नहीं यह सुपर फाइटर जेट सहित 100 एयर बोर्न लक्ष्यों को

ट्रैक करते हुए एक साथ छ:लक्ष्यों पर निशाना साध सकती है।

मिसाइल एस – 400 का सौदा 

मिसाइल एस – 400 को रूस से भारत अपने लिए खरीदना चाहता है ।

एक अनुमान है कि यदि भारत रूस से इसका सौदा करता है तो 5 अरब डॉलर का होगा।

विदित हो कि भारत 60%अपने सैन्य हथियार रूस से खरीदता है।

सम्भवतः इस महत्वपूर्ण सौदे को सुलझाने के लिए ही रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन

 दिनांक 04/10/2018 को भारत आ चुके हैं।

शुक्रवार यानी 05/10/2018 को वह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से

भेंट करके इस सौदे को अंतिम रूप प्रदान कर सकते हैं।

सच कहें तो यह सौदा दोनों देशों के लिए बेहद अहम है।

क्योंकि 1953 के बाद से भारत लगातार रूस से सैन्य हथियार खरीदता रहा है।

 

सेना की परमाणु पनडुब्बी आई एन एस चक्र, सुपर सोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल,

मिग और सुखोई लडाकू विमान, आई एल परिवहन विमान टी – 72 और टी-90 टैंक,

आई एन एस विक्रमादित्य विमान वाहक युद्ध पोत यह सभी भारत ने रूस से ही खरीदा है।

ध्यान रखने वाली और महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर

भारत रूस से मिसाइल एस-400 सफलता पूर्वक खरीद लेता है तो

भारत की सैन्य क्षमता में अपार बढोत्तरी हो सकती है।

अगर भारत रूसी मिसाइल एस – 400 को खरीद लेता है तो

न केवल एशिया में इसका अर्थ समझने की कोशिश होगी

बल्कि महाद्वीपीय देशों में भी भारत की महत्ता के दर्शन होंगे। 

अमेरिकी पेंच और  मिसाइल एस – 400   का सौदा 

मिसाइल एस – 400 भारत खरीदना चाहता है और

रूस अपनी विश्व स्तरीय बेहतरीन मिसाइल भारत को बेचना भी चाहता है।

इस तथ्य के बाद भी सच्चाई यह है कि यह सौदा अभी भी कई तरह के पंचों में फंसा नजर आता है।

इस सौदे का सबसे बड़ा पेंच अमेरिका का कानून “काटसा” है।

काटसा अर्थात काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सिरीज थ्रू सेक्शन एक्ट।

भाइयो बहनों अमेरिका का काटसा कानून कहता है कि 

“अगर कोई देश रूस  ईरान और उत्तरी कोरिया के साथ बड़े लेन देन करता है तो वह अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकता है।”

दोस्तों, इस तरह की कंडीशन में रूस से समझौता करना काटसा कानून का उल्लंघन होगा

जो भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में अवश्य ले आएगा। 

 

भारत के लिए मिसाइल एस – 400 क्यों जरूरी है? 

भाइयों बहनों अगर आप यह सोचते हैं कि आखिर भारत को

रूसी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल एस- 400  की क्या जरूरत है

तो इन पंक्तियों को एक बार जरूर से जरूर पढें।

भारत में चूंकि अन्य देशों की तुलना में वायु रक्षा प्रणाली पुरानी है इसलिए नया परिवर्तन अपरिहार्य है।

सच कहें तो भारतीय वायु रक्षा प्रणाली के नाम पर भारत की वायु रक्षा प्रणाली में

इस समय सोवियत युग के जमाने के मिग जेट ही हैं।

जबकि रूस की रक्षा प्रणाली मिसाइल एस – 400 बेहद आधुनिक होने के साथ साथ

विश्व में सबसे एडवांस और सबसे शक्तिशाली वायु रक्षा प्रणाली है।

रूसी सेना में इसे 2007 में तैनात किया गया था।

रूस की वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल एस – 400 

अमेरिका के सबसे आधुनिक और सबसे शक्तिशाली

लडाकू विमान एफ-35 को भी समय रहते गिराने की क्षमता रखता है।

रूस की रक्षा वायु प्रणाली मिसाइल एस – 400 को सबसे पहले 2015 में चीन ने खरीदा था

जिसे चीन ने जनवरी 2018 में अपनी सेना में शामिल किया है। 

और हुआ सौदा पूरा,, 

 

दोस्तों, एक तरफ अमेरिका का काटसा कानून जिसमें छिपी हैं

अमेरिका की हजार नसीहतें और भारी भरकम धमकियां, 

तो दूसरी ओर चीन और पाकिस्तान की कुख्यात

जुगलबंदी से निकली आत्म घाती पड़ोसियों  के कहर की आशंका।

दोनों में किसका ख्याल रखें यह हर भारतीय की उलझन थी, 

जिसे आज नई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिसाइल एस – 400 का सौदा पक्का करके

एक ही झटके में सुलझा लिया है।

अब अमेरिका और उसका काटने वाला काटसा कानून क्या करेगा भारत का

यह बाद में देखा जाएगा? 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 05102018

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मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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