क्या आप जानते हैं इन बातों को?

क्या आप जानते हैं इन बातों को? 

क्या आप जानते हैं इन बातों को?

केवल इन्हीं शब्दों में टिकी हुई है दुनिया की हर वह लिखित परीक्षा

जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक श्रेष्ठ लोगों का चुनाव करना होता है।

जी हां दोस्तों, क्या आप जानते हैं इन बातों को शीर्षक वाली यह

पोस्ट प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों को केवल यह याद दिलाना चाहती है कि

दुनिया के हर ज्ञान को, हर तथ्य को हम हजम तो कतई नहीं कर सकते

लेकिन हां, अपनी परीक्षा के नजरिए से हम तथ्यों की चीर फाड़ जरूर कर सकते हैं।

आइए दोस्तों, हम कुछ ऐसे ही तथ्यों के बारे में चर्चा करें जो न केवल रोचक हैं

बल्कि परीक्षा पास करने के लिए इनको जानना अपरिहार्य और आवश्यक भी है। 

 

हमें हिचकी क्यों   आती है? 

क्या आप जानते हैं इन बातों को?

नामक इस पोस्ट के क्रम में अब हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे कि

आखिर हमें हिचकी क्यों आती है?

 इसका उत्तर इस प्रकार है चूंकि हमारी  छाती और पेट के बीच में एक डायाफ्राम होता है।

जब हम आप

जब हम अंदर की ओर सांस लेते हैं अथवा खींचते हैं

तो यह डाया फ्राम नीचे चला जाता है और पेट को दबाता है,

जिससे फेफड़ों में हवा भर जाती है।

ध्यान रहे यही डाया फ्राम जब ऊपर जाता है तो हवा फेफड़ों से बाहर निकल जाती है।

इस प्रकार यह डाया फ्रम ऊऊपर नीचे होता रहता है और सांस लेने की क्रिया

बिना कोई आवाज किए चलती रहती है।

लेकिन अगर कभी ऐसी स्थिति में फेफड़ों में जाने वाली हवा में रुकावट आ जाए

तो इस रुकावट के कारण एक अजीब सी आवाज पैदा होती है।

इसी अजीब सी आवाज को हम हिचकी कहते हैं।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि हिचकी एक ऐसी क्रिया है

जिसके द्वारा पेट में बनी गैस या फिर अवांछित भोजन को शरीर

बाहर निकालने की कोशिश करता है ताकि सांस लेने में कोई रुकावट न पैदा हो।

शराब पीने या पेट में किसी ट्यूमर के हो जाने पर भी डाया फ्राम

सिकुड़ जाता हैऔर हिचकी आने लगती है।

हमें प्यास क्यों लगती  है? 

क्या आप जानते हैं इन बातों को कि हमारे शरीर में जितना भी खून मौजूद होता है उसके

कण-कण या कतरे कतरे में पानी और नमक सदैव बना रहता है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि शरीर के ऊतकों में

भी यही पदार्थ मौजूद होते हैं।

समझने वाली बात यह है कि रक्त में इन दोनों पदार्थों

का अनुपात भी सुनिश्चित  स्थिर रहता है, 

लेकिन जब किसी भी कारण से रक्त में जल की मात्रा कम होने से

इन दोनों पदार्थों का अनुपात बदलता है तो इस स्थिति में

मस्तिष्क में स्थित प्यास केंद्र सक्रिय हो जाता है।

प्यास केंद्र गले को संदेश भेजता है, फलस्वरूप गले में

सिकुड़न होती है।

इसी सिकुड़न से गला सूखने लगता है और हमें प्यास

का अनुभव होता है। 

मधुमेह में मशरूम कैसे लाभदायक होता है? 

जिन लोगों को मधुमेह अपनी गिरफ्त में ले लेता है उन्हें

यह बात भलीभांति पता चल ही जाती है

कि मशरूम ही वह भोज्य है जो मधुमेह रोगी के लिए

भी नुकसान दायक नही है।

सारा संसार जानता है कि मशरूम विटामिन के साथ साथ

स्टार्च एवं कोलेस्ट्रोल रहित होने के अलावा फोलिक

अम्ल का भी नेचुरल भंडार है।

इसी लिए सचमुच की सच्चाई यही है कि मधुमेह

रोगियों के लिए मशरूम वरदान है।

मशरूम में फोलिक आम्ल की प्रचुर मात्रा के कारण

रक्त की कमी से जूझने वाले लोगों के लिए भी यह

वरदान है। 

मनुष्य मांस का पाचन कर लेता है लेकिन

उसकी आंत कभी नहीं पचती जबकि

आंत खुद एक मांस है?

इसका कारण यह है कि आंतों में

अंदर से क्यूटिकल का आवरण चढा होता है, 

जब कि मांस के टुकड़ों में कोई भी आवरण नहीं होता। 

बिना उबाले दूध  खराब क्यों हो जाता   है? 

शायद आपको भी पता हो कि ताजे दुहे दूध में एक

नहीँ कई तरह के बैक्टीरिया पाए जाते हैं।

जब यह दूध हवा के सम्पर्क में आता है तो इन

बैक्टीरिया की संख्या अति शीघ्र में इजाफा होने लगता है।

इन बैक्टीरिया के कारण दूध खट्टा हो जाता है।

दूध को खराब होने से बचाने का सबसे अच्छा तरीका

फ्रांस  के वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने खोजा था।

इसी तरीके या प्रक्रिया को पाश्चुराईजेशन कहा जाता है।

हम देख सकते हैं कि बाजार से मिलने वाले दूध में इसी

लिए पाश्चुराइज्ड लिखा होता है।

कहने का मतलब यह है कि जब भी हम 62 डिग्री सेल्सियस ताप पर

30 मिनट तक दूध को गर्म करके फिर ठंडा कर लेते हैं तो दूध में उपस्थित

सभी तरह के बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं।

इस प्रकार का गर्म किया हुआ दूध काफी समय तक

खराब नहीं होता।

इसीलिए बिना उबाले दूध जल्दी खराब हो जाता है। 

डायलेसिस क्या है? 

जब किसी कृत्रिम तरीके से खून के हानिकारक पदार्थों

को छानकर अलग किया जाता है तो इससे संबंधित

संपूर्ण क्रिया डायलेसिस कही जाती है।

जब किसी व्यक्ति का गुर्दा यानी किडनी ठीक से काम

नहीं करता तो

उसके शरीर के खून से हानिकारक पदार्थ स्वत: नहीं छन पाते।

आगे चलकर यही खून के हानिकारक पदार्थ जहर बन जाते हैं। 

डायलिसिस इसी समस्या का समाधान है क्योंकि इसमें 

कृत्रिम यंत्रों के जरिए खून को शरीर से निकाल कर फिर

साफ कर के वापस शरीर में भेज दिया जाता है।

शरीर के गंदे खून को साफ करने वाले कृत्रिम छन्नों को डाइलाइजर कहा जाता है।

इस प्रक्रिया में रोगी का गंदा खून उसकी किसी धमनी

से एक सिरिंज के माध्यम से डाइलाइजर में भेेजा जाता है।

यहां पर रक्त साफ होकर  रोगी की किसी शिरा द्वारा रोगी के शरीर में वापस भेजा जाता है।

इस सम्पूर्ण क्रिया को ही डायलिसिस कहा जाता है। 

 

हमारा शरीर गर्म क्यों रहता है? 

क्या आप जानते हैं इन बातों के क्रम में यह जानना भी

बेहद खास है कि आखिर वह कौन सा कारण या प्रक्रिया है

जिसकी बदौलत हमारा शरीर गर्म रहता है ?

भाइयों बहनों इसका उत्तर यह है कि हमारे शरीर को गर्मी भोजन से प्राप्त होती है।

हम जो कुछ भी खाते हैं वह आक्सीकरण की प्रक्रिया के कारण ऊष्मा में बदल जाता है।

भोजन के द्वारा पैदा हुई इस ऊर्जा से हमारा आपका सबका यानी संसार के हर प्राणी का शरीर

काम करने के लिए जरूरी ऊर्जा प्राप्त करता है।

एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में प्रतिदिन करीब 2500 कैलोरी ऊर्जा  पैदा होती है।

हमें यह भी जानकारी रखना चाहिए कि इसी ऊर्जा से हमारा शरीर पूरे दिन कार्य करता रहता है।

इतना ही नहीं इसी ऊर्जा से हमारा शरीर गर्म भी रहता है।

शरीर का तापमान मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होता है।

लेकिन जब मस्तिष्क के ताप नियंत्रण में कोई कमी आ जाती है

तो मनुष्य कांपने लगता है या बुखार आ जाता है।

हमारे शरीर के गर्म रहने से हमारे शरीर से सदैव विकिरण द्वारा

ऊष्मा बाहर निकलती रहती है। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 06052018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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