आइए जानते हैं कि

 आइए जानते हैं कि ह्वेल मछली क्यों नहीं  है? 

क्या आप जानते हैं सामान्य ज्ञान की ये बातें कि ह्वेल मछली क्यों नहीं है?

ह्वेल एक स्तनधारी प्राणी है,

ह्वेल का विकास विशालकाय जंतुओं डायनासोर से माना जाता है।

ह्वेल का आकार सभी जंतुओं से भारी होता है।

ह्वेल फेफड़ों से सांस लेती हैै, मछलियों की भांति इसके गिल्स नहीं होते।

ह्वेल बच्चे पैदा करती है तथा उन्हें दूध पिलाती है।

इन्हीं सब गुणों के कारण इसे मछली नहीं माना जाता है।

इसे विज्ञान जगत में एक स्तनधारी प्राणी माना जाता है। 

मछलियां पानी में किस तरह सांस लेती  हैं? 

मछलियां गिल्स द्वारा सांस लेती हैं।

मछलियों में सांस लेने के लिए फेफड़े नहीं होते।

मछलियां सांस लेने के लिए मुंह में पानी लेती हैं।

यह पानी गलफड़ों से होता हुआ बाहर निकल जाता है।

पानी में पहले से ही घुली हुई आक्सीजन गलफड़ों की

कोशिकाओं द्वारा सोख ली जाती है।

यह आक्सीजन गलफड़ों में बहने वाले खून में मिल जाती है

फिर पूरे शरीर में भ्रमण करती है।

इस प्रक्रिया से मछली के शरीर का खून भी शुद्ध होता है और, 

इस तरह उसके सांस लेने की क्रिया भी पूरी हो जाती है। 

सर्दियों में मेढक कहां चले जाते हैं?

मेढक के शरीर का तापमान कभी एक समान नहीं रहता।

यह मौसम के अनुरूप बदलता रहता है।

जाड़े के मौसम में जैसे ही तापमान में बदलाव होता है

मेढकों के शरीर का तापमान भी 

कम होने लगता है

जिसके कारण इनकी जैविक क्रियाएं कम होने लगती हैं।

इस स्थिति में ये खुद को जिंदा बनाए रखने के लिए

तालाबों या जल स्रोत के नीचे या फिर कहीं भी मिट्टी के अंदर खुद को बंद कर लेते हैं।

इस अवस्था में यह अपने जीवन को बचाए रखने के

लिए शरीर में जमा चर्बी को और ग्लाइकोजन को प्रयोग में लाते हैं। 

क्या सभी प्रकार के सांप जहरीले ही होते   हैं? 

क्या आप जानते हैं सामान्य ज्ञान की ये बातें कि क्या सभी प्रकार के सांप जहरीले होते हैं?

का जवाब यही है कि नहीं, सभी प्रकार के सांप जहरीले नहीं होते।

भारत में सांपों की करीब 200 से ज्यादा प्रजातियां

पाई जाती हैं, जिनमें केवल 4 प्रजातियों को ही जहरीला माना जाता है।

कोबरा, करैत, सास्केल वाइपर और रसल वाइपर जहरीली जातियां हैं।

सांप में पाए जाने वाले जहर को वेनम कहा जाता है।

सांप के सिर के दोनों ओर आंखों के थोड़ा नीचे विष ग्रंथियां पाई जाती हैं। 

नींद में हमारे शरीर में क्या होता है? 

हमारा मस्तिष्क बेहद जटिल क्षेत्र होता है, इसे हम निद्रा केंद्र भी कह सकते हैं।

आपको पता होगा कि खून में मिला कैल्सियम इस क्षेत्र को नियंत्रित करता है।

जब कैल्सियम की एक निश्चित मात्रा खून के द्वारा इस क्षेत्र में पहुंचा दी जाती है तो हमें नींद आ जाती है।

नींद की अवस्था में हमारे ह्रदय की धड़कन कुछ धीमी हो जाती है।

यकृत एवं गुर्दा अपना काम सुचारू रूप से करते रहते हैं।

इस अवस्था में पाचन संस्थान अपनी सामान्य स्थिति में होता है।

नींद की अवस्था में हमारे शरीर का तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है। 

महिलाओं की आवाज सुरीली क्यों होती है? 

क्या आप जानते हैं सामान्य ज्ञान की ये बातें कि महिलाओं की आवाज सुरीली क्यों होती है?

इसका एक सम्यक उत्तर यह है कि आजकल

सामान्यतः लड़के लड़की की वयस्कता तेरह साल की अवस्था में प्रारंभ हो जाती है।

इस अवस्था में हमारे शरीर की ग्रंथियां सेक्स हार्मोन पैदा करती हैं।

इन हार्मोंस के पैदा होने से लड़के और लडकियों के शरीर में एक दो नहीं

बल्कि तमाम तरह के परिवर्तन पैदा होते हैं।

इस उम्र में लडकों की आवाज में भारीपन आने लगता है

क्योंकि उनकी कंठ नली की मोटाई और लम्बाई बढ़ जाती है।

जबकि यह आवाज भारी करने वाला हार्मोन लडकियों में पैदा ही नहीं होता।

फलस्वरूप लडकियों की आवाज पहले जैसे ही भारी बनी रहती है। 

 

नींद में खर्राटे क्यों आते हैं? 

जब हम जगते रहते हैं तब हमारे मुंह के अंदर गले के पास की त्वचा सख्त और तनी हुई रहती है

लेकिन सोते समय यह त्वचा कुछ ढीली हो जाती है।

मुंह से सांस लेने पर यही ढीली त्वचा वायु के दबाव द्वारा कंपन करने लगती है।

त्वचा के इसी कंपन के फलस्वरूप एक आवाज निकलने लगती है।

इसी आवाज को दूसरे लोग खर्राटे के रूप में सुनते हैं।

यदि हम सोने से पहले अपनी नाक और मुंह ठीक से साफ कर लें तो यह कम हो सकते हैं। 

क्या पेड़ पौधे मांसाहारी होते हैं? 

आइए जानते हैं कि क्या पेड़ पौधे भी मांसाहारी होते हैं?

जी हां, इस सवाल का जवाब यही है कि हां पेड़ पौधे भी मांसाहारी होते हैं।

ये पेड़ पौधे अपने संपर्क में आने वाले कीड़े मकोड़ों को खा जाते हैं।

इन पौधों की हकीकत यह होती है कि यह खुद से प्रोटीन नहीं बना पाते

इसीलिए  यह कीड़ों मकोड़ों को अपना शिकार बनाते हैं ताकि

इनकी प्रोटीन की अपनी जरूरत पूरी हो सके।

भारत में पाया जाने वाला इंडियन पाइप नामक पौधा एक ऐसा ही मांसाहारी पौधा है। 

एंटीबायोटिक्स क्या है? 

एंटीबायोटिक्स दवाएं वास्तव में कुछ विशेष प्रकार की औषधियां होती हैं ।

इनका मुख्य काम होता है शरीर में रोग प्रतिरोधक

क्षमता को बढा कर रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं का विनाश करना।

दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा पेनिसलीन थी। यह दवा निमोनिया,

खांसी और साथ ही साथ गले की सूजन में भी कारगर सिद्ध हुई थी।

स्टट्रेप्टोमाइसि, एम्पिसिलीन, टेट्रासाइक्लिन, क्लोरोमाइस्टीन वह औषधियां हैं

जो आज एंटीबायोटिक दवाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।

एक खास बात यह है कि दुनिया की हर एंटीबायोटिक दवा फफूंद तथा जीवाणुओं से बनती हैं । 

विटामिन हमारे शरीर के लिए क्यों आवश्यक हैं?

हमारे शरीर के लिए इस पूरे संसार में जो सबसे
जरूरी चीज है वह है हमारे शरीर के लिए संतुलित आहार। 

संतुलित आहार ही हमें समस्त जैविक क्रियाओं के संचालन योग्य

बुद्धि विवेक और शक्ति देता है।

 हमारे शरीर के लिए जो और जैसा भी संतुलित आहार चाहिए

उसमें यह आवश्यक है कि कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, जल, विटामिन, लवण और खनिज हों।

यदि हम विटामिन सहित संतुलित आहार के सभी तत्वों के बारे में बात करें

तो सचमुच यह सब हमारे शरीर और हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी हैं।

यह सभी तत्व हमारे शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत देते हैं।

जहां तक बात विटामिन्स की है तो यह कई प्रकार की होती हैं,

जैसे विटामिन ABCDEK आदि।

बी वन से लेकर बी सिक्स, सेवन तथा विटामिन ट्वैल्ब तक होती हैं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11102018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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