जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य 

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य यह है कि

अगर हम आप सबने अपने अपने आचरण को संभाल नहीं पाए तो

वह दिन दूर नहीं जब हमारे क्रिया कलाप ही हमारे जान के असली दुश्मन नजर आएंगे।

जलवायु परिवर्तन और धरती का भविष्य यह भी है कि

हम एक तरफ जंगली पन को छोड़कर निरंतर विकसित हुए हैं, 

तो दूसरी तरफ विकसित होकर एक बार फिर से जंगली होने का इंतजाम कर रहे हैं।

यह कोई नई बात नहीं है कि दुनिया के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर से

हमारे आप के आचरण को धरती के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

साथ ही साथ यह भी बता दिया है कि अगर हम सब मनुष्य लोग

इसी तरह मस्त रहकर धरती को पस्त करते रहे तो एक दिन ऐसा भी आएगा

जब इस धरती से मनुष्य का अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा। 

जलवायु परिवर्तन की ताजा रिपोर्ट

जलवायु परिवर्तन की ताजा रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र संघ के जलवायु परिवर्तन पर बने

अंतर सरकारी पैनल अर्थात आई पी सी सी ने पेश किया है ।

आई पी सीसी ने अपनी इस खास रिपोर्ट में पूरी धरती के हर मनुष्य को

लगभग चेतावनी देते हुए आगाह किया है कि हम बिना सोचे समझे

केवल अपने लाभ और केवल लाभ की खातिर कार्बन उत्सर्जन को लगातार बढा रहे हैं

लेकिन अगर इस पर जल्द ही कोई लंगर या लगाम न लगा पाए

तो धरती का मौजूदा तापमान आधा या फिर एक डिग्री तक बढ़ सकता है।

इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जो अनजान हैं

वह आधा या एक डिग्री का नाम सुनकर शायद खीसें निपोर दें

लेकिन जिन्हें आधा एक डिग्री की भयावहता पता है उन्हें इस बात का अंदाजा लग सकता है कि

आने वाले भविष्य में, धरती में रहने वाले हर व्यक्ति को

केवल भयावह लू के थपेड़ों की ही मार नहीं सहन करनी पड़ेगी

बल्कि पानी की किल्लत और इस किल्लत से भी बड़ी महा किल्लत यानी

अनाज की परेशानी से भी हर आदमी को दो चार होना ही पड़ेगा।

रिपोर्ट और क्या कहती है? 

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य बताने वाली यह रिपोर्ट

धरती में रहने वाले मनुष्य की हरकत की असलियत बताते हुए यह भी कहती है कि 

जिस तरह से धरती लगातार गर्म होने की ओर अग्रसर है

उससे तो यही प्रतीत होता है कि आने वाले भविष्य में दुनिया में

करो या मरो की स्थिति का ही बोलबाला होगा।

इस लिए अगर पूरी दुनिया की आदमजात की आदमीयत को बचाना है

तो धरती के बढ़ते हुए तापमान को हमें रोकना ही होगा।

क्योंकि यही एकमात्र उपाय है जिससे इस धरती का भविष्य बच सकता है।

इसके अलावा हम चाहे जितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर लें

या कितने ही बड़े बड़े कारनामे कर लें हमारी की गई करतूत के कारण

हम मर रही अपनी ही धरती को किसी भी जरिये कतई जीवन दान नहीं दे सकते।

रिपोर्ट को सरल शब्दों में समझें तो इसका मतलब यह है कि

अगर धरती में इसी तरह कार्बन उत्सर्जन बेलगाम

बढता गया तो आधा या एक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ सकता है। 

और यह तापमान पूरी दुनिया को निगलने या खत्म करने के लिए पर्याप्त है ।

इतना ही नहीं करोड़ों लोग लू के थपेड़ों की चपेट में आ जाएंगे।

पानी की किल्लत इस कदर बढ़ सकती है कि इसका मिलना ही दूभर हो जाएगा।

तटीय इलाकों में बाढ़ ही नहीं आएगी बाढ़ की चपेट में आने से

तटीय इलाकों का अस्तित्व ही नष्ट हो जाएगा।

कोरल रीफ न केवल पूरी तरह से खत्म हो सकती हैं बल्कि

धरती का बढ़ा हुआ आधा या एक डिग्री तापमान

आर्कटिक महाद्वीप की बर्फ को भी पिघलाकर रसातल में पहुंचा देगा। 

आर्कटिक की बर्फ रसातल में

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य बताने वाली 

संयुक्त राष्ट्र संघ की यह रिपोर्ट कहती है कि

जिस तरह से धरती में बेलगाम कार्बन का उत्सर्जन जारी है

धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस रहने पर भी

गर्मियों तक के मौसम में बर्फ समुद्र पर बनी रह सकती है

लेकिन इसके बाद यदि धरती का आधा डिग्री भी तापमान बढ़ गया तो

ध्रुवीय भालू, ह्वेल, सील्स और तमाम तरह के दुर्लभ 

समुद्री पक्षियों तक के आवास खतरे में पड़ जाएंगे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इससे आर्कटिक मे यद्यपि

मछलियों की संख्या में काफी अधिक इजाफा होगा लेकिन 

यहां पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि मछलियों का

इस्तेमाल करने वाले ही नहीं बचेंगे तो मछलियों का यह धरती अचार डाल कर क्या करेगी?

आगे यह रिपोर्ट यह भी कहने से गुरेज नहीं करती कि

यदि हमारी धरती का तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाए

तो गर्मियों के दौरान धरती की  बर्फ दस गुना से भी ज्यादा कम हो सकती है। 

गर्मी की खतरनाक मार

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य बताने वाली आई पी सी सी की ताजा रिपोर्ट

सारे संसार को आगाह करते हुए कहती है कि धरती पर आज और अभी

जिस तरह बेलगाम गति से कार्बन का अथाह उत्सर्जन जारी है

यदि उसे हम मनुष्य रोक न पाए तो अभी तो कभी-

कभी ही यह समाचार आता है कि यह वर्ष सबसे गर्म रहा

लेकिन जल्द ही यह हर साल का नियम बन जाएगा

कि गर्मी के भीषण थपेड़ों की मार हम सब हर साल महसूस करेंगे।

 

अभी केवल हम 2015 /16 /17 /18 ही याद रखते हैं गर्मी की मार के लिए

बाद में यह भी रूटीन बन जाएगा।

2007 में दक्षिणी पूर्वी यूरोप में गर्मी ने जो कहर बरपाया था

उसे आज तक कोई भूल नहीं पाया है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस की

स्थिति में दुनिया की 14% आबादी गर्मी से हलकान रहेगी

तो 2.0 डिग्री सेल्सियस तापमान की बढ़ोतरी में दुनिया की 37% आबादी गर्मी में परेशान हो जाएगी।

यह रिपोर्ट इस बात का भी खुलासा करती है कि 

ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भीषणतम गर्मी वाले दिन आम रहेंगे। 

जल बिन जीवन की कल्पना

इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट का अति महत्वपूर्ण कथन यह है कि

1.5 डिग्री सेल्सियस धरती का तापमान रहने पर

करीब 35 करोड़ से अधिक आबादी गंभीर सूखे से ग्रसित होगी। 

जब कि अगर कहीं इस धरती का तापमान 2.0 डिग्री सेल्सियस हो गया, 

तब कुल 41 करोड़ से अधिक शहरी लोग त्राहिमाम करते नजर आएंगे।

इतना ही नहीं ऐसी स्थिति में भूमध्यरेखीय क्षेत्र भी सूखे से सर्वाधिक हलकान होंगे।

पादप-जंतु प्रजातियों का संकट 

जहां तक बात पादप जंतुओं और पादप प्रजातियों की है तो धरती का तापमान

अगर 1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जाता है

तो 6%से भी ज्यादा कीटों की प्रजातियों पर संकट के

काले बादल छाएंगे और इनकी कुल आबादी सिर्फ आधी बचेगी।

धरती पर जीवित 4% कशेरुकी जीवों की आबादी आधी रह जाएगी।

लेकिन याद रखने वाली बात यह भी है कि अगर धरती का तापमान

2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया

तो कीट प्रजातियों की 18% आबादी तबाह हो जाएगी।

धरती पर मौजूद 16 %पादप आधे रह जाएंगे। 

कोरल रीफ भी असर होगा 

धरती पर बेलगाम कार्बन उत्सर्जन की काली कहानी बताने वाली रिपोर्ट यानी

जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट और धरती का भविष्य बताने वाली

संयुक्त राष्ट्र संघ की यह ताजा रिपोर्ट यह भी कहती है

कि 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान भी धरती के लिए व्यापक धन जन की हानि वाला है

लेकिन अगर यह स्तर 2.0 डिग्री सेल्सियस वाला हो जाता है

तो कोरल रीफ का खात्मा सुनिश्चित है।

इतना ही नहीं जहां 1.5 डिग्री सेल्सियस के तापमान

पर 3.1 से 6.9 करोड़ तक लोग समुद्र तल के बढने से गंभीर प्रभावित होंगे

वही इस तापमान के 2.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज करने पर 8 करोड़ तक लोग नेस्तनाबूद हो जाएंगे।

फसलों पर भयंकर असर होगा और पैदावार घट जाएगी।

इस तरह की भीषण परेशानी सहारा अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी एशिया,

मध्य व दक्षिण अमेरिका में ज्यादा असर कारक होगी।

इस तरह की भीषण परिस्थिति में 2.5 लाख करोड़ डॉलर की दरकार

ऊर्जा क्षेत्र मे सालाना निवेश की होगी ताकि लोगों को गर्मी से निजात दिलाई जा सके ।

इतना ही इतने प्रकार के कहर होंगे जिनको गिनना भी मुश्किल काम होगा। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 09102018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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