चक्रवाती तूफान तितली के बहाने

चक्रवाती तूफान तितली के बहाने 

चक्रवाती तूफान तितली के बहाने ही सही बंगाल की

खाड़ी में में एक बार पुनः चक्रवाती तूफान का कहर

जारी है।

प्रमाणिक सूचना के अनुसार गुरुवार 11 अक्टूबर

2018 को प्रातः, 

ओडिशा के गोपाल पुर तथा आंध्र प्रदेश के पासा के

पास स्थित तट को इस चक्रवाती तूफान ने पार कर लिया था।

इसकी गति 140 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा थी ।

इस तितली चक्रवाती तूफान ने दोनों राज्यों के तटीय

जिलों में भयंकर तबाही मचाते हुएन केवल सैकड़ों

पेड़ तहस नहस कर दिया

बल्कि बिजली के खंबों को भी उखाड़ कर फेंकने में

देर नहीं लगाई।

तूफान के साथ साथ भारी वर्षा ने कई इलाकों को भी

लबालब भरकर

जनजीवन को परेशानी में डाल दिया।

आंध्र प्रदेश में इस तितली चक्रवाती तूफान की चपेट में

आने से 8 लोगों के हताहत होने की खबर है। 

लेकिन ओडिशा में अभी तक जन हानि की कोई

सूचना नहीं है।

तितली नामक इस चक्रवाती तूफान ने आंध्रप्रदेश के

श्री काकुलम और विजयनगरम में तबाही मचाने के साथ साथ 

ओडिशा के 8 जिलों में कहर मचाया है।

ओडिशा के राहत आयुक्त

बीपी सेठी के अनुसार गंजाम, गजपति, खुर्दा  पुरी 

जगत सिंह पुर, केंद्र पाड़ा,

भद्रक व बालासोर जिलों में चक्रवाती तूफान तितली

का असर देखा गया है।

जहां तक भारत में विश्व स्तरीय चक्रवाती तूफानों के

इतिहास की बात है तो 2005 में

फानूस नामक चक्रवाती तूफान भारत के अंडमान में आया था।

2009 में बंगाल की खाड़ी में फ्यान नामक चक्रवाती

तूफान आया था।

लैला नामक तूफान 2010 में भारत के पूर्वी तटीय

भाग में आया था।

2011 में तमिलनाडु तथा पदुचचेरी में थाने नामक

चक्रवाती तूफान आ चुका है।

फेलिन तथा बियारू नामक चक्रवाती तूफान 2013 में

क्रमश

ओडिशा तथा बंगाल की खाड़ी में आ चुके हैं।

चक्रवात कोमेन बंगाल की खाड़ी में तथा अशोबा

चक्रवात भी भारत में 2015 में आ चुके हैं।

रोआनू तथा वरदान वह भयंकर चक्रवाती तूफान हैं जो

भारत में बंगाल की खाड़ी में 2016 में अपना भयंकर

कहर बरपा चुके हैं।

इतना ही नहीं तितली चक्रवाती तूफान के पहले

2017 में बंगाल की खाड़ी में मोरा नामक चक्रवाती

तूफान आ चुका है।

चक्रवात किसे कहते हैं? 

दोस्तों,, हम ने चक्रवाती तूफान तितली के बहाने काफी हद तक यह तो जान गए हैं कि

भारत में इससे भी पहले कौन कौन भयंकर चक्रवाती तूफान कहां कहां और कब कब आ चुके हैं। 

लेकिन अभी भी असली सवाल बाकी है कि आखिर यह चक्रवाती तूफान क्या होता है?

चक्रवाती तूफान को जानने के लिए हमें पहले चक्रवात को जानना होगा, 

इसलिए आइए जानते हैं कि चक्रवात क्या होता है?

चक्रवात क्या होता है इसे भूगोल की भाषा में कहें तो वायुमंडल में मिलने वाले

महत्वपूर्ण पवन विक्षोभों को चक्रवात की संज्ञा से अभिहित किया जाता है।

 चक्रवात वास्तव में निम्न वायुदाब के क्षेत्र होते हैं और इनके चारों ओर

संकेंद्रीय सम रेखाएं पाई जाती हैं।

इनमें अंदर से बाहर की ओर जाने पर वायुदाब क्रमशः बढता जाता है।

अतः परिधि से केंद्र की ओर तीव्र गति से पवन का संचार होता है।

चक्रवात प्राय: गोलाकार, अंडाकार अथवा अंग्रेजी के v अक्षर आकार वाले होते हैं।

इसी कारण इन्हें लो low गर्त depression या ट्रफ trough कहते हैं।

चक्रवात की दिशा उत्तरी गोलार्ध में घड़ी की सुइयों के

विपरीत तथा दक्षिणी गोलार्ध में घड़ी की सुइयों के समान होती है।

चक्रवात को मौसम और जलवायु की दृष्टि से इस लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है

क्योंकि यह जहां भी पहुंचते हैं, वहाँ वर्षा और तापमान में अचानक परिवर्तन आ जाता है।

जहां तक बात चक्रवात के पैदा होने का है तो इनका विकास पछुवा पवनों से होता है।

जितने भी प्रकार के चक्रवात होते हैं उनमें सबसे ज्यादा गति

टारनेडो चक्रवात की मानी जाती है। 

चक्रवातों के प्रकार 

प्रायः स्थिति के आधार पर चक्रवातों को दो भागों में बांटा गया है जैसे:

शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात और ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात।

जहां तक बात शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात की है तो ये गोलाकार,

अंडाकार या फिर वी आकार के होते हैं।

इन्हें लो, गर्त या ट्रफ कहा जाता है।

जहां तक बात इनके व्यास की होती है तो एक आदर्श

शीतोष्ण चक्रवात का दीर्घ व्यास 1920 किलोमीटर होता है।

इसका मतलब यह हुआ कि यह चक्रवात जहां भी जिस केंद्र में पैदा होगा

उसके चारों ओर 1920 किलोमीटर की परिधि में अपना प्रभाव दिखा सकता है।

इसका लघु व्यास 1040 किलोमीटर तक भी पाया गया है।

कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि ये शीतोष्ण

कटिबंधीय चक्रवात 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक भी विस्तृत देखे गए हैं।

शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात 35 से 65 अक्षांश के मध्य दोनों गोलार्धों में उत्पन्न होते हैं।

यह पछुवा पवनों के प्रभाव से पश्चिम से पूर्व दिशा में चलते हैं

और मध्य अक्षांशों के मौसम को बड़ पैमाने पर प्रभावित करते हैं।

दोस्तों, शायद आपको पता होगा कि शीतोष्ण

कटिबंधीय चक्रवातों के चलने के मार्ग को झंझा पथ या stormtrack कहते हैं।

बात अगर हम इनकी गति की करें तो इनकी सामान्य

गति 32 किलोमीटर से 48 किलो मीटर प्रति घंटे तक होती है। 

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात 

कर्क रेखा व मकर रेखा के मध्य उत्पन्न होने वाले चक्रवातों को ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है।

निम्न अक्षांशों के मौसम विशेषकर वर्षा पर इन चक्रवातों का विशेष प्रभाव होता है।

ग्रीष्म काल में केवल गर्म सागरों के ऊपर इनकी उत्पत्ति, 

अंतर ऊष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र के सहारे उस समय होती है

जब यह खिसककर 5 स 30 डिग्री उत्तरी अक्षांश  तक चला जाता है।

इन प्रदेशों की गर्म व आर्द पवनें जब संवहनीय प्रक्रिया से ऊपर उठती हैं

तो मूसला धार वर्षा होती है।

इन चक्रवातों की ऊर्जा का मुख्य स्रोत संघनन की गुप्त ऊष्मा है।

ऊपर उठने वाली वायु जितनी गर्म व आर्द होगी चक्रवात उतना ही तूफानी होता है।

इन चक्रवातों का व्यास सामान्य रूप से 80 से 300 किलोमीटर होता है,

लेकिन कुछ इतने भी छोटे होते हैं जिनका व्यास 50 किलोमीटर से भी कम होता है।

इनकी आकृति सामान्यतः वृत्ताकार या अंडाकार होती है।

इनमे समदाब रेखाओं की संख्या बहुत कम होती है।

कुछ क्षीण चक्रवात होते हैं जिनकी गति 32 किलोमीटर प्रति घंटा भी होती है।

हरिकेन की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।

प्रति चक्रवात किसे कहते हैं 

दोस्तों  चक्रवात के साथ साथ प्रति चक्रवात का भी अस्तित्व होता।

जहां तक बात प्रति चक्रवात के प्रकृति की है तो यह भी हवाओं का एक चक्रीय प्रवाह होता है,

लेकिन चक्रवात के विपरीत इसके केंद्र में उच्च वायुदाब रहता है।

इसमें परिधि से बाहर की ओर क्रमशः घटते वायुदाब की संकेंदरीय समदाब रेखाएं होती हैं,

जिसके परिणाम स्वरूप वायु का प्रवाह केंद्र से परिधि की ओर होता है।

अतः प्रति चक्रवात किसी क्षेत्र में उच्च दाब क्षेत्र का निर्माण करता है

तथा स्थिर मौसमी दशाओं की ओर संकेत करता है। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 12102018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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