हम सभ्य बनें या सफल बनें?

हम सभ्य बनें या सफल बनें? 

हम सभ्य बनें या सफल बनें?

यह प्रश्न इतना रोचक और ज्ञानवर्धक है कि शायद ही कोई और प्रश्न हो।

क्योंकि आप अगर जरा सी गहराई में जाकर देखेंगे तो

यह प्रश्न अपने आप में एक नहीँ बल्कि दो प्रश्नों का समूह है। 

हम सफल बनें या सभ्य बनें?

इस प्रश्न का पहला प्रश्न यह है कि हम सफल बनें या नहीं? 

तो दूसरा प्रश्न यह भी है कि क्या हमें सभ्य बनना चाहिए?

हम सभ्य बनें या सफल इन्हीं दोनों प्रश्नों से मिलकर बना है

जिस यहां हमें सम्यक विचार करना है।

आइए जवाब तलाशते हैं 

हम सभ्य बनें या सफल बनें?

दोस्तों, आज वर्तमान में किसी से भी यह सवाल किया

जाए तो उसका एकमात्र उत्तर यही होगा कि हम सफल होना चाहते हैं

सभ्य  तो बाद में हुआ जा सकता है क्योंकि जब व्यक्ति सफल होता है तो सभ्यता आ ही जाती है।

एक और तथ्य यह है कि ऐसा विचार हम में से अधिकांश लोगों का है।

आप किसी से भी पूछिए कि आप क्या बनना चाहते हैं तो उसका उत्तर यही होगा कि

हम सभ्य सफलता के बाद बन ही जाएंगे इस लिए हमें पहले सफल ही बनना है।

देखा जाए तो पहली नजर में यह बात सही भी लगती है कि

इस दुनिया में सफलता सबसे पहले जरूरी है सभ्यता तो बाद में आ ही जाती है।

लेकिन जरा ठहरिए, अगर आप भी कुछ इसी तरह सोचते हैं कि

पहले सभ्यता से भी आवश्यक सफलता है तो आप गलत हैं ।

सफलता से सभ्यता जरूरी नहीं 

हम सभ्य बनें या सफल बनें? 

दोस्तों, इसे आप इस तरह समझ सकते हैं ।

पंजाब और हरियाणा देश के सबसे सम्पन्न प्रदेशों में हैं ।

उत्तर प्रदेश का नोएडा गाजियाबाद सबसे सम्पन्न जिले हैं यूपी के

बावजूद इन सभी जगहों में लिंगानुपात आश्चर्य जनक रूप से कम हुआ है।

एक तरफ यहां सम्पन्नता ज्यादा हुई है तो दूसरी तरफ लिंगानुपात लगातार नीचे गिरा है

दूसरी तरफ केरल में सम्पन्नता तो नहीं बढ़ी लेकिन वहां शिक्षा लगातार बढी है।

फलस्वरूप वहां देश में सबसे अच्छा लिंगानुपात देखा गया है।

इस उदाहरण से एक बात सामने आती है कि आप सफल या सम्पन्न हो सकते हैं

लेकिन सभ्य भी होंगे या शिक्षित भी होंगे यह बात कतई जरूरी नहीं है।

मेरे कहने का मतलब यही है कि यदि हम पहले सफल बनेंगे इसके बाद सभ्य

तो मामला सही नहीं होगा इसलिए हमें पहले सभ्य बनने की कोशिश करनी चाहिए

सफलता स्वयं आपके पास चलकर आएगी। 

सफलता से सभ्यता जरूरी नहीं 

दोस्तों अगर आप सभ्य बनें या सफल बनें का सम्यक जवाब चाहते हैं तो

जरा गौर से इस तस्वीर को देखिए जिसमें किसी अस्पताल में भर्ती

जरूरतमंद एक आदमी को ये मोटी चमड़ी वाले चार लोग मिलकर

दो मरियल केले कैमरे के सामने सगर्व भेंट कर रहे हैं।

यह तस्वीर सफलता तो दिखाती है लेकिन सभ्यता नहीं।

सफलता इस लिए कि यह वह लोग होंगे जो सज्जनता,

सह्रदयता पैसे के दम पर पाना चाहते हैं।

इन्हें लगता है कि कुछ पैसे खर्च करके हम अपनी सम्पन्नता के बल पर

सभ्य बनने की कोशिश जरूर कर सकते हैं लेकिन

सच यह है कि यह अपने मकसद में कतई सफल नहीं कहे जा सकते हैं। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 15102018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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