तथ्यों के आइने में भारतीय पशुपालन

तथ्यों के आइने में भारतीय पशुपालन 

तथ्यों के आइने में भारतीय पशुपालन नामक इस पोस्ट का मकसद, 

आज आपको भारतीय पशुपालन के बारे में चर्चित कुछ खास तथ्यों को बताना है।

शायद आप इस तथ्य से जरुर परिचित होंगे कि भारत में दुनिया का सर्वाधिक पशुधन है।

इतना ही नहीं भारत में जितना दुग्ध उत्पादन होता है उतना 

दुनिया के किसी भी देश में नहीं होता।

तो आइए, इसी तरह के ऐसे और तथ्य जानते हैं जो कभी न कभी

हमें प्रतियोगी परीक्षाओं में भी परेशानी में डाल दिया करते हैं।

 

जो बच्चे आई ए एस या फिर राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं या फिर

जो खास तौर परआई ए एस की प्रारंभिक परीक्षा में बैठ चुके हैं, 

वह भलीभांति जानते हैं कि, भारतीय कृषि और पशुपालन नामक 

पाठ्यक्रम का भाग हमें ज्यादातर उलझन भरा ही प्रतीत होता है।

यह बात मैं अपने निजी अनुभव से भी बता सकता हूं

कि जब भी इस तरह के सवालों का सामना होता है तो बहुत ही असहज प्रतीत होता है। 

भारत में पशुपालन

देश में दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद आदेश 1992 भारत सरकार द्वारा जून 1992 में अधिसूचित किया गया था।

जिसे अब मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट रेगुलेशन अंडर सेक्शन 99 के अंतर्गत 

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा लागू किया गया है।

CPPTC यानी सेंट्रल पोल्ट्री परफॉर्मेंस टेस्टिंग सेंटर गुड़गांव हरियाणा में स्थित है ।

उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय वेनेटरी एंड एनीमल साइंस

विश्व विद्यालय मथुरा उत्तर प्रदेश में है।

देश में पशुधन क्षेत्र का याानी पशुपालन का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 4%से भी ज्यादा है।

देश के कुल कृषि उत्पादन में पशुधन उत्पाद का हिस्सा 27.7% है।

सन 2013/14 में देश में 1377 लाख टन दुग्ध उत्पादन किया गया

जो 1990/91 से 3.95% औसत वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

भारत में आपरेशन फ्लड नामक कार्यक्रम जो विश्व का सबसे बड़ा एकीकृत डेरी विकास कार्यक्रम है, 

इसे 1970 में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड द्वारा शुरू किया गया था।

यह कार्यक्रम ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को शहरी

उपभोक्ताओं से संबद्ध करने के लिए तैयार किया गया है।

आपको पता होना चाहिए कि आपरेशन फ्लड के अब तक तीन चरण पूरे हो चुके हैं।

भारत में यह परियोजना विश्व बैंक की वित्तीय सहायता तथा

यूरोपीय आर्थिक समुदाय  से मखनियां दुग्ध चूर्ण और बटर आइल के रूप में

प्राप्त वस्तु सहायता से कार्यान्वित हो रही है।

डेरी विकास के लिए एक प्रौद्योगिकी मिशन शुरू किया गया है। 

इसका उद्देश्य डेयरी विकास को क्षेत्रीय विकास के विभिन्न

विकासात्मक कार्यक्रमों के साथ समन्वित और सुव्यवस्थित करना है।

भारत वर्तमान में पूरी दुनिया का कुल 17% दुग्ध उत्पादन करता है, 

इसीलिए आज की डेट में भारत पूरी दुनिया में सबसे 

ज्यादा दुग्ध उत्पादन कर्ता देश है।

मार्च 2012 में राष्ट्रीय डेरी विकास योजना फेज – 1शुरू की गई थी,

जिसका उद्देश्य दुधारू पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढाना,

दूध खरीद के लिए गांव स्तरीय अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार करना था। 

साथ ही साथ दुग्ध उत्पादन करने वालों की डेयरी सेक्टर संबंधी बाजार में

और भी अधिक  पहचान और पहुंच बढाना है।

भारत में एक आकलन के मुताबिक वर्ष 2013/14 में अंडों का 

कुल उत्पादन738900 लाख हुआ था।

ध्यान रखें यह अपने आप में एक रिकार्ड है भारत के लिए ।

भारत में अंडों का सबसे ज्यादा उत्पादन करने के लिए आन्ध्र प्रदेश को अंडे की कटोरी कहा जाता है। 

जहां तक बात भारत में मछली उत्पादन की है तो वर्ष 2013/17 में

मछली उत्पादन95.79 लाख टन था जो 1990/91 की तुलना में 135.66% अधिक था ।

क्या आपको पता है भारत भर में विश्व की 20%से भी ज्यादा गाय भैंसें पाई जाती हैं।

भारत की 17 वीं पशुधन जनगणना रिपोर्ट 2005 के अनुसार

भारत में विश्व की 57 %भैंसें पाई जाती हैं, जो भारत के कुल पशुधन का 16%हैं ।

भारत का पशुधन 

भारत के पशुधन की बात करें तो भारत में विश्व के सबसे ज्यादा गौ मवेशी

तथा विश्व की सबसे ज्यादा भैंसें पाई जाती हैं ।

भारत का विश्व में भेड़ की संख्या की दृष्टि से तीसरा स्थान है, 

तथा बकरियों की संख्या की दृष्टि से दूसरा स्थान है।

भारत में ही नहीं उपयोगिता की दृष्टि से पूरी दुनिया में पशुओं को

 तीन श्रेणियों में बांटा जाता है जैसे दुधारू, भारवाही, द्विकाजी आदि।

साहीवाल, लाल सिंधी, गिर, देवनी  मावलाओ यह गाय की सबसे ज्यादा

दूध देने वाली गायों की प्रजातियां हैं।

होलस्टीन, फीजियन गायों का दुग्ध उत्पादन विश्व मे अन्य गायों की तुलना में सबसे ज्यादा है।

हरियाणा, निमाड़ी, कोसी, राठ, अंगोल कृष्ण घाटी

थारपारकर, कांकरेज आदि ये गायों की द्विकाजी प्रजातियां हैं।

द्विकाजी प्रजाति उसे कहा जाता है जो दो प्रकार के काम करती है, 

जैसे दूध भी देना और काजी बछड़े भी पैदा करना।

नागौरी, कनकथा, मालवी, खेरीगढ़, अमृत महल, इलारी, कांगायाम,

पंवार, हललीकर, गंगा तीरी, बछौर सीरी  डांगी वरमुल आदि भारवाही गाय की किस्में हैं।

भारवाही नस्ल के पशुओं में दुग्ध उत्पादन की क्षमता, कम होती है।

गर्नरी,  जर्सी, अयर, शायर प्रमुख विदेेशी नस्ल हैं ।

मुर्रा, भदावरी, जाफराबादी, मेहसाना, तराई सुरती एवं

नागपुरी भारत में भैंसों की प्रमुख नस्लें हैं ।

क्या आप जानते हैं भारत को भैंस की जन्म स्थली माना जाता है।

इतना ही नहीं विश्व की श्रेष्ठ भैंस भारत में ही पाई जाती हैं।

भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली मुर्रा भैंस है लेकिन

जहां तक सबसे ज्यादा घी देने वाली भैंस भदावरी है।

भारत में भैसों पर अनुसंधान के लिए भारतीय कृषि

अनुसंधान संस्थान ने

केंद्रीय भैंस अनुसंधान की स्थापना हिसार हरियाणा में की है।

ऐसे पदार्थ जो शरीर में विटामिन की क्रिया को या तो

सम्पन्न नहीं  होने देते या फिर विटामिन को नष्ट कर देते हैं।

वे प्रति विटामिन या चयापचयरोधी कहलाते हैं।

हरे चारे की वे किस्में जो काटकर ताजा खिलाई जाती

हैं वेे स्वायलिंग क्राप्स कहलाती हैं।

जब हम हरे चारे को रसीली अवस्था में जमीन के अंदर दबा कर पुनः उपयोग के लिए रखते हैं

तो उसे साइलेज कहा जाता है।

क्या आप जानते हैं कि पशुओं की आयु ज्ञात करने के दो तरीके हैं

या तो पशुओं के सींग के छल्ले गिने जाते हैं

या फिर पशुओं के दांत गिनकर उनकी आयु ज्ञात की जाती है।

जब हम पशुओं की प्रजनन क्षमता खत्म कर देते हैं तो उसे बधिया करण कहा जाता है।

वर्डिजो केस्ट्रेटर तथा एलेस्ट्रेटर बधिया करने की

प्रचलित कुछ प्रमुख विधियां हैं।

जहां तक प्रमुख पशुओं की गर्भ क्षमता और उनके

प्रजनन काल की बात है तो गर्भ काल 280 दिन होती है।

भैंस का गर्भकाल 310 दिनों का होता है।

जहां तक बात पुनः गर्भ धारण करने की क्षमता की

बात है तो गाय तथा भैंस बच्चा देने के बाद 21 दिन बाद पुनः तैयार हो जाती हैं।

गाय तथा भैंस का ऋतुमयी काल 16 से 24 घंटे का होता है।

भारत में पहली बार कृत्रिम गर्भाधान इज्जत नगर

बरेली से 1942 में प्रारंभ हुआ था। 

वीर्य एकत्रित करने की सबसे उपयुक्त विधि कृत्रिम योनि विधि है।

वीर्य की मात्रा बढाने तथा देर तक संरक्षित रखने के

लिए जिन पदार्थों का प्रयोग किया जाता है उन्हें वीर्य तनुकारक कहा जाता है।

अंडपीत फास्फेट अंडपीत साइट्रेट अंडपीत ग्लाइसिन दुग्ध आदि प्रमुख तनु कारक हैं।

वीर्य को एल्कोहल एवं ठोस कार्बन डाई ऑक्साइड के टुकड़े में भंडारित किया जाता है।

वैसे आजकल ठोस कार्बन आक्साइड की जगह तरल नाइट्रोजन का प्रयोग किया जाता है।

इसमे वीर्य को लम्बे समय तक संरक्षित रखा जा सकता है ।

क्या आप इस बात से परिचित हैं कि दुनिया में सबसे ज्यादा भेड़ आस्ट्रेलिया में पाई जाती हैं।

यहां विश्व की कुल भेड़ों की 18% भेड़ पाई जाती हैं।

जहां तक बात भारत की है तो यहां पूरी दुनिया की कुल भेंड़ों का 5% पाई जाती हैं। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 21 102018

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मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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