इंटरनेट दिवस पर अपने अंतर्मन की बातें

इंटरनेट दिवस पर अपने अंतर्मन की बातें 

इंटरनेट दिवस पर अपने अंतर्मन की बातें

इस प्रसंग पर कुछ कहने से पहले आपको यह बताना जरूरी है कि पूरी दुनिया में 

29 अक्टूबर को इंटरनेट दिवस मनाया जाता है।

जहां तक सवाल यह है कि इंटर नेट किसे कहते हैं तो इसका उत्तर यह है कि

यह वास्तव में यह एक ऐसा संजाल है जो एक

कम्प्यूटर को दूसरे कम्प्यूटर से जोड़कर पूरी दुनिया की गतिविधियों को आप या हम तक पहुंचाता है।

इंटर नेट एक विश्व व्यापी सच्चाई है।

जिसका मतलब यह हुआ है कि आज इसने जहां बहुत कुछ सकारात्मक दिया है

तो दूसरी ओर इस बात का कभी पता ही नहीं चला कि

इसने नकारात्मक परिणाम भी न जाने कब से और कहां से देना सीख लिया है।

जी हां हम बचपन में सदैव जब भी स्कूल में परीक्षाएं देते थे तो एक निबंध हर बार लिखते थे।

उस निबंध का शीर्षक था विज्ञान वरदान या अभिशाप?

यह संयोग है कि आज इतने बड़े होने के बाद भी इसी उहा पोह में रहते हैं

कि इंटरनेट हमारे लिए अच्छा है या हमारे लिए बुरा है।

इंटरनेट आज हमारे लिए अच्छा होने के साथ ही साथ बुरा भी है।

इसे आप यदि देखना और समझना चाहते हैं तो पढिए कुछ और भी सच्चाईयां । 

इंटरनेट की एक और सच्चाई 

विज्ञान की भाषा में इंटरनेट क्या है यह शायद किसी को बताने की जरूरत नहीं है

लेकिन विज्ञान के नए नवेले अवतार के बारे में सबको बताने की जरूरत है।

क्योंकि इंटरनेट का यह रूप पहले न तो किसी ने देखा था और न ही इसके बारे में सोचा था।

सूचना, संचार और सुविधा का पर्याय बन चुका इंटरनेट इंसानी रिश्तों पर इस कदर भारी पड़ेगा, 

रोग, दुख और वियोग का सबब बनेगा यह किसी ने सोचना तो दूर

सोचने के बारे में भी भूल कर नहीं सोचा था।

लेकिन आप इस बात से इन्कार नहीं कर सकते कि

कोई ई भी चीज क्यों हो सभी के एक नहीँ दो पहलू ही होते हैं।

वहीं दूसरी सच्चाई ने कमाल यह किया है आज इंटर

नेट दाम्पत्य जीवन का सबसे बड़ा और घातक घरेलू दुश्मन बन गया है।

मनोवैज्ञानिक तो यहां तक कहते हैं कि अगर हमने अपने इंटरनेट के

फालतू जुनून को थाम नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब यह इंटरनेट

तलाक, अलगाव और अपराध का सबसे आधुनिक और सबसे असर वाला कारण बनेगा।

पति पत्नी के रिश्ते जिस तरह चटक चटक कर टूट रहे हैं उसे देखकर तो यही कहा जा सकता हैै कि 

इंटर नेट के मोहपास में जो भी एक बार बंध जाता है उससे निकलना

सबके बस की बात नहीं होती। 

कुछ केस कुछ कहानी सब की जुबानी 

राम मिलन मजदूर है, उसकी बीवी भी घरों में बर्तन झाड़ू करके कुछ न कुछ कमाती है।

एक दिन राम मिलन घर जल्दी आ गया तो उसे उसकी बिवी फोन में किसी से बात करते मिली।

राम मिलन को शक हो गया कि उसकी बीवी किसी और को चाहती है

बस फिर क्या था राम मिलन ने यह भी नहीं देखा कि आज करवा चौथ का व्रत रखे हुए है उसकी पत्नी।

उसने अपने मजदूरी वाले फावड़े से अपनी बीवी को काट डाला।

राम मिलन आज जेल में है लेकिन उसे अफसोश नहीं है अपनी करतूत पर

क्योंकि पुलिस तहकीकात से यह बात पता चली है कि यह सच है कि

राम मिलन की बीवी के किसी से संबंध थे।

इस संबंध में सबसे बड़ी बात यह उभर कर सामने आई है कि सभी लोग

  अवैध संबंध भले ही न विकसित कर पाएं लेकिन

हकीकत यह है कि जो इंटरनेट चलाता है उनमें 90 % लोग  इंटरनेट की लत के शिकार बन रहे हैं। 

 

 

इंटरनेट का मनोवैज्ञानिक 

इंटरनेट आपको आपको वह आजादी और एकांत देता

है जिसमें ताक झाक आप न  चाहें तो कोई नहीं कर सकता। 

पहले हमारे दाम्पत्य में दरार आ भी जाती थी तो समय की धूल से वह भर जाती थी

लेकिन आजकल अगर पत्नी या पति जरा  भी एक दूसरे से दूर हुए

तो उनके वापस आने के चांस हर पल कमजोर होने लगते हैं ।

क्योंकि यहीं पर मनोविज्ञान काम करना प्रारंभ कर देता है ।

यहीं पर पति हो या पत्नी किसी आभासी सुकून के शिकार हो जाते हैं

और अपनी हकीकत की दुनिया की दौलत को गवां बैठते हैं।

जानकार बताते हैं कि जब हम इंटरनेट पर विचरण करते हैं तो

अनायास ही कोई पसंद आ जाता है।

फिर वही पसंद हमारी आदत बन जाती है,  कुछ भी

लेना  देना नहीं होता लेकिन फिर भी हम अपने आभासी सुकून को गंवाना नहीं चाहते।

कभी कभी तो ऐसा भी होता है कि जब इस आभासी लगाव की सच्चाई सामने आती है

तो खुद को भी विश्वास नहीं हो पाता अपनी उस

हकीकत को जानकर जो कभी हमारी हकीकत रही ही नहीं।

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 29102018

 

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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