तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण

तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण

तथ्यो के आइने में  वाल्मीकि रामायण का पहला और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है

कि रामायण का वास्तविक नाम श्रीमद वाल्मीकीय रामायण है।

वाल्मीकि द्वारा रचित होने के कारण इसे वाल्मीकीय कहा गया है।

रामायण का लोकप्रिय नाम रामायण ही है।

रामायण के कुछ अन्य नाम भी हैं जैसे पौलस्त्य वध, दशानन वध आदि।

रामायण के रचनाकार महर्षि वाल्मीकि हैं जिन्हें सारा संसार जानता है।

रामायण की प्रसिद्धि एक आदि महाकाव्य के रूप में है।

रामायण में मूलतः मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा का वर्णन है।

कहीं कहीं रामायण को समस्त काव्यों के बीज की भी मान्यता प्राप्त है।

रामायण का इतिहास में उल्लेख 

तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण की कहानी की कहानी यह है कि यह बेहद प्राचीन है। 

इसकी ऐतिहासिकता का प्रमाण देने वाले एक नहीँ बल्कि अनेक तथ्य हैं।

स्कंदपुराण में रामायण का उल्लेख किया गया है जो

रामायण की प्रासंगिकता और ऐतिहासिकता का द्योतक है।

रामायणतात्पर्यदीपिका वेद व्यास द्वारा रामायण पर  हस्त लिखित टीका है।

इसे व्यास जी ने युधिष्ठिर के आग्रह पर विशेष रूप से लिखा था।

द्रोण पर्व में वाल्मीकि के नाम का उल्लेख करते हुए वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड

यानी लंका कांड के श्लोक 81/128 का वर्णन किया गया है।

गरुण पुराण पूर्व खंड के 143 वें अध्याय में रामायण का सार वर्णित किया गया है।

हरिवंश पुराण में यदुवंशियों द्वारा वाल्मीकि रामायण की कहानी का नाटक खेलने का उल्लेख है।

महाकवि कालिदास ने अपने रघुवंश महाकाव्य में तथा महाकवि भवभूति ने

उत्तररामचरितम में वाल्मीकि का उल्लेख किया है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस, कविता वली,

विनय पत्रिका  बरवै रामायण आदि में रामायण एवं वाल्मीकि का उल्लेख किया है।

तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण। 

 

वाल्मीकि रामायण पर लिखी गई टीकाएं

तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण की टीकाएं 

कतक टीका इस मामले प्रथम वर्णनीय टीका कही जा सकती है।

इसके साथ ही साथ नागभट्ट जी की तिलक या रामाभिरामी

व्याख्या भी उल्लेखनीय टीका है।

शिवसहाय की रामायण शिरोमणि व्याख्या भी उल्लेखनीय टीका कही जा सकती है ।

तत्वदीप या तीर्थ व्याख्या महेश्वर तीर्थ की एक ऐसी ही रामायण पर लिखी गई टीका है।

रामायण की प्रमुख विशेषताएं 

तथ्यों के आइने में वाल्मीकि रामायण के कुछ खास तथ्यों की बात की जाए तो

विद्वानों का मत  है कि रामायण में निहित काव्यत्व के लक्षणों को आधार भूत मानकर ही

दांडी आदि कवियों ने काव्यों को परिभाषित किया है।

वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड के प्रत्येक शब्द रस

युक्त, छन्दोबद्ध एवं अलंकार मय है इसी लिए इसको सुंदर कांड कहा जाता है । 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 02112018

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मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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