लाल किले की प्राचीर से देश को किसने कितनी बार संबोधित किया?

लाल किले की प्राचीर से देश को किसने कितनी बार संबोधित किया? 

लाल किले की प्राचीर से देश को किसने कितनी बार संबोधित किया?

जी हां,, दोस्तों हम आप सब यह जानते हैं कि भले ही

किसी जमाने में लाल किला केवल मुगलों की शान रहा हो

लेकिन देश की आजादी के बाद भारत का बच्चा बच्चा जानता है

कि आज लाल किला केवल एक किला भर नहीं है

बल्कि सच्चाई यह है कि आज लाल किला भारत की आन बान शान का प्रतीक है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर या किसी भी ऐतिहासिक अवसर पर

लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करना सामान्य नहीं है 

यह सभी को हर्षित रोमांचित और आकर्षित करता है।

आज तक भारत में जितनी भी बार 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाया गया है

उतनी ही बार, हर बार भारत के प्रधानमंत्री ने देश को लाल किले की प्राचीर से संबोधित किया है।

दोस्तों, हरेक भारतीय व्यक्ति यह जानता है कि उसके लिए  लालकिले की प्राचीर से

अपने प्रधानमंत्री को सुनना महज सुनना नहीं होता, बल्कि

आत्मसातकरण की वह प्रक्रिया होती है जिसे हम चाहकर भी

अपनी आत्मा से अलग नहीं कर सकते हैं। 

इसीलिए लाल किले की प्राचीर से संबोधन बेहद खास महत्व का सूचक है। 

चाहे वह भारत का प्रधानमंत्री हो या फिर इतिहास का कोई भी अन्य महापुरुष।

सभी के लिए लाल किले से संबोधन उसका सदैव अभीष्ट संबोधन रहा है।

अभी अभी हाल में 15 अगस्त 2018 को लाल किले की प्राचीर से

प्रधानमंत्री मोदी ने देश को आजादी 72 वें वर्ष के उपलक्ष्य में संबोधित किया है।

ध्यान देने की बात यह है कि 2019 के लोक सभा चुनावों से पूर्व यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए

पांंचवां और अंतिम अवसर था देश को लाल किले की प्राचीर से संबोधित करने के लिए।

यह बात दीगर है कि अक्टूबर 2018 में सुभाष चंद्र बोस को सम्मानित करते हुए

मोदी जी ने अपने कार्यकाल काल में पांच की बजाय कुल छ: बार संबोधित किया है।

यहां पर सर्वाधिक महत्व की बात यह है कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से

देश को संबोधित करने वाले मोदी कुल 13वें तथा 7वें गैर कांग्रेसी हैं।

लाल किले की प्राचीर और भारत के प्रधानमंत्री 

लाल किले की प्राचीर से देश को किसने कितनी बार संबोधित किया है?

जहां तक लाल किले की प्राचीर से भारत के प्रधानमंत्रियों के संबोधन का सवाल है

तो आज तक इस महान ऐतिहासिक जगह से सबसे ज्यादा बार

देश को संबोधित करने का रिकार्ड भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित

श्री जवाहर लाल नेहरू के नाम  तब से बना हुआ है जब से हमारा देश आजाद हुआ है।

आज तक सबसे ज्यादा 17 बार देश को लाल किले से संबोधित करने का रिकार्ड

जवाहर लाल नेहरू के नाम है। 

जहां तक बात नेहरू जी के बाद सबसे ज्यादा लाल किले से देश को संबोधित करने का सवाल है

तो पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद यह रिकार्ड इंदिरा गांधी जी के नाम है।

जी हां दोस्तों, जवाहर लाल नेहरू जी के बाद लाल

किले से देश को सबसे ज्यादा 16 बार इंदिरा गांधी जी ने संबोधित किया है।

इंदिरा जी के बाद इस श्रृंखला में तीसरा नाम डॉ मनमोहन सिंह का आता है

जिन्होंने लगातार दो बार यानी कुल 10 साल तक भारत के प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला

तथा इसी क्रम में लाल किले की प्राचीर से देश को भी 10 बार संबोधित किया  है। 

अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के नाम अब

लाल किले सू देश को संबोधित करने का रिकार्ड 6-6 बार का है।

सुभाष चंद्र बोस को सम्मानित करते हुए अक्टूबर 2018 में मोदी जी ने

लाल किले से देश को संबोधित किया था इसलिए उनके नाम

पांच बार वाला रिकार्ड अब 6 बार का हो चुका है।

राजीव गाँधी और पी वी नरसिंहराव के नाम लाल किले से देश को

सम्बोधित करने का रिकार्ड 5-5 बार का है।

इंदिरा जी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री

बने थे तो नर सिंह राव राजीव जी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बने थे।

लाल बहादुर शास्त्री तथा मोरारजी देसाई ने लाल किले से देश को दो दो बार संबोधित किया है।।

लाल बहादुर शास्त्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद

प्रधानमंत्री बने थे लेकिन जल्द ही उनका निधन हो गया था। वी पी सिंह, आई के गुजराल,

एच डी देेवे गौड़ा, चौधरी चरण सिंह 

के नाम लाा किले से देश को सम्बोधित करने का रिकार्ड 1-1 बार का है।

भारत के प्रधानमंत्रियों में चंद्र शेखर तथा 2 बार  कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनने वाले

गुलजार लाल नंदा ही ऐसे हैं

जिनमें से किसी ने भी लाल किले से देश को सम्बोधित नहीं किया है।

जवाहर लाल नेहरू 17 बार।

इंदिरा गाँधी 16 बार

मनमोहन सिंह 10 बार

अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी 6-6बार राजीव गांधी नर सिंह राव 5-5 बार

लाल बहादुर शास्त्री मोरारजी देसाई दो दो बार

चरण सिंह चौधरी, वीपी सिंह, आई के गुजराल  एच डी देवगौडा 1-1 बार

चंद्र शेखर तथा गुलजारी लाल नंदा  0 बार। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 03 112018

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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