शुभ दीपावली

शुभ दीपावली 

शुभ दीपावली के अवसर पर मैं अपने सभी पाठकों,

मित्रों तथा शुभ चिंतकों का अभिनंदन करता हूं तथा अपने ह्रदय की अतल गहराइयों से

यह विश्वास करता हूं कि आप सभी के साथ साथ मेरे जीवन का भी

अंधेरा मिट सकेगा इस प्रकाश पर्व पर।

इतना ही क्यों मेरी चाहत यह भी है कि यह दीपोत्सव हम, आप, सब के जीवन को

सुख  समृद्धि, सद्भाव से आलोकित कर राष्ट्र को उसकी

समग्र, सम्पूर्ण उन्नति की ओर ले जाए।

मेरी कामना यह भी है कि दीपों का यह महा उत्सव चारों दिशाओं में ही नहीं

बल्कि दसों दिशाओं में भी प्रकाश फैलाए और अपने सर्व कालिक, 

जीवन के लिए जरूरी महा प्रकाश को उत्कर्ष की असीम उचाइयों में के पार ले जाए। 

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के शब्दों में अगर कहें तो

आओ फिर से दिया जलाएं भरी दुपहरी में अंधियारा

सूरज परछाई से हारा

अंतर मन का नेह निचोड़ें

बुझी हुई बाती सुलगाएं आओ फिर से दिया जलाएं 

अद्भुत दीपावली 

दोस्तों, धार्मिक और साथ ही साथ सामाजिक दृष्टि से जैसी महत्ता और व्यापकता

दीपों के इस महा उत्सव अर्थात दीपावली को प्राप्त है वह किसी और हरगिज नहीं।

इतना ही क्यों आप ध्यान से विचार करके देखें तो आपको आश्चर्य होगा कि

दीपावली एक मात्र ऐसा त्योहार है जिसमें हम एक नहीँ बल्कि दो देव पूजन करते हैं।

हम दीपावली में लक्ष्मी गणेश की पूजा करते हैं।

शायद ही हमारा कोई और ऐसा पर्व हो जिसमे हम एक नहीँ दो लोगों की पूजा करते हैं।

आखिर क्यों?

इसका क्या कारण है कि दीपावली में लक्ष्मी के साथ साथ गणेश जी की भी पूजा होती है? 

महाकवि हरिवंश राय बच्चन के शब्दों में आइए जानते हैं दीपावली को,,  

आज फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ 

है  कहां वह आग जो

मुझको जलाए हैं कहां वह ज्वाल मेरे

पास आएं

रागिनी तुम आज दीपक राग गाओ

आज  फिर से तुम बुझा दीपक जलाओ । ।  

दीपावली बेमिसाल है! 

दोस्तों, उपर्युक्त तथ्य बेहद महत्वपूर्ण है कि हम किसी

और पर्व में एक साथ अपने दो अभीष्ट देवताओं की पूजा नहीं करते।

लेकिन इसका क्या कारण है कि हम दीपावली में एक नहीँ दो दो लोगों की पूजा करते हैं।

लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा हम आखिर क्यों करते हैं?

इसका उत्तर यह  है कि लक्ष्मी धन की देवी हैं इसलिए यदि किसी पर इनकी कृपा हो गई तो

वह धन से भर जाएगा।

अब चूंकि ज्यादातर व्यक्ति धन पाकर बौरा जाते हैं इसलिए धन के साथ साथ

विवेक भी होना चाहिए तभी व्यक्ति न तो बौराएगा और न ही धन के मद में

किसी को अकारण कष्ट पहुंचाएगा। 

महानकवि सोहन लाल द्विवेदी के शब्दों में दीपावली,,  

हर घर हर दर बाहर भीतर

नीचे ऊपर हर जगह सुघर

कैसी उजियाली है पग पग?

जगमग जगमग जगमग जगमग

छज्जों में, छत में, आले में तुलसी के नन्हें थाले में यह कौन रहा है दृग को ठग 

जगमग जगमग जगमग जगमग ।। 

 

महाकवि नीरज भी दीपावली को अपने खुद के शब्दों में
कुछ इस तरह व्यक्त करते हैं ,,
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए
नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल उड़े यर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी
निशा की गली में तिमिर राह भूले
खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग
उषा जा न पाए  निशा आ न पाए
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।  

महादेवी वर्मा जो महान कवयित्री हैं आइए देखते हैं

वह दीपावली के संबंध में क्या कहती हैं,,

मधुर मधुर मेरे दीपक जल

युग युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल

प्रियतम का पथ आलोकित कर सौरभ फैला विपुल धूप बन मृदुल मोम सा

घुल रे मृदु तन

दे प्रकाश का सिंधु

अपरिमित, तेरे जीवन का अणु गल गल

पुलक पुलक मेरे दीपक जल ।। 

 

ताकि शुभ दीपावली सुरक्षित हो

दोस्तों, हो सकता है आपको शुभ दीपावली के बीच सुरक्षित दीपावली का आशय

पल भर के लिए समझ में न आए लेकिन जरा विचार कीजिए

क्या आपको नहीं लगता कि कई बार हमारे लाख न चाहने के बाद भी

हमारी अज्ञानता या फिर क्षण मात्र की लापरवाही भी हमारे रंग में भंग करने को पर्याप्त होती है।

दोस्तों, बस इसी लिए सच यह है कि शुभ दीपावली के साथ ही साथ

यदि हमारी दीपावली सुरक्षित भी हो तो दीपों के इस

महा उत्सव का मजा ही दो गुना से चार गुना हो जाता है।

सुरक्षित दीपावली का पहला कदम यही है कि हम बेतहाशा पटाखे चलाकर

अपनी बहादुरी या फिर रईसी न दिखाएं तो बेहतर होगा।

क्योंकि हकीकत यही है कि ऐसा करने वाले भले ही बहादुर और रईस हों

लेकिन ऐसे लोगों को पर्यावरण पर्यावरणीय सोच की दृष्टि से कंगाल ही कहा जाता है।

ऐसे लोगों को इतना भी पता नहीं होता कि बहुआ, बिंदकी, ललौली  फतेहपुर जैसे छोटे शहर भी

दीपावली के दिन भयंकर ध्वनि और वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाते हैं।

दिल्ली की बात करें तो दीपावली के दिन यहा 140 डेसिबल तक

ध्वनि प्रदूषण की माप चली जाती है।

जबकि मनुष्य के कान 60 डेसिबल को ही सुन या सहन कर पाते हैं। 

अब आप खुद तय कर लीजिए कि आपको क्या शुभ दीपावली के साथ साथ

सुरक्षित दीपावली चाहिए या नहीं चाहिए? 

 

शायद आपको जरूर पता होगा कि ध्वनि प्रदूषण
के चलते
शरीर के कई अहम अंगों को क्षति पहुंच सकती है।
WHO विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगातार
तेज आवाज से व्यक्ति बहरा हो जाता है।
नींद भी ठीक से नहीं आती।
कार्डियोवैस्कुलर और साइकोफिजियोलाजिक
जैसी व्याधियां भी हो सकती हैं ।
आप के अंदर गुस्सा और चिड़चिड़ापन भी बढ़
जाता है। 

उपयोगी बातें आपके लिए 

शुभ दीपावली और सुरक्षित दीपावली आपको दो गुना नहीं चार गुना आनंद देंगी

यदि आप इन चंद बातों का पालन करें  जैसे:

85 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि पैदा करने वाले पटाखों को न चलाएं।

बारूद से जलने पर तुरंत ठंडे पानी या बर्फ से सिंकाई करें।

आंखों में यदि रोशनी अटैक हो जाए तो ठंडे पानी से आंखों को धुलना चाहिए

फिर संभव हो तो गुलाब जल भी डालें।

बारूद का कोई भी आइटम कम से कम चार मीटर की दूरी पर रह कर संचालित करें तो

शुभ दीपावली सुरक्षित दीपावली भी हो सकती है। आतिशबाजी करें पर

पास में कंबल या और जरूरी असबाब अपने पास जरूर रखने चाहिए।

केवल बच्चों को धूमधड़ाका न करने दें वहां कोई बुजुर्ग जरूर रहना चाहिए।

अस्पताल आदि के पास या किसी बीमार व्यक्ति के नजदीक पटाखे चलाना अनुचित है।

घर में यदि दमा मरीज हो तो भी पटाखा न चलाएं।

डायबिटीज के मरीजों को चाहिए कि दीपावली का प्रसाद जरूर खाएं

लेकिन खाते हुए अपनी कंडीशन कतई न भूलें। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 07112018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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