बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने जीवन को


बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने   जीवन को! 

बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने जीवन को!

क्योंकि दोस्तों, शुतुरमुर्ग चाहे जितना तूफान को भूलने की कोशिश करे

सच यही है कि तूफान आता भी और तूफान जाता भी है लेकिन अपने पीछे

अच्छाई कम, बुराई ज्यादा छोड़ जाता है।

आज यही शुतुरमुर्ग वाला हाल हम होशियार लोगों का है।

मतलब यह है कि हम एक तरफ तो प्रदूषण और पर्यावरण की बड़ी बड़ी बातें करते हैं, 

तो दूसरी तरफ मौका मिलते ही उन्हीं हरकतों से बाज नहीं आते,

जिनकी परेशानियों की हर दिन ही नहीं हर पल माला जपते रहते हैं।

अभी अभी दीपावली की रात गुजरी है जिसमें हमने हवा को मैला करने की भरपूर कोशिश की है, 

जबकि हकीकत यह है कि सुप्रीम कोर्ट तक ने कोशिश

की थी कि हम दीपावली के शुभ अवसर पर कोई भी ऐसा अशुभ काम न करें

जिससे हमारा पर्यावरण कराहने लगे और हमें सांस

लेने के लिए रत्तीभर भर भी शुद्ध हवा देने से इन्कार कर दे।

पर वाह रे ढोगियों आपने तो सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं

मानी आपने वही किया जो सचमुच आपको नहीं करना चाहिए था।

जो दिन रात पर्यावरण को शुद्ध साफ रखने की वकालत करते हैं

उनकी ही वजह से आज हवा की हालत इस कदर बद से बदतर हो गई है कि

इसके बारे में सोचने मात्र से डर लगने लगा है।

हाल क्या है हवा का न पूछो वतन

बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने जीवन को इसका मतलब यह है मेरे प्यारे दोस्तों,

कि आजकल बढ़ता वायु प्रदूषण  बड़ों की ही नहीं बच्चों की सेहत का भी दुश्मन बन गया है।

एक अध्ययन  के मुताबिक वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन से

बच्चों में आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसआर्डर यानी एएसडी का खतरा 80% तक बढ़ गया है।

आटिज्म अर्थात स्वालीनता एक मानसिक समस्या होती है, 

इस बीमारी से पीड़ित या ग्रसित बच्चे दूसरों से घुलने मिलने और बात करने से हिचकते रहते हैं।

चीन के शोधकर्ताओं ने  तीन साल तक के बच्चों में

सूक्ष्म कणों( पीएम 2.5) के पड़ने वाले प्रभाव पर गौर किया है।

इसके अलावा एएसडी प्रभावित 124 बच्चों और

1240 सामान्य बच्चों पर नौ साल तक किए गए अध्ययन में भी 

ए एस डी और वायुु प्रदूष के बीच गहरा संबंध होने का पता चला है।

चाइनीज एकेडमी आफ साइंस के शोधकर्ता झिलिंग गुहो के कथनानुसार,

“आटिज्म के कारक जटिल हैं और इनको अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं गया है,

लेकिन आनुवांशिक और अन्य कारकों के अलावा पर्यावरण संबंधी कारक भी बढता जा रहा है।

वातावरण के विषैले तत्व बच्चों के मस्तिष्क की कार्यक्षमता और इम्यून सिस्टम पर असर डाल सकते हैं।”

इसी लिए कहते हैं कि बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने जीवन को ।

 

राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक और बढ़ता वायु प्रदूषण 

बचा सको तो बचा लो यारों अपने अपने जीवन को

क्यों राष्ट्रीय गुणवत्ता सूचकांक कुछ ऐसा ही कहना चाहता है। 

दोस्तों, देश में रोजाना वायु की गुणवत्ता को मापने का एक सूचकांक होता है।

हमारे देश में इसे राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक कहा जाता है

तो अलग अलग देशों में इसके अलग अलग नाम हैं।

वायु गुणवत्ता का स्तर वायु प्रदूषण सूचकांक के रंग देखकर पहचाना जाता है।

अगर आप भी अपने शहर की हवा के बारे में जानना चाहते है कि वह कितनी शुद्ध और जहरीली है

तो आपको इसके लिए अपने शहर की हवा के रंग को ध्यान से देखना होगा।

अगर आपके शहर की हवा हरे रंग की है तो यह अच्छी कंडीशन की है।

लेकिन अगर आपके शहर की हवा का रंग लाल है तो यह खराब कंडीशन की निशानी है।

यह लाल रंग स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना देने की पहचान है।

सूचकांक में वायु की शुद्धता का मूल्यांकन 0 से 500 अंक के दायरे में किया जाता है।

यदि वायु की गुणवत्ता 50 तक है तो यह शुद्ध है।

इसके ऊपर जितने भी अंक बढते जाएंगे उसका

मतलब यही होगा कि हवा उतनी ही बड़ी आपके स्वास्थ्य की दुश्मन है। 

वायु गुणवत्ता सूचकांक का मतलब इस प्रकार जाना जा सकता है। 
1-50=मतलब हवा अच्छी है,
51-100=मतलब हवा अच्छी है। 
101-200=मतलब हवा मध्यम है
201-300=खराब है हवा
301-400=बहुत खराब है
401-500=खतरनाक है। 

यान देने की बात यह है कि जिसे यहां पर संतोषजनक कहा गया है

वह भी संवेदनशील लोगों के लिए सांस लेने में तकलीफ देती है।

जिसे मध्यम कहा गया है वह भी फेफड़े, अस्थमा और दिल के मरीजों को

सांस लेने में तकलीफ देती है।

खराब मानक की हवा अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी पैदा करती है।

बहुत खराब मानक वाली हवा के इलाके में रहने लायक नहीं होता।

जहां की हवा खतरनाक मानक की है उसका मतलब यह है कि

वहां  लोग भी गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाएंगे। 

ये पौधे आपकी सांसें लौटा सकते हैं 

जी हां, दोस्तों इस संसार में हर समस्या से बचने का उपाय है।

इसीलिए दुनिया जानती है कि आप अगर सचमुच की इच्छा शक्ति रखें

तो इस प्रदूषण की महामारी से भी बचा जा सकता है।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने अपने अध्ययनों से यह सिद्ध कर दिया है कि

हमाारे आस पास कुछ ऐसे खास पेड़ पौधे हों तो

हमारी सांसें न केवल स्वस्थ हो सकती हैं बल्कि उनमें जान भी फूंकी जा सकती है।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के वनस्पति शास्त्र विभाग के

असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर सुरेन्द्र यादव के अनुसार  कुछ ऐसे पौधे हैं

जो हमारे लिए लाभकारी भी हो सकते हैं। 

 

अरेका पाम 

क्या आप जानते हैं दीवाली में आजकल घरों की साफ़ सफाई कम होती है

लेकिन हैसियत की दिखाई ज्यादा होती है फलस्वरूप तरह तरह के डेंट पेंट,

घर में बेतहाशा मौजूद रहते हैं।

इतना ही क्यों केमिकल से भरपूर घरों में मौजूद नेल पॉलिश  हेयर रिमूवर,

गोंद और चमड़े की वस्तुओं में टोल्यूशन और एयरोमैटिक हाइड्रोकार्बन होता है।

इस प्रदूषण को घरों से अरेका पाम हटा देता है। 

फिलोडेन ड्रोन्स 

ये पोधै कई अलग अलग किस्मों में आते हैं, जिनमें लेसी ट्री, हार्ट लीफ आदि शामिल हैं।

चौड़ी पत्ती वाले ये पौधे घर और ऑफिस की हवा में मिली हुई दूषित गैसों को हटाकर,

वायु को शुद्ध करते हैं। 

बम्बू पाम

दूसरे पौधों से जरा हटकर इस पौधे का काम है।

क्योंकि यह पौधा अन्य पौधों की अपेक्षा वायु से

फर्मेल्डिहाइड को जल्दी घटा देता है और वायु को शीघ्रता से शुद्ध करते हैं।

फर्मेल्डिहाइड नामक जहर हमारे आपके घरों में रंग और डिटर्जेंट में होता है। 

रबर प्लांट

दोस्तों  पहली बात तो यह पौधा अगर घर में लगा हो तो आकर्षक लगता है।

रही दूसरी बात तो यह पौधा हमारे घरों में मौजूद प्रदूषण को भी सोखता है।

हां इसे 16 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है ।

इसी में यह अपना काम करता है और घर की हवा में मौजूद फर्मेल्डिहाइड को बाहर करता है। 

लेडी पाम

इस पौधे की विशेष बात यह है कि इसे सूरज की 16 डिग्री गर्मी चाहिए।

इसका मतलब यह हुआ कि यह बहुत ज्यादा रखवाली की अपेक्षा नहीं करता।

इसे आप बालकनी में रखिए यह आपके घर के वातावरण को शुद्ध रखता है। 

बोन्साई

यह पौधे बौने आकार के होते हैं जिन्हें जापानी कला

बोन्साई से बनाने के कारण बोन्साई ही सामान्यतः कहते हैं।

इनके तने चौड़े होते हैं जिससे इस कारण इन्हें  पानी और

ज्यादा देखरेख की जरूरत भी नहीं पड़ती है।

अगर आपके घर में किसी को कफ, खांसी  गले में खराश वगैरह की शिकायत है

तो आप इसे घर में जरूर जगह दें यह आपके लिए निश्चित ही फायदेमंद साबित होगा। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 09112018

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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