सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण

सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण 

सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण ।

सुबह जब अखबार उठाया तो हेडिंग पढकर विश्वासही नहीं हुआ कि

अखबार का फ्रंट पेज और उसकी लीड स्टोरी देख रहे हैं।

लेकिन जैसे ही दोबारा अखबार पर नजर दौड़ाई तो पता चला कि

सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण महज एक हेडिंग ही नहीं है

बल्कि पांच कालम की रनिंग स्टोरी वाली यह एक भरी पूरी खबर है।

इस भरी पूरी सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण संबंधी खबर के मुताबिक

जाड़े की शुरुआत में ही वायु प्रदूषण अपना असर दिखाने लगता है। 

जाड़े की शुरुआत होते ही जो प्रदूषण असर दिखाने लगता है 

उस प्रदूषण के बढने का अब एक ऐसा भी कारण  सामने आया है जो 

सचमुच यह सिद्ध करता है कि दिया तले अक्सर अंधेरा ही कायम रहता है। 

विशेषज्ञों ने इस बात पर गौर किया है कि जब भी सींक वाली झाड़ू से

शहरों में सुबह शाम झाड़ू लगाई जाती है तो बेहद धूल उड़ती है। 

दूसरी बात यह भी सच है कि ज्यादा दूर कचरा न ले जाना पड़े, 

इस चिंता से निजात पाने के लिए सुबह सुबह गली का कूड़ा गली में ही इकट्ठा करके

सफाई करने वाले स्थाई या अस्थाई कर्मचारी गली में ही आग लगा देते हैं।

यह प्रक्रिया एक मुहल्ले की नहीं बल्कि हर मुहल्ले और हर जगह की है।

कहानी कूड़े के करतब की 

इस पूरी कहानी से प्रदूषण की जो सबसे बड़ी कहानी बनती है वह यह है कि

सुबह और शाम कस्बे से लेकर मेट्रो शहर तक सभी भड़भूंजा का भार बन जाते हैं।

शहर भर में जगह जगह पर सुबह सुबह जलता हुआ कूड़ा

इस सच्चाई को झूठ में बदल देता है कि सुबह की हवा हेल्द होती है।

मैं पूरे देश के बारे में नहीं जानता लेकिन एक बात और है जो मैं यहां कहना चाहता हूं 

वह यह है कि जब से यूपी में योगी बाबा की सरकार बनी है

तब से शुद्ध हवा की होने वाली यह दुर्गति केवल सुबह को ही नहीं होती बल्कि

यूपी के कम से कम हर जिला मुख्यालय में यह भयंकर दुर्गति शाम को भी होने लगी है। 

झाड़ू लगाने से उड़ती है धूल

इस तस्वीर में तो सब शौकिया लोग फोटो खिंचाने के लिए हंसते हुए झाड़ू लगा रहे हैं

लेकिन जिनकी यह वास्तव में ड्यूटी है यानी वह सफाई कर्मी

जो सरकार से या सरकारी ठेकेदार से हर महीना झाड़ू लगाने की तनख्वाह लेते हैं

वह कभी हंसते हुए या फिर खुश होकर झाड़ू नहीं लगाते।

बल्कि सच कहें तो सफाईकर्मी बड़ी बेरहमी से झाड़ू

लगाते हैं फलस्वरूप धूल का गुबार उड़ने लगता है चारों तरफ।

जिस सुबह सुबह वातावरण तरोताजा और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होना

चाहिए वह सुबह भयानक रूप से उड़ती हुई धूल की पहचान बन जाती है।

झाड़ू लगाने वाले इतने गुस्से और हीनता बोध के चलते इतनी बेपरवाही से झाड़ू लगाते हैं

कि लोगों को भागना पड़ता है।

सच कहें तो सींक वाली झाड़ू नहीं बल्कि सींक वाली

झाड़ू की रोटी खाने वालों की वजह से सींक वाली झाड़ू बदनाम हो रही है। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश 

प्रदूषण की इस अकथ कहानी का नवीनतम पक्ष यह है कि लगातार खराब हो रही

हमारी हवा की हकीकत के लिए नगरीय निकाय भी कम दोषी नहीं है।

प्रतिबंध के बावजूद शहरों में जगह जगह कूड़ा जलाया जा रहा है।

झाड़ू लगाने में भी सिर्फ सुबह ही नहीं बल्कि अब शाम को भी धूल उड़ रही है।

उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।

बोर्ड ने सींक वाली झाड़ू की बजाए अब मशीनों से सफाई करने के निर्देश दिए हैं।

आप सभी को याद होगा पिछले साल जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में

स्मोग की भीषण समस्या हुई थी तो तो हमारे उत्तर

प्रदेश की राजधानी लखनऊ इससे अछूती नहीं रही थी।

उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आषीश तिवारी का कहना है कि

शहरों में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध है फिर भी ऐसा हो रहा है।

इतना ही क्यों निर्देश तो यह भी हैं कि झाड़ू लगान के

पूर्व पानी का छिड़काव किया जाए  लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

हकीकत यह है कि जल्दी के चक्कर में सफाई कर्मी ऐसी सफाई करते हैं कि

धूल का भंडार आकाश तक पहुंच जाता है लेकिन सफाई ज्यों कि त्यों ही रहती है। 

लखनऊ की हवा जहरीली नम्बर सात

सींक वाली झाड़ू और प्रदूषण की सच्चाई यह भी है कि हमारे प्रदेश की राजधानी की हवा, 

आज की डेट में जहरीली नंबर सात बन चुकी है।

10 नवंबर 2018 को लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स 388 था।

यह एक दिन पहले यहां पर 412 भी था।

कहने का मतलब यह है कि 388 वाला स्तर भी मानक से 8 गुना ज्यादा है।

ए क्यू आई स्टैंडर्ड का मानक 50 होता है।

इससे सामान्य बुद्धि रखने वाला आदमी भी समझ सकता है कि

हवा का क्या स्तर है और क्या वास्तव में होना चाहिए। 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 11112018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

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