मुंबई हमले के 10 साल:तथ्यों के आइने में

मुंबई हमले के 10 साल:तथ्यों के आइने में 

मुंबई हमले के 10 साल:तथ्यों के आइने में जो कुछ भी कहते हैं

वह हम सब भारत वाशियों के लिए यही कहते हैं कि हमें

हर पल इतनी मुस्तैदी से रहना चाहिए कि दुश्मन हमारा कभी भी बाल बांका न कर सके

और अगर वह अपनी नापाक हरकत से बाज न आए तो उसके उफनते फन को

पैरों के जूते से तब तक मसलना चाहिए जब तक उसके होने वाले दर्द से

उसकी आने वाली सात पुस्तों की आने से पहले ही रूह तक न कांप जाए।

हां, इतना जरूर करना चाहिए कि हो सके तो जूता ऐसा हो

जिसके नीचे लोहे की नाल जरूर लगी हो क्यों कि सुना है आतंकी पिल्ले

जहरीले नाग से कम नहीं होते और नापाक सांप सिर्फ पैर से ही कुचले जाते हैं। 

मुंबई हमले की आतंकी घटना की कहानी 

मुंबई में अब तक का सबसे कायराना और

अमानवीयता की हद से परे बर्बर तथा निम्न कोटि की हरकतों से भरा हमला

आज ही के दिन दस साल पहले यानी 26 नवंबर 2008 को

मुंबई के ताज होटल व छत्रपति शिवाजी टर्मिनल के अलावा

लियोपोल्ड कैफे, नरीमन हाउस और ओबेराय ट्राईडेंट जैसी जगहों में एक साथ हुआ था।

इसमें कुल 183 लोगों की जान गई थी, जिसमें 17 शहीद सुरक्षा कर्मी थे।

26 विदेशी पर्यटकों के अलावा 166निर्दोष नागरिक मारे गए थे।

इस प्रायोजित हमले में 311 लोग घायल भी हुए थे। इस बर्बर और क्रूर हमले को पाकिस्तान के

आतंकवादी संगठन लश्कर ए तैयबा के 10 आतंकियों ने अंजाम दिया था।

ये पाकिस्तानी नापाक आतंकी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे थे।

इन्होने समुद्र में एक भारतीय मछुआरे अमर सिंह सोलंकी की बोट

एमवीकुबेर को कब्जे में ले लिया था, 

इसके बाद यह उसी से मुंबई के कोलाबा तटपपर 26 नवंबर को रात 8 बजे पहुंचे थे। 

आतंकी पिल्लों की   क्रूर हरकतें 

मुंबई हमले को अंजाम देने वाले पिसाचों ने जिस बोट पर कब्जा कर लिया था, 

उसमें सवार चार भारतीयों को रास्ते में ही बारी बारी से मारकर

उनकी लाशों को समुद्र में फेंकने के बाद मुंबई के कोलाबा तट पर उतरे थे।

उर्दू बोलने वाले ये हत्यारे कोलाबा तट के पास स्थित मछली बाजार से चार भागों में बंट गए थे।

इसके बाद टैक्सी पकड़ कर अपनी अपनी तय जगहों में गए थे।

इन दुष्टों ने यह सब करने के पहले बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाके से भारतीय सिम कार्ड खरीदा था।

यह आतंकी पक्के नशेबाज थे क्योंकि यह हमले के वक्त कोकीन के नशे में धुत थे।

यह पाकिस्तानी आतंकी लश्कर ए तैयबा के आका द्वारा पल पल संचालित किए जा रहे थे।

इन्हें भारत में जो भी संदेश और निर्देष मिल रहे थे वह

इनका सरगना हाफिज सईद और उसका गुर्गा जकी उर रहमान लखवी दे रहा था। 

मुंबई हमला कब कहां कैसे? 

मुंबई हमले की शुरुआत 26 नवंबर को ही रात 9 बजकर बीस मिनट के आसपास हुई थी

जब आतंकियों ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में पहला हमला किया था।

यहां 90 मिनट तक आतंकी मौत से खेलते हुए 58 लोगों को मारा था।

एके-47 से हमला करने वाले दो आतंकी थे इसी में

एक था अजमल कसाब और दूसरा था इस्माइल खांन।

कसाब को जिंदा पकड़ा गया था जिसे बाद में फांसी दी गई थी।

ताजहोटल में चार आतंकियों ने हमला बुधवार 9:30 के आसपास किया था।

यह हमला और आपरेशन यहां शनिवार तक चला जिसमें 50 लोग मारे गए थे,

140 बंधक छुटाए गए थे। यहां चारों आतंकी मारे गए थे।

यहां पर हमारा एक कमांडो शहीद हुआ था।

लियोपोल्डकैफे दक्षिणी मुंबई में है जो मुंबई का मशहूर स्थान है।

यहां 10 लोग मारे गए थे।

ओबेराय ट्राईटेंट में भी हमला बुधवार को 9:45 में हुआ था

जिसका आपरेशन सहित खात्मा शुक्रवार 3:30 में हुआ।

यहां 30 लोग मारे गए थे लेकिन 200 बंधक बचा लिए गए थे।

यहां दो आतंकी मारे गए थे। यहां सबसे पहले द्वार में खड़े गार्ड को मारा जाता है

फिर रिसेप्शन में अंधाधुंध गोलीबारी होती है।

नरीमन हाउस में भी आपरेशन बुधवार से शुक्रवार तक चला था।

नरीमन हाउस में पांच लोग मारे गए थे लेकिन यहां दो आतंकी भी मारे गए थे।

यहां एक कमांडो शहीद हुआ था। 

मुंबई हमले में हुए शहीद

मुंबई हमले में कुल 17 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए थे।

महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे शहीदों में प्रमुख हैं।

12 दिसम्बर 1954 को जन्में हेमंत 1982 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।

राॅ एजेंसी में यह 12 साल तक रहे थे।

जब शहीद हुए तो एक साल पहले ही महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख थे।

साहसी शहीदों में कमांडो गजेंद्र सिंह उत्तराखंड के रहने वाले थे।

 

इनके गांव का नाम गणेश पुर है यह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे।

एसीपी अशोक काम्टे 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी थे।

इन्होंने बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने में सहयोग किया था।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर भी शहीदों में शामिल थे।

संदीप उन्नी कृष्णन 17 मार्च 1977 को जन्में थे।

प्राथमिक शिक्षा बेंगलुरु में हुई थी।

एन डी ए में आने के बाद 1999 में बिहार रेजीमेंट की 7वीं बटालियन में तैनाती हुई थी।

जनवरी 2007 में यह एन एस जी में आए थे। 

 

धन्यवाद

के पी सिंह किर्तीखेड़ा 26112018

 

 

About KPSINGH

मैने बचपन से निकल कर जीवन की राहों में आने के बाद सिर्फ यही सीखा है कि "जंग जारी रहनी चाहिए जीत मिले या सीख दोनों अनमोल हैं" मैं परास्नातक समाज शास्त्र की डिग्री लेने के अलावा CTET और UP TET परीक्षाएं पास की हैं ।मैंने देश के हिन्दी राष्ट्रीय समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेखन किया है जैसे प्रतियोगिता दर्पण विज्ञान प्रगति आदि ।

View all posts by KPSINGH →

3 Comments on “मुंबई हमले के 10 साल:तथ्यों के आइने में”

  1. सर बहुत ही खूबसूरत पोस्ट है।
    सर मैं अखिलेश नागर आपके साथ ही पोस्ट लिख रहा था,लेकिन एस. पी. सर द्वारा सभी को बैन कर दिया गया,जबकि मेरी पोस्ट हमेशा ही साफ सुथरी रहीं थीं। यह बात आप भी जानते हैं। मैंने आपसे यह भी कहा था,कि आप मेरे बारे में सिफारिश करें,लेकिन आप की तरफ से कोई प्रयास नहीं हुआ। इस बात से हमें बहुत निराशा हासिल हुई।

    1. धन्यवाद सर आपने कमेन्ट किया।
      रही बात एस पी सिंह जी से बात करने की तो मैंने कोशिश की थी।
      शायद जल्द ही आपको कोई सूचना प्राप्त हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *